System of rice transplanting through paddy transplanter

Paddy transplanterमशीन से धान की रोपाई के लिए खेत की उथली मताई (Puddling) करना आवश्यक है। जिससे चटाईनुमा पौध की सुचारू रूप से रोपाई की जा सके। इस विधि से पौध की जड़े आसानी से मिट्टी को पकड़ लेती है तथा उनकी वृद्धि भी अच्छी होती है।

मताई की कार्य विधि

खेत की पडलिंग (मताई) करने के लिए भुरभुरा होने वाली नमी की अवस्था में बखर या मिट्टी पलट हल से अच्छी तरह जोतना चाहिये। जुताई करने के बाद खेत को समतल करना चाहिये व साथ - साथ खेत के चारो तरफ मेड़ भी बनाई जाए, उसके बाद खेत को पानी से भरकर उसमें कम से कम 50 मि.मी. (2 इंच) पानी का स्तर 24 घंटे तक बनाए रखना चाहिए। तत्पश्चात् पडलर का प्रयोग करें और इसको एक बार आड़े में एवं एक बार तिरछे में अच्छी तरह चलाएं, जिससे मिट्टी व पानी अच्छी तरह से मिल जाए। यह ध्यान रखे कि उथली मताई के लिये 50 - 100 मि.मी. (2 से 4 इंच) से अधिक गहराई तक मताई न करें।

खेत मताई का क्रमवार तरीका

  1. मिट्टी में हल्की नमी होने पर जुताई 75- 100 मि.मी. (2.5 से 4 इंच) गहराई तक करें।
  2. खेत को समतल करें तथा खेत केचारों तरफ मेढ़ बनाए।
  3. खेत में 24 - 36 घंटे तक पानी भरे, जिससे मिट्टी पूर्ण रूप से संतृप्त हो जाए।
  4. खेत में मताई के दौरान 75-100 मि.मी. पानी भरा रहे।
  5. खेत की मताई के लिए उन्नत पडलर आवश्यकतानुसार एक या दो बार चलाए एवं खरपतवार आदि को निकाल दें।
  6. मताई करने के बाद मिट्टी के कणों को स्थिर होने के लिये 24 - 36 घंटे या आवश्यकतानुसार छोड़ दें जिससे उपरी सतह हल्की सख्त हो जाये।
  7. मिट्टी की उपरी सतह सख्त होने के बाद उर्वरक का प्रयोग करें।
  8. धान रोपाई के समय खेत में 50 मि.मी. (2 इंच) पानी होना चाहिये।

Puddling for paddy transplantingमशीन से धान की रोपाई के लिए खेत की पडलिंग

अच्छी तरह से खेत की मताई होने पर, रोपाई यंत्र से रोपाई करने पर निम्नलिखित कठिनाइयां आती हैं

  1. मिट्टी, यंत्र की फिंगर / फ्लाट से चिपक जाती है।
  2. कीचड़ युक्त मिट्टी का बहाव एक तरफ होने पर किनारे की रोपित पौध मिट्टी से दब जाती है।
  3. अधिक गहराई तक मताई करने पर मशीन का पहिया धंस जाता है, और मशीन आगे नहीं बढ़ पाती है।
  4. अधिक गहराई तक मताई करने पर रोपित पौध कीचड़ में कभी -कभी डूब जाता है।
  5. मशीन की फिंगर में खरपतववार, चिकनी मिट्टी, कंकड़ आदि फंस जाते हैं।
  6. मताई किया गया खेत समतल न होने पर पानी समान गहराई पर नहीं रहता है जिससे रोपाई करते समय पानी का बहाव रोपित पौधों को उखाड़ देता है।

मशीन से धान रोपाई हेतु चटाईनुूमा नर्सरीमशीन से धान रोपाई हेतु चटाईनुूमा नर्सरी तैयार करने की विधि

धान की यांत्रिक रोपाई के लिये चटाईनुमा नर्सरी की जरूरत होती है। धान रोपाई यंत्र द्वारा अच्छी रोपाई मुख्य रूप से चटाईनुमा पौध पर निर्भर करती है अतः अच्छी चटाईनुमा पौध तैयार करना आवश्यक है। ताकि आसानी से रोपाई यंत्र की ट्रे में रखी जा सके।

जब पौध में 20 -22 दिनों में 3-4 पत्तिया आ जाती है, तब धान रोपाई यंत्र से रोपाई किया जाना चाहिये । धान रोपाई यंत्र से रोपाई के लिये पौध की लंबाई, तने की मोटाई, पौध की उम्र इत्यादि को ध्यान में रखना आवश्यक होता है।

