Author: Keshav Kshirsagar

 सरसों की फसल के तीन प्रमुख रोग और उनका प्रबंधन 1. White rust disease of Mustard It is also called "White Blisters of Crucifers". In severe conditions, it caused yield losses up to 55% in late sown crops. Other crucifers host-Radish, Tumip, Cabbage, Cauliflower, Taramira, Spinach & sweet potato (non-crucifers). White creamy pustules & sporangia give white rusty appearance by exposing powdery mass of spores on the infected host surfaces, that's why it is called "white rust" (while it is not true rust. True rusts are caused by Uredinales i.e. Puccinia, Uromyces, Melampsora etc.). "Stag heads" are produced on floral parts due to systemic infection. Locally it is known as "Marodia Rog" or...

हेलिकोवरपा (HaNPV) के नाभिकीय पॉलीहेडेरोसिस वायरस (एनपीवी) की व्‍यापक उत्पादन विधि चने और कपास की फसल में एनपीवी से संक्रमित  हेलिकोवर्पा आर्मीगेरा का लार्वा  Nuclear Polyhederosis viruses (NPV) are virulent pathogens of insects characterized by the polyhedral occlusion bodies (POB). They are obligate pathogens requiring the host insects for development and multiplication. These viruses are highly specific and do not affect beneficial insects like parasites and predators and are safe to fish, birds, higher animals and man. Biology of Helicoverpa armigera Helicoverpa anmigera is the most prevalent, highly phytophagous pest in India and is of most relevance to agricultural economy. It has posed a serious threat to many crops and the apparent importance of...

Genetic engineering for disease resistance in plants: Recent progress and future perspectiveविश्व की बढ़ती जनसंख्या, जो वर्तमान समय में 7.3 बिलियन से बढ़कर 2050 तक कम से कम 9.8 बिलियन हो जाने की सम्भावना है, उन्हे खिलाने के लिए, आधुनिक कृषि में विकास की सभी सम्भावनावो को तलाशने की जरुरत होगी जिससे पर्याप्त पोषक तत्व और उनके खद्दान्न की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके। यह लक्ष्य काफी गम्भीर और चुनौती पूर्ण भी है क्योंकि फसलों को विभिन्न बीमारियों से काफी नुकसान होता है। उदाहरण के तौर पर, जीवाणु संबंधी और फफूंद रोगजनकों द्वारा फसल की पैदावार में लगभग 15% की कमी आती है और वायरस से पैदावार में अनुमानतः 3%...

 Post Harvest Management  Value Addition and Uses of Medicinal Plants 1. ऑंवला ऑंवला युफोरबिएसी परिवार का पौधा हैं । यह भारतीय मूल का एक महत्पूर्ण फल है । महर्षि चरक ने इस फल को जीवन दात्री अथवा अमृतफल के समान लाभकारी माना है।  प्रति इकाई उच्च उत्पादकता 15-20 टन/हे विभिन्न प्रकार की भूमि ऊसर, बीहड़, शुष्क, अर्धशुष्क हेतु उपयुक्ता, एवं पोषक तत्वों जैसे विटामिन, खनिज, फिनॉल, टेनिन गुणों से भरपूर तथा विभिन्न रूपों में उपयोग के कारण ऑंवलो 21 वी सदी का प्रमुख फल है।  बनारसी कम फलत देने वाली, फ्रांसिस एवं नरेन्द्र ऑंवलो-6 औसत फलत देने वाली, कंचन एवं नरेन्द्र ऑंवलो-7 अत्यधिक फलत देने वाली किस्में हैं। औषधीय उपयोग -   एक चम्मच ऑंवले के रस...

फूलगोभी की उन्नत खेती  फूलगोभी हर तरहह  की ज़मीन  मैं हो सकती है।  लेकिन रेतली ज़मीन में अच्छी पैदावार हो सकती है। फूलगोभी की फसल 6 से 7 पी एच वाली फसल में अच्छी होती है। इसकी काश्त  में  तापमान का  बहुत  बड़ा  हाथ  होता  है। फूलगोभी की पौध  तैयार  करने  के  लिए 23 डिग्री सेंटीग्रेड होना चाहिए  और  बाद  में 17 से  20 डिग्री होना उत्तम माना  जाता है। गरम इलाको में  इसकी फसल 35 डिग्री  में  भी हो  सकती  है। जबकि ठन्डे  एरिया  में 15  से  20 डिग्री में भी हो  जाती है। पहले खेत को पलेवा करें जब भूमि जुताई योग्य हो जाए तब उसकी जुताई 2 बार मिटटी पलटने वाले...

Importance and Methods of Seed Treatment in Kharif crops अच्‍छी फसल के जिस तरह बीज चयन महतवपूर्ण है, उसी तरह बीज का उपचार करना भी उतना ही आवश्यक है| आधुनिक खेती में निरंतर हो रही वैज्ञानिक प्रगति से तभी लाभ हो सकता है जब उन्नत किस्मो के शुद्ध व अच्छी गुणवत्ता वाले बीजो काा चुनाव कि‍या जाऐ और  बुवाई पूर्व उसे  उपचारित करके ही बोया जावे| बीजो का अंकुरण बढाने, कीटो व रोगों से सुरक्षा करने के लिए बीजोपचार अति आवश्यक प्रक्रिया है| अधिकांशत: किसान, फसलो की बीजाई बिना बीजोपचार किये ही करते है जिससे फसल उत्पादन 8-10 प्रतिशत कम रहने की सम्भावना रहती है| किसानो द्वारा बीजोपचार की महत्वपूर्ण प्रक्रिया को अपनाने के...

वर्षाकालीन मौसम में सब्जियों की नर्सरी सब्जियों में कुछ फसलें ऐसी है जिनके बीज को सीधे खेतों में बोया जाता है, क्योंकि इन फसलों में रोपाई के समय जो आघात लगता है, उसको सहने की क्षमता नहीं होती, जैसे- भिण्डी, बरबटी, सेम आदि, दूसरी तरफ कुछ फसलें ऐसी हैं, जिनके पौधे तैयार कर खेत में रोपाई की जा सकती है, जैसे- टमाटर, बैंगन, मिर्च, प्याज, फूलगोभी आदि। इन सब्जियों के पौधा में रोपाई के समय लगने वाले आघात को सहने की क्षमता पायी गई है। अत: इन पौधों के बीजों को शुरू में पौधशाला (नर्सरी) में बोया जाता है खरीफ या वर्षाकालीन मौसम में सब्जियों की फसलें लेने हेतु सब्जियों की नर्सरी में ऊपर...

Nutritious preservation and processing in tomatoes टमाटर एक सब्जी की फसल है। यह आमतौर पर ताजे रूप में या कई पकाए गए व्यंजनों में एक घटक के रूप में उपयोग किया जाता है। ताजा टमाटर सलाद और सब्जी के रूप में भी प्रयोग किया जाता है। जो आर्थिक मूल्य के अलावा, मानव पोषण के लिए अच्छा है क्योंकि यह विटामिन सी, ए, के और  पोटेशियम और लाइकोपीन और कैरोटीन जैसे कैरोटीनॉइड का स्रोत है जो एंटीऑक्सिडेंट के रूप में कार्य करते हैं। भारत  में अधिकांशतय फसल काटने के बाद फसल उपरांत अज्ञानता के कारन प्रसंस्करण की तकनीकों को नहीं अपनाया जाता है। जिस वजह से 15-25  प्रतिशत उत्पादित टमाटर खेत में ही...