Soil & Fertilizers

वर्मीकम्पोस्टिंग के माध्यम से कार्बनिक अपशिष्ट का सर्वश्रेष्ठ उपयोग Agriculture, animal husbandry and related activities generate large quantities of organic wastes in rural areas. Large quantities of tender twigs, dry leaves, grasses and weeds are also available. These organic wastes contain organic carbon and other plant nutrients in considerable amounts. Now the farmers became aware of the detrimental effects of pesticides and chemical fertilizers used in recent agricultural activities. Vermicompost appeared as a realistic alternative to the concerns related to increasing contamination in food. Vermicompost compliments nature and its viability. It is a comprehensive approach that aims to create sustainable eco-system, safe food, animal welfare and better livelihood opportunities for farmers. Organic wastes are...

Techniques for improving saline and alkaline soil for soil improvement and crop management भूमि लवणता एवं क्षारीयता विश्व की एक प्रमुख समस्या है । खाद्य एवं कृषि संगठन (एफ.ए.ओ 2017) के अनुसार दुनिया भर में लगभग 800 मिलियन हैक्टर कृषि भूमि लवणीयता एवं क्षारीयता से प्रभावित है, जिसमें से करीब 7  मिलियन हैक्टर प्रभावित भूमि अकेले भारत में है। भारत में लवणीय भूमि का लगभग 40 प्रतिशत भाग प्रमुख रूप से उत्तर प्रदेश बिहार,   हरियाणा,पंजाब तथा राजस्थान राज्यों में फैला हुआ है। लवणीय भूमि को कृषि योग्य बनाने के लिए लगभग 27.3 बिलियन अमरीकी डॉलर सालाना खर्च किए जाते हैं। अभी तक भारत में लगभग 1.74 मिलियन हैक्टर ऊसर भूमि का ही...

Symptoms and prevention of nutrient deficiency in rabi crops  प्रत्येक पोषक तत्व पौधों के अंदर कुछ विशेष कार्य करने होते हैं। एक पोषक तत्व दूसरे पोषक तत्व का कार्य नहीं कर सकता है। किसी एक पोषक तत्व की सांद्रता जब निश्चित क्रांतिक स्तर से नीचे आ जाती है तो पौधे में उस पोषक तत्व की कमी हो जाती है। इससे पौधे के जीवन की क्रिया में बाधा पड़ती है तथा उसके विभिन्न अंगों खासकर पत्तियों पर तत्व विशेष की कमी के लक्षण दिखाई देते हैं। रबी फसलों मे प्रमुख पोषक तत्‍वों के कार्य, उनकी कमी के लक्षण तथा नि‍वारण के तरीके इस प्रकार है। नाइट्रोजन  मुख्य कार्य नाइट्रोजन कार्बन एवं जल के बाद पौधों में पर्याप्त मात्रा...

How to manage saline and sodic soils लवणीय एंव क्षारीय भूमि भारत के शुष्क एंव अर्द्धशुष्क जलवायु वाले क्षेत्रों में पाई जाती है। इन स्थानों पर प्रायः भूमि जल भी खारा पाया जाता है। और इसी खारे पानी के खेती में उपयोग से लवणयिता एंव क्षारीयता की समस्या उत्पन्न होती है। भारत में करीब 6.73 मिलियन हेक्टयर भूमि लवणीय एंव क्षारिय श्रेणी के अन्र्तगत पाई गई है। लवणीय भूमि वह है जिसमें संतृप्ति मिट्टी के अर्क की विद्यूत चालकता 4 डीस/मीटर से अधिक होती हैं। लवणीय भूमि के सोडियम, कैल्शियम, मैगनीशियम के क्लोराइड एंव सल्फेट लवणों की अधिक मात्रा पाई जाती है। जिससे मिट्टी के घोल का रसाकर्षण दबाव बढ़ जाता है,...

कृषि क्षेत्र में जैव-आवेगों का योगदान The increase in the world's population, coupled with the limitations in the world's supply of natural resources and widespread degeneration of the environment presents a major challenge to agriculturalists. Chemical fertilizer is used to give the plant nutrient requirements within a short period to get faster results. Newly improved varieties of crops need high proportions of fertilizer. But chemical fertilizer has certain limitations and entails a lot of disadvantages. No doubt, the application of chemical fertilizer provides nutrition in high concentration in the soil and plants. When chemical fertilizer is applied, the entire contents would not be absorbed by the plants and the remaining parts would...

Use of Biodegradable Nanoclay Polymer Composite (NCPC) for controlled release of nitrogen fertilizer in soil पौधों के विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण तत्व नाइट्रोजन है जिसकी आवयश्कता बड़ी मात्रा में होती है अतः  कमी से बचने के लिए इसे उर्वरक के द्वारा मिट्टी में डालना अति आवश्यक है। वर्त्तमान समय में, किसानों द्वारा अंधाधुन उर्वरकों का  प्रयोग उत्पादन सीमा में वृद्धि के लिए किया जा रहा है। दक्षिण पूर्व एशिया में यूरिया सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली उर्वरकों की श्रेणी में है इसका एक कारण इसमें मौजूद उच्च नाइट्रोजन की मात्रा और दूसरा इसके उत्पादन में अपेक्षाकृत कम लागत का होना है। हालांकि, पारम्परिक  उर्वरकों से नाइट्रोजन  का लगभग 40-70% पर्यावरण में ...

Utilities of Soil Health Card सभी किसान भाई जानते है कि फसल उत्पादन के लिए मृदा यानि मिट्टी एक बहुत ही उपयोगी प्राकृतिक माध्यम है। पौधों को अपनी बढ़वार, जड़ व तने के विकास, फूल व फलों के निर्माण आदि के लिए भोजन के रूप् में 16 पोषक तत्वों की जरूरत होती है। ये पोषक तत्व हैं C,H,O,N,P,K,Ca,Mg,S,Fe,Cu,Zn,Mo,B एंव Cl इनमें से C,H,O तो पौधे हवा एवं पानी से प्राप्त लेते है तथा शेष 13 पोषक तत्व पौधों को मिट्टी से ही प्राप्त होते है। मिट्टी से ही पौधों को आवश्यकतानुसार पानी एवं सीधा खड़े रहने के लिए यांत्रिक सहारा मिलता है इसके अलावा मिट्टी में पौधों के लिए लाभदायक कई सूक्ष्मजीव भी...

चावल-गेहूं की फसल प्रणाली के परिप्रेक्ष्य में मिट्टी की उर्वरता पर फसल अवशेषों का प्रभाव Crop residues (CRs) are considered a vital natural resource for conserving and sustaining soil productivity. Addition of CRs to soil is a useful tool in maintaining and increasing amounts of soil organic matter. Therefore, soils have significant capacity for C storage and to mitigate atmospheric CO2. As rice-wheat cropping system (RWCS) is one of the world’s largest agricultural production systems, covering an area of ~26 M ha spread over the Indo Gangetic Plains (IGPs) in South Asia and China. Rice and wheat are harnessing enormous soil fertility therefore, to maintain the productivity of this system, replenishment of...