Crop disease

11 Major Diseases and their management in Kharif vegetables crops सब्जियां उनकें पोषक तत्वों जैसे विटामिन, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट्स, अमीनो अम्ल एवं खनिज पदार्थ आदि की धनी स्रोत होने के कारण मनुष्य के भोजन का आवश्यक अंग है। इंडियन कॉन्सिल ऑफ मेडिकल रिसर्च, नई दिल्ली एवं राष्ट्रीय पोषण संस्थान, हैदराबाद के द्वारा संस्तुत भारत में सब्जी की प्रति व्यक्ति मांग 300 ग्राम के विपरीत केवल 130 ग्राम प्रति व्यक्ति उपलब्‍ध है। हमारे देश में वैश्विक सब्जी उत्पादन का नेतृत्व करने की पर्याप्त क्षमता है किन्तु सब्जी अनेक रोग व्याधियों के प्रति संवेदनशील होने के कारण हमारा सब्जी उत्पादन एवं उत्पादकता कम हो जाता है। भारत के उत्तरी पश्चिमी मैदानी क्षेत्रों जैसे दिल्ली, हरियाणा,...

7 Major diseases of eggplant crop and their prevention बैंगन की फसल कई प्रकार के हानिकारक रोगों द्वारा प्रभावित होतीहै। अगर इसका समय रहते नियंत्रण ना किया गया तो बाजार मूल्य में गिरावट एवं अत्यधिक हानि का सामना करना पड़ सकता हैं। बैंगन के प्रमुख रोगआर्द गलन, फोमोप्सिस झुलसा ,पत्ती धब्बा रोग, स्कलेरोटीनिया अगंमारी, उक्टा या म्लानी, एवं छोटी पत्ती रोग इत्यादि हैं। अत: बैगन के प्रमुख रोगो की पहचान कर उनका समय पर उपचार अत्यंत आवश्यक है। बैंगन भारत का देशज है। प्राचीन काल से भारत से इसकी खेती होती आ रही है। ऊँचे भागों को छोड़कर समस्त भारत में यह उगाया जाता है। बैंगन वर्तमान मे आलू के बाद दूसरी सबसे अधिक खपत...

चावल के 5 प्रमुख रोग (ओरीज़ा सतवा) 1. Rice Blast Causal Organism -Pyricularia oryzae (Syn: P. grisea) (Sexual stage: Magnaporthe grisea) Symptom- On the leaves, the lesions start as small water soaked bluish green specks, soon enlarge and form characteristic boat shaped spots with grey centre and dark brown margin. The spots join together as the disease progresses and large areas of the leaves dry up and wither. Similar spots are also formed on the sheath. Severely infected nursery and field show a burnt appearance. At the flower emergence, the fungus attacks the peduncle which is engirdled, and the lesion turns to brownish-black. This stage of infection is commonly referred to as rotten neck / neck rot...

टमाटर और गोभी वर्गीय सब्जियों के महत्वपूर्ण कायि‍क विकार और उनके प्रबंधन केे तरीके।  Physiological disorders of Tomato  1. Blossom-end rot in Tomato This disorder of tomato that can appear on fruits at any time in their development, but most commonly appears when fruits are one-third to one-half grown. The initial symptoms are water-soaked spots on the blossom end of the fruit. These spots later enlarge and become black. Secondary infection by other decay causing organisms usually follows. The cause of this disorder is considered to be calcium deficiency in the developing fruit. Extreme fluctuations in moisture, root pruning and excessive nitrogen fertilization can also result in blossom end rot. Management: Avoid excessive application of Nitrogen...

Insects and pests of Mango and their management techniques फलों का राजा आम हमारे देश का सबसे महत्वपूर्ण फल है। इसकी खेती उत्तर प्रदेश, बिहार, आन्ध्र प्रदेश, पश्चिमी बंगाल, तमिलनाडु, उडीसा, महाराष्ट्र, और गुजरात में व्यापक स्तर पर की जाती है। आम के लिए गहरी तथा अच्छी जल निकास वाली मिट्टी उपयुक्त मानी गई है। मिट्टी का पी.एच. मान ६.५ – ७.५ के बीच सही माना गया है। आम का सफल उत्पादन पोषण- जलवायु में किया जा सकता है। बौर, फूल आने की अवस्था में वर्षा होने या बदली छाई रहना आम की फ़सल के लिए नुकसानदेय होता है। यह पूरे देश में सफलतापूर्वक उगाया जाता है। आम पाले के लिए अति...

Integrated pest management (IPM) through mechanical methods 1.फेरोमोन ट्रैप बार बार रासायनिक कीटनाशको के प्रयोग के उपरांत भी कपास,मूंगफली,धान,दलहनी फसलो,तम्बाकु,सब्जियों,एवं फल वाले पौधे के बिभिन्न कीटो  का सफलतापूर्वक नियंत्रण नहीं हो पा रहा है| आधुनिक पद्धति यह है कि किसी नाशीजीव का नियंत्रण करने के लिए कम से कम रासायनिक छिडकाव , जैविक नियंत्रण के साधनों जैसे फेरोमोन ट्रैप (गंधपांस) आदि का समेकित उपयोग किया जाय , जिसे एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन कहते है| इस पद्धति में गंधपांश एवं गंध (लूर) का कीट की स्थिति का आकलन करने एवं नर पतिंगो को पकड़ कर नष्ट करने में अपना उल्लेखनीय योगदान है| फेरोमोन (गंध) क्या है ? यह एक प्रकार का ऑर्गेनिक पदार्थ है ,जो किसी मादा पतिंगा...

Weeds control in main kharif crops भारत की कृषि-अर्थव्यवस्था विभिन्न फसलों के उत्पादन एवं उत्पादकता पर निर्भर करती हैं। कीटों, बिमारियों तथा खरपतवारों के प्रकोप से फसलों के उत्पादन में होने वाली क्षति को बचाकर खाद्यान्नों का उत्पादन अधिक बढ़ाया जा सकता है। फसलों में सर्वाधिक हानि खरपतवारों से होती हैं। खरपतवार (weeds) अवांछित पौधे होते है जिनकी एक निष्चित स्थान व समय पर आवश्‍यकता नहीं होती है और बिना बोए अपने आप उग जाते हैं। इसके कारण खरपतवारों व फसलों के बीच पौषक तत्वों, जल, स्थान, प्रकाश आदि के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ जाती हैं। विभिन्न फसलों की उपज में केवल खरपतवारों के कारण होने वाली क्षति 15-70 प्रतिशत तक हैं।...

भारत की मृदा व फसलों में बोरोन तथा मोलिब्डेनम की कमी और उर्वरकों के प्रयोग सेे उनमे सुुुुधार   Plants require eight micronutrients for their growth and development. Out of them, Boron (B) and Molybdenum (Mo) are anionic micronutrients found to be deficient in Indian soils and crops. The essentiality of the B and Mo for higher plants was first established by K. Warington in 1923 and by D. I. Arnon and P. R. Stout in 1939 respectively. The information regarding deficiency of B and Mo in soils in India, their role in plant growth and deficiency symptoms and fertilizers containing B and Mo for amelioration is being provided for the benefit...