Entomopathogenic nematodes (EPNs) in biological pest control

कीटों के आक्रमण को रोकने के लिए कीटनाशकों का उपयोग दिन - प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है । जिसके कई दुष्प्रभाव सामने आ रहे है । इन दुष्प्रभावों को कम करने में जैविक कीट नियंत्रण अहंम भूमिका निभाता है । जैविक नियंत्रण का उपयोग जीव विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में किया गया है, खासकर कीटनाशक और पौधों की वृद्धि के लिए ।

फसलों के नाशीजीवों को नियंत्रित करने के लिए दूसरे जीवो को प्रयोग में लाना जैव निंयत्रण कहलाता है । वर्तमान में ईपीएन जैविक नियंत्रण कारक दुनिया भर में कई महत्वपूर्ण कीटो को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है । ताकि कई महत्वपूर्ण कीट कीटनाशकों को नियंत्रित किया जा सके । कीटनाशको को नियंत्रित करने के लिए ईपीएन का उपयोग एक संभावित गैर रासायनिक दृश्टिकोण है।

ईपीएन जैविक नियंत्रण गुणों के अनुकूलतम संतुलन रखने वाले एकमात्र कीट परजीवी सूत्रकृमि है । किसी विशेष कीट को नियंत्रित करने के लिए एक ईपीएन का चयन विभिन्न कारको पर आधारित है । सूत्रकृमि की मेजबान श्रृंखला, मेजबान खोज, पर्यावरणीय कारको की सहनशीलता, उत्तरजीविता और प्रभावशीलता ।

मृदा बनावट, तापमान और मेजबान उपलब्धता को उनके वितरण का निर्धारण करने के लिए महत्वपूर्ण कारक माना जाता है ।

एंटोमोपैथोजेनिक नेमाटोड्स (ईपीएन) क्या है ?

ईपीएन, सूत्रकृमियो (धागे या कीड़ो) का एक समूह है, मिट्टी में रहने वाले, घातक कीट परजीवी हैं जो स्टेइनेर्नेमाटिड और हेटेरोरहबदीटिड परिवार के फाइलम (जाति) निमेटोड से संबधित रखते है । इन्हे इंडोपैरासिटिक निमेटोड भी कहा जाता है क्योकि ये सक्रमित कीट के अंदर परजीवी रूप में रहते है जबकि पादप परजीवी सूत्रकृमि, कीटो को मारते नहीं अपितु पोधों को नुकसान पहुँचाते है ।

ये मिटटी के अंदर और बाहर रहने वाले कीटो के जैविक नियंत्रण में अत्यधिक प्रभावी सिद्ध हए है, जैसे कि कीट पंतगे, तितलियाँ, मक्खियाँ और बीटल के साथ-साथ भृंगो, टिड्डियों और क्रिकेट के वयस्क व लार्वा के रूप में ।

सबसे अधिक जैव निंयत्रण प्रयोग किये जाने वाले एंटोमोपैथोजेनिक नेमाटोड्स वे है, जो कि हानिकारक कीड़ो के नियंत्रण में उपयोग किये जाते है उदाहरणतया: स्टेइनेर्नेमाटिड और हेटेरोरहबदीटिड के सदस्य । ईपीएन पारदर्शी परिवार के जीवाणुओ से जुड़े होते है । स्टेइनेर्नेमाटिड वंश से संबद्धित जीवाणु की प्रजाति ज़िनोर्बड्स है और हेटेरोरहबदीटिड वंश से संबद्धित जीवाणु की प्रजाति फोटोरबड्स है ।

ये जीवाणु सूत्रकृमियों की आंतो से संबद्धित रहते है । ईपीएन अन्य परजीवी एवं पादप सूत्रकृमि से भिन्न होता है, क्योकि बैक्टीरिया के साथ उनके पारस्परिक सम्बद्ध के कारण वे अपने मेजबान को (जिस कीट पर सूत्रकृमि आक्रमण करता है) समय की अपेक्षाकृत कम अवधि में मारते है । ये अपने मेजबान को निष्फल या कमजोर कर देते है । ईपीएन केवल कीड़ो को सक्रमित करने में विशिष्ट है ।

ईपीएन के तीसरे किशोर चरण को संक्रामक किशोर (आई जे) के रूप में जाना जाता है । संक्रमित किशोर एकमात्र मुफ्त जीवित चरण है और कीट मेजबान के बाहर पाया जाने वाला एकमात्र चरण है । ये मिटटी में कई सप्ताहों से संक्रामक चरण में महीनो तक रहते है तथा कई कीड़ो की प्रजातियों को संक्रमित करने में सक्ष्म है ।

