Scientific Lac Cultivation and Processing

लाख एक प्राकृतिक राल है, जो नन्हे-नन्हे लाख कीटों द्वारा सुरक्षा हेतु अपने शरीर में उपस्थित सूक्ष्म ग्रंथियों द्वारा रेजिन्स स्त्राव के फलस्वरूप प्राप्त होता है । लाख से प्राप्त राल के हानी रहित गुणों के कारण इसका महत्व रासायनिक यौगिको के रालों से अधिक है, राल के अतिरिक्त मोम और सुन्दर लाल रंग सह उत्पाद के रूप में प्राप्त होतें है, जिनका भी व्यवसायिक महत्व है । आज न केवल लाख सज्जा के लिये उपयोगी है, अपितु औषधि खाद्य प्रसंस्करण, विधुत, सौन्दर्य प्रसाधन ,सूक्ष्म रसायन एवं सुगंध उद्योग में भी इसका इस्तेमाल होता है ।

कुसुमी लाख उत्पादन तकनीक

Kusum Lac

ऋतुओं के आधार पर फसल चक्र -

  • शीतकालीन (अगहनी) जुन - जुलाई में कीट संचारण एवं जनवरी - फरवरी फसल कटाई ।
  • ग्रीष्मकालीन (जेठवी) जनवरी - फरवरी में कीट संचारण एवं जून जुलाई में फसल कटाई ।

उपयुक्त पोषक वृक्ष 

कुसुमी लाख हेतु मुख्य पोषक वृक्ष कुसुम, बेर, खैर एवं सेमियालता  है। कुसुम वृक्ष में पतझड़ कम समय का होता है, तथा यह दोनो फसल शीतकालीन एवं ग्रीष्मकालीम के लिये उपयुक्त है, इसकी निम्न किसमें पायी जाती है-

करिया :- इस वृक्षों की पत्तियां गहरें रंग की तथा तना एवं टहनिया गहरें भुरे रंग की होती है ।

चरका :- इस किस्म के वृक्ष की पत्तियां पीली, हरी एवं तना तथा टहनियां प्रायः सफेदी लिये होती है । इन दोनों की किस्मों में करिया किस्म के वृक्ष लाख पालन हेतु उत्तम है ।

लाख पालन की खण्ड प्रणाली 

पोषक वृक्षों को खण्डां या समूह में बांटकर खेती करने की विधि खण्ड़ प्रणाली कहलाती है।

  • वृक्षों को विश्राम मिलने से उनकी पोषक क्षमता बनी रहती है ।
  • अधिक संख्या में लम्बी टहनियां मिलने से वृक्ष का आकार बढ़ता है ।
  • लगातार अच्छी फसल मिलने से आमदनी का स्त्रोत बना रहता है ।
  • दुश्मन कीटों से क्षति कम होती है ।
  • बीज लाख की कमी नही होती है ।

वृक्षों की कटाई छंटाई 

कुसुम वृक्ष की कटाई छंटाई व कुसुमी लाख परिपक्व होने का समय एक ही है । कुसुम वृक्षों की टहनियों की कटाई छंटाई हेतु उचित समय का ज्ञान ,उपयुक्त औजार एवं तकनीक का होना अति आवश्यक है, कटाई हेतु वर्ष में दो समय निम्न है -

  • 15 जुन से 15 जुलाई के मध्य जब फसल परिपक्व हो जाये या नये पत्ते/पीके निकलने के पुर्व ।
  • जनवरी ,फरवरी शीतकाल के बाद पतझड़ एवं नये पत्ते/पीके निकलने के पूर्व । इन दोनों में 15 जुन से 15 जुलाई कें मध्य कटाई-छटाई हेतु उपर्युक्त माना जाता है ।

कटाई 

छंटाई का कार्य प्रथम बार करने की आवश्यकता होती है तत्पश्चात काट- छांट फसल कटाई के साथ ही साथ सिकेटियर एवं दावली  का प्रयोग कर काट-छांट करें तथा आवश्यकता पड़ने पर सूखी टहनियों को काटने के लिए कुल्हाड़ी का प्रयोग करें ।

पोषक वृक्ष पर कीट संचारण 

पोषक वृक्षों में लाख की टहनियों से मादा लाख कीटों के सेल से निकल रहे शिशु कीटों का पोषक वृक्षों के टहनियों पर फैलानें की प्रकिया ही संचारण कहलाती है । जिसमें बीज लाख (गर्भयुक्त मादा लाख कीट सहित टहनियों) को बण्डल बनाकर वृक्षों की टहनियों में आवश्यक मात्रा में बांध दिये जाते है, कीट संचारण शीतकालीन फसल में (दिसम्बर-फरवरी) में शिशु कीट निकलना प्रारंभ होने पर तथा ग्रीष्मकालीन (जुन-जुलाई) में लाख पपड़ियों में पीला धब्बा दिखाई पडनें पर लाख लगे पोषक वृक्षों सें लाख टहनियां काटकर 15-20 सेमी. लम्बाई के टुकडे़ सिकेटियर की सहायता से काट लें इन कटें हुए टुकड़ो का 100-100 ग्राम के बण्डल प्लास्टिक या सुतली की सहायता से तैयार कर लाख रखने योग्य टहनी में उचित स्थान पर आवश्यकतानुसार बांध दें ।

