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Scientific method to prepare the preserved product of palm fruits

खजूर पामी कुल के अंतर्गत फोनिक्स जाति की कई उपजातियों को प्राय: खजूर नाम दिया जाता है। इनमें फोनिक्स डैक्टिलिफेरा और फोनिक्स सिल्वेस्ट्रिस विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। खजूर भारत में अनेक जगह उगाया जाता है। खजूर की खेती भारत मे हरियाणा, पंजाब, गुजरात पश्चिमी राजस्थान के बीकनेर, बाड्मेर, जेसलमेर, जोधपुर, श्री गंगानगर, चूरु व नागोर जिलो मे होती है।

Palm tree with fruitsखजूर का पेड़ विश्व के सबसे सुन्दर सजावटी पेड़ों में से एक माना जाता है और इसे सड़कों राजमार्गो और मुख्य रास्तों पर शोभा के लिए भी लगाया जाता है। खजूर के ताजे पके फल को खजूर, पिंड खजूर तमर या खुर्मा और पके, सूखे फल को छुहारा, खारिक अथवा डेट कहते हैं।

खजूर विश्व के सबसे पौष्टिक फलों में से एक है। सदियों से यह मध्यपूर्व एशिया और उत्तरी अफ्रीका के रेगिस्तानी इलाकों का प्रमुख भोजन बना हुआ है क्योंकि वहाँ इसके सिवा और कुछ उत्पन्न नहीं होता। यह ताज़ा और सूखा, दोनों तरह के फलों में गिना जा सकता है।

पेड़ पर पके खजूर ज़्यादा स्वादिष्ट होते हैं। लेकिन जल्दी खराब हो जाने की वजह से इसे धूप में सुखाया जाता है। ताज़े खजूर के मुकाबले सूखे खजूर में रेशों की मात्रा अधिक होती है। इसके सेवन से ग्लुकोज और फ्रुक्टोज के रूप में नैसर्गिक शक्कर हमारे शरीर को मिलती है। यह आम शक्कर से अच्छी होती है। 

खजूर अपने आप में एक टॉनिक भी है। खजूर के साथ उबला हुआ दूध पीने से ताकत मिलती है। खजूर को रात भर पानी में भीगो कर रखिये। फिर इसी में थोड़ा मसल कर उसका बीज निकाल दीजिए। यह हफ्ते में कम से कम दो बार सुबह लेने से अपने दिल को मजबूती मिलती है।

यदि कब्ज की शिकायत है तो रात भर भीगाया हुआ खजूर सुबह महीन पीस कर लेने से यह शिकायत दूर हो सकती है।

इसकी पत्तियाँ और तना घर के लिए लकड़ी बाड़ और कपड़े बनाने के काम आते हैं। पत्तियों से रस्सी, सूत और धागे बनाए जाते हैं जिनके प्रयोग से सुंदर टोकरियों और फर्नीचरों का निर्माण होता है। फल की डंडियों और पत्तियों के मूल हिस्से इंधन के काम आते हैं।

खजूर से अनेक खाद्य पदार्थों का निर्माण होता है जिनमें सिरका, तरह-तरह की मीठी चटनियाँ और अचार प्रमुख हैं। अनेक प्रकार के बेकरी उत्पादों के लिए इसके गूदे का प्रयोग होता है।

इससे निकलने वाले खजूरी रस और उससे तैयार किए हुए मद्य तथा गुड़ का प्रचुर उपयोग होता है।  

फलो के गुदे मे लगभग 20 प्रतिशत नमी, 60-65 प्रतिशत शर्करा,  2.5 प्रतिशत रेशा,  2.5 प्रतिशत प्रोटीन, 2 प्रतिशत से कम वसा व खनिज तत्व तथा विटामीन ए, विटामीन बी-1 (थायमीन), विटामीन सी, नियासिन तथा विटामीन बी-2 (राईबोफलेबिन) पाए जाते हैं। एक किलोग्राम खजूर के फलो से 3100 केलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है। 