ईपीएन मिटटी में स्वाभाविक रूप से होते है और कार्बन डाई ऑक्साइड, कम्पन और अन्य रासायनिक संकेतो की प्रतिक्रिया में अपने मेजबान का पता लगाते है, और वे रासायनिक उत्तेजनाओं पर गतिविधि करते है । संक्रामक किशोर कीट मेजबान के प्राकृतिक द्वार जैसे मुख, गुदा एवं मेजबान की छाल के पतले भागो के माध्यम से प्रवेश करते है ।

संक्रमण के बाद संक्रामक किशोर अपनी आंतो से उनके सहजीवी जीवाणुओं की कोशिकाओं को मेजबान के रुधिर (खून)  में छोड़ देते है । जीवाणु कीट के हेमोलिम्फ में तेजी से गुना करता है तथा विषाक्त पदार्थ उत्पन्न करता है, जिस से संक्रमित कीट मेजबान 24-48 घंटो के भीतर मर जाता है ।

स्टेइनेर्नेमाटिड द्वारा मारे गए कीट मेजबान का शरीर क्रीम तथा सफ़ेद रंग का होता है, तथा हेटेरोरहबदीटिड द्वारा मारे गए कीट का रंग लाल तथा गहरा भूरा होता है । चौथे चरण में सूत्रकृमि किशोरों और वयस्कों में विकसित होता है ।

संतान, सूत्रकृमि वयस्कों के लिए चार किशोर चरणों के माध्यम से गुजरते है । मेजबान शव के भीतर एक या अधिक पीढ़िया हो सकती है और अधिक संख्या में संक्रामक किशोर उत्पन्न होते है, अन्य मेजबान कीड़ो को संक्रमित करने एवं उनके जीवन को लगातार आगे बढ़ने के लिए संक्रामक किशोर को पर्यावरण में जारी किया जाता है ।

कीट नियंत्रण में एंटोमोपैथोजेनिक नेमाटोड्सentomopathogenic nematodes in insect control

कीट नियंत्रण में एंटोमोपैथोजेनिक नेमाटोड्स

ईपीएन के लाभ:-

  • ईपीएन किसी विशेष कीट को संक्रमित करने के साथ अन्य कीटो को भी संक्रमित करने की क्षमता रखता है ।
  • ईपीएन आमतौर पर 24-48 घंटो की अवधि में कीड़ो को मार देता है ।
  • ईपीएन का इस्तेमाल करते समय अन्य रसायनो की आवश्य्कता नहीं पड़ती है, इन्हे पारम्परिक अनुप्रयोग उपकरण के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है ।
  • ईपीएन के प्रयोग से पर्यावरण पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है ।
  • ईपीएन को इन वीवो और इन विट्रो (ठोस और तरल संस्कृति माध्यम) द्वारा इनकी संख्या में वृद्धि की जा सकती है ।
  • ईपीएन के जीवित रहने के लिए और संक्रामकता के लिए पर्याप्त नमी और तापमान की आवश्य्कता होती है ।
  • ईपीएन में मेजबान कीट को तलाश करने एवं मारने की क्षमता होती है ।
  • ईपीएन या उनसे जुड़े जीवाणु के स्तनधारियों या पौधों के लिए कोई हानिकारक प्रभाव नहीं है ।

ईपीएन का उपयोग करते निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखे :-

  • मिटटी के तापमान, मिटटी की नमी, सूर्य की किरणों से बचाके ईपीएन को उपयोग में लाये ।
  • यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि उनके जीवन चक्रो और कार्यो को समझने के लिए कीट कीटनाशकों की सही प्रजातियों के साथ ईपीएन की प्रजातियों से मेल खाये ।
  • कीट के साथ उचित सूत्रकृमि मेजबान की तलाश वाली रणनीति का मिलान आवश्यक है क्योकि ईपीएन के आवेदन में ख़राब मेजबान उपयुक्तता सबसे आम गलती होती है ।
  • इसके अलावा आवेदन रणनीतिया जैसे क्षेत्र खुराक, मात्रा, सिंचाई और उपयुक्त अनुप्रयोग पद्धति बहुत महत्वपूर्ण है ।

 


Authors:

बबीता कुमारी, विनोद कुमार एवं अनिल कुमार

सूत्रकृमि विज्ञान विभाग, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविधालय, हिसार, 125004

लेखक ई मेलः This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it.

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