Smart Water Management: A boon for agriculture

पानी की बढ़ती मांग दुनिया के सामने एक चुनौती है, खासकर सबसे शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में जहां पानी की कमी और पानी का तनाव महत्वपूर्ण समस्याएं हैं। पानी की कमी की स्थिति एक जगह पर तब होती है जब प्रति व्यक्ति प्रति दिन पानी की उपलब्धता 1000 घन मीटर से कम हो जाती है।

भारत केे 2025 तक जल-तनावग्रस्त देश बनने की आशंका है, जिसके परिणामस्वरूप हमारे पास प्रति दिन प्रति व्यक्ति 1700 घन मीटर से कम पानी होगा। भारत में, कृषि पानी का प्रमुख उपभोक्ता (80%) है और कृषि उत्पादन के लिए पानी का उपयोग करते समय पानी के अतिरिक्त नुकसान की मात्रा भी बहुत बड़ी है।

सिंचाई प्रणाली संचालन, शेड्यूलिंग और प्रबंधन के दौरान पानी का निरर्थक रिसाव एवं बहाव हो जाता है। ये नुकसान पानी के उपयोग की दक्षता को कम करते हैं और पानी के तनाव की समस्याएं भी पैदा करते हैं।

हमारे देश में अधिकांश किसान जानकारी के अभाव में इन कुपरिणामों के समाधान से अनजान हैं। इसके अलावा, वे फसल की क्षति, प्रतिकूल मौसम के कारण कम उत्पादकता और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सतर्क उपायों के कम ज्ञान के कारण समस्या का सामना कर रहे हैं।

हमें जल प्रबंधन की एक ऐसी प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता है जो किसानों को समय रहते मौसम का पूर्वानुमान कर उचित समय पर सि‍ंचाई की विशेष तकनीकी का उपयोग करने की सलाह दे एवं निकट भविष्य में संभावित हानि से बचा जा सके।

कुशल जल प्रबंधन (SWM)

कृषि एवं किसानों की तमाम समस्याओं से निपटने के लिए कुशल जल प्रबंधन या स्मार्ट वाटर मैनेजमेंट (एसडब्ल्यूएम) सबसे अच्छा उभरता हुआ समाधान है जिसमें पानी की मात्रा का ठहराव, कुशल सिंचाई, बाढ़ और सूखे का प्रबंधन और शमन, पानी की उपलब्धता की वास्तविक समय निगरानीएवं आंकलन, ​​वितरण प्रणाली में रिसाव की पहचान और निगरानी, पानी की गुणवत्ता बनाए रखना आदि शामिल है।

सूचना संचार प्रौद्योगिकी (ICT) जल प्रबंधन की आपूर्ति उन्मुख प्रणाली को एक ऐसी प्रणाली में परिवर्तित करने में सक्षम है जो अंतिम बिंदु पर मांग के लिए उन्मुख है। यह सूचना और संचार प्रौद्योगिकियों का एक संग्रह है जो डेटा या सूचना या दोनों के भंडारण, प्रसंस्करण, प्रसार और संचार में सहायता करता है। 

इसमें हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर शामिल हैं जो संचार और सूचना प्रसंस्करण के कार्य को पूरा करने के इरादे से इंटरनेट से जुड़ते हैं। सूचना संचार प्रौद्योगिकीके माध्यम से जल प्रबंधन करने की प्रणाली को ही कुशल जल प्रबंधन कहा जाता है। इसका उद्देश्यबेहतर निर्णय तंत्र का निर्माण कर जल का दक्षतापूर्ण ढंग से उपयोग करनाहै।

कुशल जल प्रबंधन प्रक्रिया

एसडब्ल्यूएम की प्रक्रिया मेंकई उपकरणों का प्रयोग किया जाता है।फसल की वाष्पीकरण की मांग को रिमोट सेंसिंग काउपयोग करके उपग्रह डेटा से प्राप्त किया जाता है। भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस), के माध्यम से क्षेत्र के स्थान और चित्र किये जा सकते हैं।

मिट्टी की नमी, तापमान और पोषक तत्वों की स्थिति की वास्तविक समय की जानकारी एकत्र करने के लिए खेत के भीतर विभिन्न सेंसर स्थापित किए जाते हैं। ये सभी डेटा एक वायरलेस सेंसर नेटवर्क के साथ सिंचाई प्रबंधन प्राधिकरण में स्थानांतरितऔर संग्रहीत किए जाते हैं।

प्राधिकरण पानी और पोषक तत्वों के लिए सूचना प्रणाली के माध्यम से प्राप्त मांग के अनुसार मोबाइल फोन या कंप्यूटर का उपयोग करके आपूर्ति प्रणाली कासञ्चालनएवं प्रबंधन करता है। 