सूखे खजूर को छुहारा या खारकी कहते हैं। पिंड खजूर भी इसका दूसरा नाम है। मिष्ठान्न व बेकरी में भी इसका उपयोग किया जाता है। इसका मुरब्बा, अचार व साग भी बनता है।

खजूर से बना द्रव्य शहद खूब लज्जतदार होता है और यह शहद दस्त, कफ मिटाकर कई शारीरिक प़ीडाओ को दूर करता है। श्वास की बीमारी में इसका शहद अत्यन्त लाभप्रद होता है। इससे पाचन शक्ति ब़ढती है तथा यह ठंडे या शीत गुणधर्म वाला फल माना जाता है।

ठंडा आहार जिनके शरीर के अनुरूप नहीं होता, उन्हें खजूर नहीं खाना चाहिए। बच्चों को पूरा खजूर न देकर उसकी गुठली निकाल टुक़डे कर खिलाना चाहिए। खजूर एक तरह से अमृत के समान है। 

उपयोग

किस्मे

आवश्यक अपेक्षित गुण

डोका अवस्था के फल

हलावी, खलास, खुनेजी, बरही

डोका अवस्था मे मिठास का होना।

ताजे खाने के लिए

सेवी, ब्रेम

 

पिण्ड खजूर बनाने के लिए

हलावी, शामरान, जेहिदी, खलास

फल तुडाई के समय पूर्ण डोका\ डांग अवस्था मे होना|

छुहारा के लिए

शामरान, खाद्र्रवी मेड्जूल, दयारि

फलो मे गुदे की मात्रा अधिक होना|

खजूर के पेय एव परिरक्षित उत्पाद चटनी, अचार, जैम बनाने के लिए

जगलूल, ब्रेम, सूरिया, हयानी, अमसोक, अन्य स्थनीय किस्मे।

आक्रर्षक रंग,रसीला, महक वाले लाल व पीले रंग के फल| ताजे हरे व पीले फल (सब्जी व अचार, चटानी के लिए)


खजूर रस

खजूर फलो से पौष्टिक, स्वादिष्ट पेय पदार्थ भी बनाये जाते है | खजूर रस (आर.टी.एस.) बनाने के लिए डोका फलो की गुठली निकालकर बराबर पानी की मात्रा के साथ प्रेशर कुकर मे लगभग 10‌‌-12 मिनट तक उबालते है | तत्पश्चात बारीक सूती कपडे (मसलिन) से छान कर रस निकाल लिया जाता है| छने हुए रस मे 1:3 के अनुपात मे पानी तथा चीनी व साइट्रिक अम्ल की इतनी मात्रा मिलाते है जिससे कि कुल घुलनशील ठोस पदार्थ (टी.एस.एस.) 14 डिग्री बिरक्स तथा अम्लता 0.3 प्रतिशत हो जाये । इस प्रकार खजूर के रस से (पेय) को परिरक्षित कर साफ सुखे बोतल मे रखक्रर उपयोग मे लेना चहिए

खजूर फलो का जैम

Palm fruit jamअन्य फलो के जैम की तरह खजूर फलो का जैम भी पूर्ण डोका फलो को गुदे में, चीनी व साइट्रिक अम्ल मिलाकर तैयार किया जा सकता है। परीक्षण मे स्थानीय लाल किस्म के फल से तेयार जैम पीले रंग वाली किस्म की तुलना में अच्छा होता है। खजूर का परिरक्षित उत्पाद जैम को भी अधिक समय तक सुरक्षित रख सकते है।

Khajoor ki chatniखजूर की चटनी

सामग्री :

200 ग्राम खजूर, 100 ग्राम इमली, 1/2 टी स्पून लाल मिर्च पाउडर, 1/2 टी स्पून भुना जीरा पाउडर, 1/4 टी स्पून काला नमक, नमक स्वादानुसार। अधिक समय तक रखने के लिए पोटेशियम मेटाबाई सल्फाइट (500 पी.पी.एम. या 0.5 मिली ग्राम / लिटर) मिलाते है।

