Author: Keshav Kshirsagar

Zero Budget Natural Farming जीरो बजट नेचुरल फार्मिंग मूल रूप से महाराष्ट्र के एक किसान सुभाष पालेकर द्वारा विकसित रसायन मुक्त कृषि का एक रूप है।सुभाष पालेकर के नाम पर इसे सुभाष पालेकर नेचुरल फार्मिंग यानी जीरो बजट प्राकृतिक खेती कहा जाता है. यह विधि कृषि की पारंपरिक भारतीय प्रथाओं पर आधारित है। इस खेती के पैरोकारों का कहना है कि यह खेती देसी गाय के गोबर और मूत्र पर आधारित है. इस विधि में कृषि लागत जैसे कि उर्वरक, कीटनाशक और गहन सिंचाई की कोई आवश्यकता नहीं होती है। जिससे कृषि लागत में आश्चर्यजनक रूप से गिरावट आती है, इसलिये इसे ज़ीरो बजट नेचुरल फार्मिंग का नाम दिया गया है।इस विधि...

जल संतुलन जलाशय: नहर कमान में एक कुशल जल भंडारण संरचना Water balancing reservoir is also known as Diggies or Tanks or Farm pond or intermediate storage structures in canal command. It is a water storage structure in canal command to store the water delivered from the water courses to farms and regulate the flow of water for agricultural irrigation. Water is pumped out of this and is distributed to the field through channels or micro irrigation system. It helps to supply irrigation water when the crop requires it, the most. All these interventions contribute to higher yield, production and water productivity. However, water balancing reservoirs are shown to be cost-effective for landholdings...

सोयाबीन (ग्लाइसीन मैक्स) की प्रमुख किस्में और उनकी विशेषतायें सोयाबीन एक दलहन कुल की मुख्य तिलहनी फसल है| इसमें 30-40 प्रतिशत प्रोटीन तथा 20-22 प्रतिशत तेल की मात्रा पाई जाती है| यह भोजन और पशु आहार के लिए प्रोटीन का एक अच्छा स्रोत है| इसका वनस्पति तेल खाद्य व औधोगिक अनुप्रयोगों में उपयोग किया जाता है| सोयाबीन एक प्रमुख खरीफ फसल है, इसकी बुआई जून-जुलाई में और कटाई सितम्बर-अक्टूबर में की जाती है| राजस्थान में इसकी खेती झालावाड़, कोटा, बारां, चित्तौडगढ़ आदि जिलों में की जाती है| सोयाबीन की प्रमुख किस्में और उनकी विशेषतायें: राजस्थान में उगाई जाने वाली सोयाबीन की विभिन्न किस्में जो सोयाबीन के उत्पादन व उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देती...

Wheat's contribution in prevention of malnutrition विश्व में गेहूँ सबसे व्यापक रूप से खेती की जाने वाली खाद्यान्न फसल है। यह दुनिया की 40 प्रतिशत आबादी के लिए कुल आहार कैलोरी एवं प्रोटीन का 20 प्रतिशत योगदान देने वाला एक मुख्य भोजन है। भारत में उत्पादित कुल खाद्यान्न में 36.7 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ खाद्य टोकरी की खपत में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है। खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा गेहूँ को बड़े पैमाने पर खरीदा जाता है, जिसे खाने के लिए अधिकांश आबादी को वितरित किया जाता है। अनाजों से मिलने वाली ऊर्जा में गेहूँ सबसे सस्ते स्रोतों में से एक है, इसकी खपत से प्रोटीन (20...

पोषक तत्वों से भरपूर परन्‍तू कम प्रचलि‍त अनाज: फोनियो बाजरा Fonio (Digitaria exilis), also referred to as white fonio or fonio millet, is one of the oldest cereal crops domesticated by farmers in West Africa. Its cultivation seems to have started about 7000 years ago. Fonio species belong to Poaceae family, sub-family of Panicoideae, tribe of Paniceae and the genus Digitaria. Fonio grains are extraordinary tiny with 1,000 grains weighting 0.5-0.6 g. Fonio is often consumed in West Africa. It is one of the world’s fastest maturing cereals. It is believed to be one of the oldest cereals in West Africa, where it is indigenous. In some parts of Africa, like in regions of...

ऑयल पाम नर्सरी को संक्रमि‍त करने वाली बालवाली इल्‍ली, डासचिरा मेंडोसा हबनर Oil palm, Elaeis guineensis Jacq is the richest source for vegetable oil production with a capacity of 4-6 tons of oil per ha per year. The productivity of the palm is affected by at least 80 species of arthropods that are potential pests on oil palms. There are many insect pests viz., bagworm, leaf webworm, hairy caterpillars, grasshoppers, flea beetles, ash weevils, termites, rodents, wild boar etc. which damage the oil palm nursery and affect their normal growth and development. Superior planting material is one of the basic factors affecting the success of an oil palm plantation. Good nursery management would...

पश्‍चि‍मी राजस्थान में टि‍ड्डी प्रकोप एवं उसका नि‍यंत्रण  राजस्थान के पश्चिमी भाग की जलवायु, मृदा एवं भौगोलिक परिस्थितियाँ अन्य भागो से भिन्न है। इस क्षेत्र के जिले जैसे बाडमेर, जोधपुर, जैसलमेर एवं बीकानेर की सीमा अंतर्राष्ट्रीय सीमा से मिलती है। इस क्षेत्र में मृदा रेतीली, अल्प वर्षा आधारित, उष्ण, उच्च तापमान एवं कम वनस्पति युक्त है। इस प्रकार की जलवायु एवं भौगोलिक परिस्थितियाँ पड़ोसी देश पाकिस्तान में मिलती जो कि टिड्डी जैसे अति हानिकारक कीट के लिए अति उपयुक्त है। वर्ष 2019 (21 अप्रैल से) एवं वर्ष 2020 (11 मई से) में राजस्थान के जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, बीकानेर, श्रीगंगानगर, जालोर एवं हनुमानगढ़ में टिड्डी दलों का आक्रमण हुआ जो कि नागौर पाली,...

फलदार बागीचे की स्थापना एवं प्रबंधन बागबानी एक दीर्घकालीन निवेश है अतः एक फलदार बागीचे की स्थापना एवं प्रबंधन बहुत ही सावधानीपूर्वक और योजनाबद्ध तरीके से किया जाना चाहिए। अधिकतम पैदावार और ज्यादा से ज्यादा लाभ सुनिश्चित करने हेतु बागीचे के लिए उपयुक्त स्थान का चयन, सही रोपण प्रणाली, उचित रोपण दूरी, पौधों की अच्छी किस्मों का निर्धारण, नर्सरी से स्वस्थ पौधों का चुनाव, पौधों की देखभाल, फसल की मार्केटिंग इत्यादि बहुत से महत्वपूर्ण कारक हैं। बागीचे के लिए उपयुक्त भूमि और स्थान का चुनाव एक अच्छा बागीचा लगाने के लिए ऐसे स्थान का चुनाव करें जहां पाला कम पड़े और जो प्राकृतिक विपदाओं व जंगली जानवरों से सुरक्षित हो। स्थान ऐसा हो...