चटाई नुमा नर्सरी कैसे तैयार करें

मृदा तैयार करना

चटाईनुमा धान की नर्सरी करने के लिये मृदा मिश्रण बनाना अति आवश्यक है, जिससे पौध को उचित मात्रा में पोषक तत्व प्राप्त हो सके तथा पौध की जड़ें एक दुसरे से लिपट जाएं। मृदा मिश्रण बनाने के लिये मिश्रण का अनुपात मृदा कणों के आकार के कारण बदल भी सकता है। भूमि की उपरी सतह की मिट्टी को इकट्ठा करके तथा फिर उसे सुखाने व भुरभुरी करने के बाद 4-5 मि.मी. छिद्र के आकार की छननी से छन लेते है। एक हैक्टेयर की रोपाई करने के लिये साधरणतया एक टन मृदा मिश्रण की आवश्यकता पड़ती है।

नर्सरी बैड को समतल भूमि में बनानाचटाईनुमा धान की नर्सरी

नर्सरी बैड

नर्सरी बैड को समतल भूमि में बनाना चाहिये तथा साथ - साथ मेढ़/नाली भी बनाते है जिससे सिंचाई करने में आसानी रहती है। नर्सरी बैड को पूर्ण रूप से समतल व सख्त होना आवश्यक है। बैड की चैड़ाई 1.2 मीटर रख सकते है, जिससे दो फ्रेम आसानी से बिछा सके। एक हेक्टेयर में रोपाई करने के लिये नर्सरी बैड का क्षेत्रफल 100 वर्ग मीटर पर्याप्त है। इसमें लगभग 400 चटाईनुमा आयताकार फ्रेम (50 х 21 से.मी. लकड़ी अथवा लोहे की प्लेट) उपयुक्त होता है। फ्रेम उपलब्ध न होने पर समतल भूमि में पालीथीन बिछाकर 1 इंच मोटी मिट्टी में नर्सरी उगाई जा सकती है। जिसे रोपाई के समय मशीन की ट्रे की साईज में काटा जा सकता है।

बीज की तैयारी

चटाईनुमा पौध तैयार करने के लिए 15 -20 किलो प्रति हे. बीज की आवश्यकता होती है। उच्च गुणवत्ता वाले बीज का चुनाव किया जाना चाहिए। बीज को एक प्रतिश तनमक के घोल (एक से दो चम्मच प्रति लीटर पानी) में डाले जिससे खराब बीज पानी के उपर तैरने लगता है और फिर उसे छानकर बाहर निकाल लें। अच्छे बीज को पानी से दो -तीन बार साफ कर लेना चाहिए। एक दिन के लिए बीज को पानी में डुबाकर रखे इसके बाद बीज को पानी से निकालकर डेढ़ से दो दिन के लिये पटसन की बोरी/कपड़े से लपेटकर बांध देते है। इस तरह बांधकर रखने से डेढ़ से दो दिन बाद बीज अंकुरित हो जाता है।

पौध तैयार करने के लिए अंकुरित बीजपालीथिन शीट के उपर अंकुरित बीज बुआई

बीज की बुआई

लगभग 200 गेज मोटाई की पालीथिन शीट में 3-4 जगह छेद कर उसे बेड के उपर बिछा देते हैं। पालीथिन बिछाने के बाद 15 मिमी. मृदा मिश्रण बिछाने एवं स्क्रेपर की सहायता से प्लेन सतह बनायी जाती है। इसके उपर अंकुरित बीज 200 - 250 ग्राम प्रति चटाई की माप से समान रूप में फैलाएं। बुआई करने के बाद, बोए हुए बीज को मृदा मिश्रण कि लगभग 5 मि.मी. पतली परत से ढक दें। इसके बाद पटसन की बोरी से ढक दें।

सिंचाई जल प्रबंध

चटाईनुमा पौध तैयार करने में पानी का ध्यान रखना बहुत ही जरूरी है इसलिये बुआई करने के तुरन्त बाद हजारे से पानी देना चाहिए। जिससे अंकुरित बीज सूखने न पाए। तीन से चार दिन तक इस प्रकार आवश्यकतानुसार पानी देते रहें। इस तरह तीन - चार दिन तक पानी देने के बाद बीज अच्छी तरह से जम जाता है इस समय पटसन की बोरी हटा देते हैं। पटसन की बोरी हटाने के बाद आवश्यकता अनुसार 7-8 दिन तक हजारे से पानी देते रहें। जब पौध की उंचाई बढ़ जाती है तब सतही विवि से सिंचाई की जा सकती है।

चटाईनुमा पौध सिंचाई जल प्रबंध

रोपणी से चटाईनुमा पौध को उठाना

लगभग 20 से 22 दिन में चटाईनुमा पौध रोपाई के लिये तैयार हो जाता है इस समय पौध में 3-4 पत्तियां आ जाती है तथा उंचाई लगभग 15 सेमी. हो जाती है। फ्रेम में पौध तैयार करने पर चटाईनुमा पौध को आवश्यक साईज में दोनों हाथों से उठाकर धान रोपाई यंत्र के प्लेट में सीधे रख दें अथवा यदि बिना फ्रेम के पौध तैयार की गयी हो ती प्लेट की चैड़ाई जितनी चैड़ी चटाईनुमा पौध को धारदार चाकू से काट कर प्लेट में रखा जाये।   