विधि :

खजूर के फलो में से गुठली निकाल दें, धोकर इसमें एक कप पानी डाल दें। 2 घंटे के लिए भीगने दें। 5 मिनट के लिए पकाये और ब्लेंडर में बारीक पीस लें। अब इसमें लाल मिर्च पाउडर, जीरा पाउडर और नमक डालकर अच्छी तरह मिला लें, खजूर की चटनी तैयार है।

छुहारा बनाना विधि

डोका अवस्था के फलो को 12-15 मिनट तक उबलते हुए पानी में डुबोकर गर्म वायु प्रचालित ट्रे (ड्रायर) में 45 डिग्री सेल्सियस तापमान पर 62-65 घंटों तक सुखाकर अच्छी गुणवत्ता के छुहारा बना सकते है। धूप में भी सुखाकर भी छुहारे बनाया जा सकते है। जिसकी गुणवत्ता मशीन से सुखाये गये फलो से थोड़ी कम होती है। क्योकी उसमे नमी की मात्रा अधिक होती हैं।

छुहारा और खजूर फल एक ही पेड़ की देन है। इन दोनों की तासीर गर्म होती है और ये दोनों शरीर को स्वस्थ रखने, मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। गर्म तासीर होने के कारण सर्दियों में तो इसकी उपयोगिता और बढ़ जाती है। खजूर फल में छुहारे से ज्यादा पौष्टिकता होती है। पिंड खजूर मिलता भी सर्दी में ही है। अगर पाचन शक्ति अच्छी हो तो पिंड खजूर खाना ज्यादा फायदेमंद है। छुहारे का सेवन तो सालभर किया जा सकता है, क्योंकि यह सूखा फल बाजार में सालभर मिलता है।

छुहारा छुहारा खाने के लाभ

  • छुहारा आमाशय को बल प्रदान करता है।
  • छुहारे की तासीर गर्म होने से ठंड के दिनों में इसका सेवन नाड़ी के दर्द में भी आराम देता है।
  • छुहारा खुश्क फलों में गिना जाता है, जिसके प्रयोग से शरीर हृष्ट-पुष्ट बनता है। शरीर को शक्ति देने के लिए मेवों के साथ छुहारे का प्रयोग खासतौर पर किया जाता है।
  • छुहारे व पिंड खजूर दिल को शक्ति प्रदान करते हैं। यह शरीर में रक्त वृद्धि करते हैं।
  • साइटिका रोग से पीड़ित लोगों को इससे विशेष लाभ होता है।
  • पिंड खजूर के सेवन से दमे के रोगियों के फेफड़ों से बलगम आसानी से निकल जाता है।
  • लकवा और सीने के दर्द की शिकायत को दूर करने में भी खजूर सहायता करता है।
  • भूख बढ़ाने के लिए छुहारे का गूदा निकाल कर दूध में पकाएं। उसे थोड़ी देर पकने के बाद ठंडा करके पीस लें। यह दूध बहुत पौष्टिक होता है। इससे भूख बढ़ती है और खाना भी पच जाता है।
  • छुहारे को पानी में भिगो दें। गल जाने पर इन्हें हाथ से मसल दें। इस पानी का कुछ दिन प्रयोग करें, शारीरिक जलन दूर होगी।
  • अगर आप पतले हैं और थोड़ा मोटा होना चाहते हैं तो छुहारा आपके लिए वरदान साबित हो सकता है, लेकिन अगर मोटे हैं तो इसका सेवन सावधानीपूर्वक करें।
  • जुकाम से परेशान रहते हैं तो एक गिलास दूध में पांच दाने खजूर डालें। पांच दाने काली मिर्च, एक दाना इलायची और उसे अच्छी तरह उबाल कर उसमें एक चम्मच घी डाल कर रात में पी लें। सर्दी-जुकाम बिल्कुल ठीक हो जाएगा।
  • दमा की शिकायत है तो दो-दो छुहारे सुबह-शाम चबा-चबा कर खाएं। इससे कफ व सर्दी से मुक्ति मिलती है।