सिंचाई जल प्रबंधन के लिए आईसीटी का महत्व

कृषि में आईसीटी की प्रमुख भूमिका जानकारी के व्यापक उपयोग में सहायता करने की अपनी क्षमता है जो ज्ञान साझा करने और निर्णय लेने में सहायता करती है।एसडब्ल्यूएम का उपयोग करके पानी का सटीक और उचित समय पर आवेदन किया जा सकता है। यह तकनीक किसानों की समस्याओं का त्वरित और सरल समाधान भी प्रदान करती है।

एसडब्ल्यूएम किसानों को आर्थिक लाभ प्रदान करने के साथ-साथ उन्हें पानी बचाने के लिए भी प्रेरित करता है।शोधकर्ताओं ने पाया है कि आईसीटी आधारित निगरानी प्रणाली पानी और श्रम की बचत के लिए सहायक है। वैज्ञानिकों ने जल प्राधिकरण (WA) के माध्यम से राज्य स्तर पर भूमि और जल आवंटन पर रणनीतिक निर्णयों का समर्थन करने के लिए आईसीटी के सकारात्मक योगदान की पहचान की है।

जल प्राधिकरण में पानी को बचाने और जलवायु परिवर्तन के लिए अनुकूलन रणनीतियों को लागू करने की क्षमता है।सीमित पानी की उपलब्धता वाले क्षेत्रों में आईसीटी से अधिक लाभ प्राप्त किये जा सकते हैं।

पानी का उपयोग की जाँच तथा नदी के स्तर का अनुमान लगाने के लिए जल प्राधिकारियों द्वारा प्रौद्योगिकी का उपयोग किया गया है। आईसीटी आर्थिक विकास के अधिक पर्यावरणीय रूप से स्थायी मॉडलऔर पर्यावरण के अनुकूल प्रौद्योगिकियों और अनुप्रयोगों के माध्यम से पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने में मदद कर सकता है।

भारत सरकार ने किसानों के लिए उनकी अपनी क्षेत्रीय भाषा में मौसम, बीज, कृषि मशीनरी, उर्वरक, फसलों के लिए बाजार मूल्य, प्रथाओं के पैकेज और कार्यक्रमों एवं योजनाओं के बारे में जानकारी साझा करने या सलाह देने के लिए कुछ मोबाइल आधारित सेवाओं जैसे एम किसान, पूसा कृषि और किसान सुविधा की शुरुआत की है।

चुनौतियां और आगे का रास्ता

देश के कई हिस्सों में एसडब्ल्यूएम का प्रयोग होने के बावजूद भी इसके व्यापक उपयोग में विस्तार की अपार संभावनाएं नजर आती हैं। परन्तु प्रौद्योगिकी का उचित तरीके से उपयोग करने के लिए किसानों में जागरूकता की कमी है। जल दक्षता और संरक्षण के लिए आईसीटी आधारित निर्णय समर्थन प्रणाली को उच्च दक्षता प्राप्त करने के लिए विकसित किया जाना चाहिए।

एसडब्ल्यूएम के सफल कार्यान्वयन के लिए उचित आईसीटी शासन की आवश्यकता है। इसके अलावा, एक स्मार्ट वाटर नेटवर्क विकसित करने के लिए बड़े पूंजी निवेश की आवश्यकता है जो भारत जैसे विकासशील देश के लिए एक चुनौती है।

सार्वजनिक, निजी और मिट्टी संरक्षण संघ को भागीदारों के रूप में काम करना चाहिए। सरकारों को SWM में दिशानिर्देशों, रणनीतियों और सर्वोत्तम प्रथाओं का विकास करना चाहिए और ग्रामीण विकास में आईसीटी के उपयोग को बढ़ावा देना चाहिए।

सारांश

कुशल जल प्रबंधन पानी की कमी, जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ जल क्षेत्र में स्थायी बाधाओं के कारण स्थायी जल संसाधन प्रबंधन के लिए एक व्यवहार्य विकल्प है। एसडब्ल्यूएम किसान को आर्थिक लाभ प्रदान करता है और उन्हें पानी बचाने के लिए भी प्रेरित करता है।

पानी के प्रबंधन में आईसीटी निगमन द्वारा प्राप्त किए जा सकने वाले इन लाभों को संभवतः पानी और स्वच्छता के लिए संयुक्त राष्ट्र सहस्राब्दि विकास लक्ष्यों(MDGs) की प्राप्ति को देखा जा सकता है, अगर इसे ठीक से लागू किया जाए।

हालांकि, हितधारकों को खरीदने के लिए और संबंधित क्षेत्रों द्वारा विशेष रूप से उन लोगों के लिए उचित सहयोग करने की अनुमति देने के लिए इस विषय पर ध्यान देने की आवश्यकता है, जिनका सीधा प्रभाव पड़ता है क्योंकि वे कार्यान्वयन के लिए गति निर्धारित करते हैं।

एसडब्ल्यूएम में दिशानिर्देशों, रणनीतियों और सर्वोत्तम प्रथाओं को विकसित किया जाना चाहिए। यह भारत को डिजिटल बनाने और किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। 


Authors:

Neha Singhal

Research Scholar , Water Science and Technology

ICAR- Indian Agricultural Research Institute, New Delhi-110012

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