फुंकी उतारना 

बीज लाख से शिशु लाख कीट के निर्गमन पश्चात शेष लाख लगी डंडियों को फुंकी कहा जाता है , फुंकी लाख को वृक्षों से शीतकाल में 20-30 दिन के मध्य एवं ग्रीष्मकाल में 15-20 दिन के मध्य उतार लेना लाभदायी होता है ।

लाख के हानिकारक कीट/व्याधि एवं निंयत्रण

 लाख की पैदावार में कमी के प्रमुख कारणों में एक लाख की पैदावार में कमी के प्रमुख कारणों में एक लाख फसल पर शत्रु कीट तथा फंफूद के आक्रमण से कुसुमी फसल उत्पादन में हानि हो सकती है, हानि पंहुचाने वाले कीट निम्न है-

  • परभक्षी कीटः- ये कीट लाख अथवा लाख कीट को खाकर जीवन यापन करते है, जैसे सफेद तितली ,काली तितली हरा पतंगा ये अपनी इल्ली अवस्था में हानि पहुंचाते हैं ।
  • परजीवी कीटः- ये कीट लाख में अण्डे देते है इनसे निकलने वाले लार्वा लाख कीट की लाख पैदा करने की क्षमता पर प्रभाव डालते है, परजीवी कीटो पर नियंत्रण का कोई प्रभावशाली तरीका नही है, परन्तु इनके आक्रमण पर नियंत्रण किया जा सकता है ।

सुरक्षात्मक उपाय

  • परभक्षी एवं परजीवी रहित स्वस्थ्य एवं परिपक्व बीज लाख का उपयोग संचारण हेतु करें ।
  • कीट संचारित वृक्षों से फुंकी, दो से तीन सप्ताह के भीतर उतार लें तथा छिलाई कर बेच दें ।
  • बीज लाख कटाई के पश्चात शेष लाख लगे टहनियों को अतिशीघ्र काट लें तथा छिलकर बेच दें ।
  • प्रभावित क्षेत्र से छिली लाख अतिशीघ्र हटाकर प्रोसेसिंग कर लें ।
  • स्व संचारण कम करें ।
  • हरा पतंगा प्रभावित क्षेत्रों में प्रकाश प्रपंच का उपयोग करें ।

यांत्रिक उपाय 

बजार में उपलब्ध 60 मेश की नाईलोन जाली से 2×010 सेमी.या 30×12 सेमी. साईज की थैली तैयार कर उसमें बीज लाख भरकर कीट संचारण करें , लाख के कीट महीन छिद्र से बाहर आकर टहनियों में संचारित हो जायेंगें, वही दुश्मन कीट के लार्वा थैली से बाहर नही आ पाते तथा थैली में कैद हो जाते है ।

रासायनिक विधि से नियंत्रण 

  • इण्डोसल्फान (थायोडान) 0.05 प्रतिशत घोल 14 ली. पानी में 20 मिली. दवा मिलायें ।
  • डाइक्लोरवास (नुआन) 0.03 प्रतिशत घोल 14 ली. पानी में5 मिली. दवा मिलायें ।
  • इथोफेनप्राक्स (नूकिल) 0.02 प्रतिशत घोल प्रति ली. पानी में 2 मिली. दवा मिलायें ।
  • कार्बेण्डाजिम (बेनागार्ड /बैविस्टीन) 0.01 प्रतिशत घोल 14 ली. पानी में 3 ग्राम पावडर दवा मिलायें ।
  • मिश्रित घोल बनाने के लिए 14 ली. पानी में 3 ग्राम बेनागार्ड /बेविस्टिन के साथ 20 मि.ली. थायोडान अथवा5 मिली. नुवान अथवा नुकिल 28 मिली. को मिलायें ।

पूर्वानुमान की सामान्य विधि

  • लाख कीट द्वारा निकाले जाने वाले मोम में कमी ।
  • लाख पपड़ी में दरार पड़ना।
  • लाख पपड़ी में रूखापन और टहनियों सें अलग होंना ।
  • लाख पपड़ी में पीला धब्बा बनना ।

 फसल कटाई

 कुसुमी लाख निम्न समयानुसार परिपक्व होती है इसी समय नये कीट निर्गमन का समय भी होता है ।

 

फसल का नाम

कीट संचारण

फसल परिपक्व

ग्रीष्मकालीन

जनवरी/फरवरी

जुन - जुलाई

 

शीतकालीन

जुन/जुलाई

जनवरी /फरवरी

 

 

कुसुमी लाख में फसल कटाई, कीट संचारण ,वृक्षों की काट छांट एक ही समय में होती है ,फसल कटाई अच्छी क्वालिटी के सिकेटियर से करें कांट छांट में दावली, कुल्हाड़ी का उपयोग करें एवं कांट छांट सही करें ।

कीट संचारण हेतु बीज लाख का चयन

कीट संचारण हेतु बीज लाख का चयन 

कीट संचारण के एक माह पष्चात लाख

कीट संचारण के एक माह पष्चात लाख     


Authors:

अरबिन्द कुमार साई, लोकेश कुमार टिण्डे, ज्ञानेन्द्र कुमार

1 इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर (छत्तीसगढ़) 2,3 पी.एच.डी.( आई. सी. ए. आर.-एस. आर. एफ.) बिधान चन्द्र कृषि विश्वविद्यालय, मोहनपुर (वेस्ट बंगाल)

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