पिण्ड खजूरपिण्ड खजूर

भारत में प्राय: पेड़ पर खजूर से पिण्ड नहीं बना सकते क्योकि यहां पर वर्षा ऋतु आने से नमी हो जाती है और वर्षा के पानी से पेड़ पर फल खराब होने लगते है।

नमी व तापमान की कमी से पिण्ड बनने के स्थान पर फल गलने लगते है। अत: यहां पर कृत्रिम विधि से पिण्ड खजूर तैयार कीए जाते है।

डोका अवस्था के फलो को 1-2  मिनट तक उबलते पानी में डुबोकर निकाल लें उसके बाद सुखाकर पिण्ड खजूर तैयार किया जा सकता है।

 

खजूर अचारखजूर अचार

खजूर के डोका फल से स्वादिष्ट अचार बनाया जाता है। अचार बनाने के लिए लाल रंग की स्थानीय किस्म के डोका फलो को लेकर पानी से धो कर फल के दो भाग कर गुठली निकाल लेते है।

गुठली रहित फल 1.0 कि.ग्रा., नमक 25 ग्राम, तेल 250-300 मि.ली., मेथी 25-30 ग्राम., राई 25 ग्राम, धनिया 50-100 ग्राम, सोंफ, लाल मिर्च, कलौंजी (जरुरत अनुसार) सभी सामग्री को लेकर फराई पैन में तेल गर्म करे ठन्डा होने पर मिला दे। तुरंत बाद डिब्बे में बंद करके रख दे। 3-4 दिन बाद अचार उपयोग हेतु तैयार हो जाता है।

खजूर के फलो की सब्जी

खजूर के फलो की सब्जीखजूर के फलो की सब्जि बनाने के लिए फलो को साफ पानी मे धोए पीर काटकर गुठली अलग कर दे। गुदा को मुलायम होने के लिए उबलते गर्म पानी में 5-7 मिनट डुबोकर निकाल दे तुरंत बाद अन्य सब्जि की तरह तेल में मसाला भूनकर तैयार करे तथ उसमें  खजूर फलो के कटे भागो को धीमी आंच पर पकाये। इस प्रकार खजूर की सब्जि तैयार की जा सकती है जिसका स्वाद मिठास लिए होता है।

खजूर के बिस्कुटखजूर के बिस्कुट

डोका अवस्था के खजूर फलो से गुठली निकाल कर फल गुदे को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट कर अच्छी तरह सूखाकर पाउडर तैयार करें। खजूर पाउडर की 10-20 प्रतिशत मात्रा को आटा, दुध, चीनी व घी के साथ मिलाकर बेकरी में अन्य बिस्कुट की भाँति ही स्वादिष्ट व पौष्टिक बिस्कुट तैयार किये जा सकते है।

इस प्रकार से, खजूर फलो का समुचित उपयोग करके एवं उस से मूल्य सवंर्धित उत्पाद बनाकर अच्छी आमदनी भी प्राप्त की जा सकती है। जून के अंतीम सप्ताह से अगस्त के दुसरे सप्ताह तक खजूर के फल बाजार मे मिलते है इस समय खजूर के फलो को खरीद कर परिरक्षित उत्पाद तैयार कर सकते है। खजूर के फलो का बाजार मूल्य 60 से 80 रुपे प्रति किलोग्राम होता है

 


Authors:

*मुकेश नागर, * हुकमराज सैनी, ** डॉ. दीपक कुमार सरोलिया,  * लोकेश कुमार

**वरिष्ट वैज्ञानिक के.शु.बा.स॰ बीकानेर

* वरिष्ट अनुसंधान अध्येता के.शु.बा.स॰ बीकानेर

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