धान रोपाई यंत्रः

हमारे देश में धान रोपाई मुख्यतः हाथ से की जाती है। हाथ से धान रोपाई करने में श्रम की काफी अधिक आवश्यकता होती है जिससे मजदूरी भी तुलनात्मक रूप से अधिक हो जाती है। श्रमिक, मुख्यतः महिलाएं कीचड़वाले खेतों में धूप और वर्षा में झुककर रोपाई कार्य करती है साथ ही श्रमिकों की अनुपलब्धता तथा प्रतिकूल मौसम के दौरान इनकी दक्षता में कमी को देखते हुए यह महसूस किया गया कि कम लागत पर बेहतर और तेजी से कार्य करने के लिये पेडी ट्रांसप्लाटंर से रोपाई अधिक उपयुक्त है।

स्वचलित सवार होकर चलाए जाने वाले रोपाई यंत्र में इंजिन लगाया गया है और यह 4 से 8 कतारों में धान की रोपाई करता है। इसमें कतारों से कतारों के बीच की दूरी 238 मिमी. होती है तथा पौध से पौध की दूरी 100 से 120 मिमी. के बीच होती है। इसके द्वारा एक दिन में एक हेक्टेयर खेत की रोपाई की जा सकती है। इसको चलाने के लिये एक प्रचालक तथा दो श्रमिकों की आवश्यकता होती है।

पौध का उपयुक्त घनत्व प्राप्त करने के लिये पैडी ट्रांसप्लाटर रोपाई हेतु मशीन उपयोगी सिद्ध हुई है। इस मशीन का उपयोग करने से प्रति हेक्टेयर कार्य घंटे में 75 - 80 प्रतिशत श्रम की बचत होती है तथा हाथ से रोपाई की तुलना में 50 प्रतिशत लागत की बचत होती है। यांत्रिक धान रोपाई से पौध एक निश्चित स्थान पर लगते है जिससे पौध की बढ़वार अच्छी होती है तथा उपज भी उचित मात्रा में प्राप्त होती है।

चटाईनुमा पौध को प्लेट में रखने की विधि

  1. पौध को प्लेट में रखने के पूर्व पौध दबाने की राड को हटा लिया जाता है और पौध रखने के बाद राड को पुनः वही लगा दिया जाता है।
  2. पौध प्लेट में पौध जब आधी रह जाये तो प्लेट को पुनः भर दिया जाना चाहिये जिससे पौध से पौध की दूरी एक समान बनी रहे।
  3. चटाईनुमा पौध को ठीक से उठाया जाना चाहिये ताकि इसे मशीन की प्लेट में ठीक से बिना टूटे हुए रखा जा सके।
  4. चटाईनुमा पौधा को प्लेट आसानी से सरकते हुए प्रवेश कराना चाहिए।
  5. यदि पौध प्लेट में अधिक समय तक रखी हो तो उसे प्लेट से निकाल लेना चाहिये और प्लेट में चिपकी हुई मिट्टी को साफ कर देना चाहिए ताकि पौध को पुनः प्लेट में आसानी से रखा जा सके।

धान रोपाई यंत्र का रखरखाव

प्रतिदिन रोपाई पश्चात रखरखाव

रोपाई के पश्चात मशीन के विभिन्न पुर्जो को धो देना चाहिये और मुख्य रूप से पौध प्लेट को अच्छी तरह धोकर उसे छायादार स्थान पर सुखाकर रखना चाहिये।

धान रोपाई यंत्र को सुरक्षित स्थान पर रखना

  1. मशीन को पानी से धोकर सुखा लेना चाहिये
  2. मशीन के सभी पुर्जों को मिट्टी के तेल से साफ कर देना चाहिए।
  3. क्लच हैण्डिल को एंगेज की अवस्था में रखना चाहिए।
  4. मशीन के अगले भाग को सहायक छड़ से फिट करके संतुलित करके रखना चाहिये।
  5. मशीन को प्लास्टिक कवर से ढककर हवादार कमरे में रखना चाहिये।

 


Authors

लोकेश कुमार टिण्डे, ज्ञानेन्द्र कुमार और दिनेश कुमार मरापी

1,2 पी.एच.डी.( आई. सी. ए. आर.-एस. आर. एफ.) बिधान चन्द्र कृषि विश्वविद्यालय, (वेस्ट बंगाल)

3 इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर (छत्तीसगढ़)

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