Soil & Fertilizers

रसोई उद्यान के लिए खाद तैयार करने की सरल प्रक्रिया For getting bumper production, farmers are using more than recommended doses of agro-chemicals which is getting accumulated in the farm produce. These toxin upon consumption, are increasing health risk in both human and animals. Because of this , the demand for organic produce is increasing and the concept of kitchen garden is getting popularity. Growing seasonal fruits and vegetables in the kitchen garden also needs nutrient from external source. Application of compost can supply the desired nutrient from organic source. The large volume of waste generated from the house hold can effectively be converted to compost, which can serve as external source...

 मृदा खराब होने की अवस्‍था को धीमा करने तथा पलटनेे की रणनीति‍यॉं:  एग्रोफोरेस्ट्री की भूमिका Soil degradation implies decline in the quality and capacity of soil through natural or anthropogenic perturbations. Degradation processes include erosion, compaction and hard setting, acidification, declining soil organic matter (SOM), soil fertility depletion, biological degradation, and soil pollution. Soils are the basis for more than 90% of worldwide food production. However, about 25% of the world’s arable land is degraded. Without fertile soils, world food security is at risk. Very limited degree of agriculturally usable soil (about 12% of the total land area) is available on the earth’s surface. The degraded soils cannot be restored within a human generation....

Types of Soil Found in India सर्वप्रथम १८७९ ई० में डोक शैव ने मिट्टी का वर्गीकरण किया और मिट्टी को सामान्य और असामान्य मिट्टी में विभाजित किया। भारत की मिट्टियाँ स्थूल रूप से पाँच वर्गो में विभाजित की गई है: जलोढ़ या कछार मिट्टी (Alluvial soil), काली  या रेगुर मिट्टी (Black soil), लाल मिट्टी (Red soil), लैटराइट मिट्टी (Laterite) तथा मरु मिट्टी (desert soil)। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने भारत की मिट्टी को आठ समूहों में बांटा है: जलोढ़ मिट्टी  (Alluvial soil), काली मिट्टी (Black soil), लाल एवं पीली मिट्टी (Red & Yello soil), लैटराइट मिट्टी (Laterite), शुष्क मृदा (Arid soils), लवण मृदा (Saline soils), पीटमय तथा जैव मृदा (Peaty & Organic soils) , वन मृदा (Forest soils) जल को अवषोषण करने की क्षमता सबसे अधिक दोमट मिट्टी...

Soil Testing and Balanced Nutrient Management is a must for Higher Yield पौधों की बढ़वार के लिये प्रमुख रूप से 16 विभिन्न पोषक तत्वों की जरूरत होती है, जिसमें से 03 पोषक तत्व कार्बन, हाईड्रोजन तथा आक्सीजन पौधे वायुमण्डल एवं जल से ग्रहण करते हैं। शेष 13 पोषक तत्व जैसे नत्रजन, स्फुर, पोटाश, कैल्शियम, मैग्नीशियम, सल्फर एवं सूक्ष्म तत्व - आयरन, कापर, जिंक, मैंगनीज,बोरान, क्लोरीन एवं मालीब्डेनम पौधे को भूमि से प्राप्त होता है। इसमें से किसी भी तत्व की कमी या अधिकता होने पर फसल की वृद्धि एवं उत्पादकता प्रभावित होती है। एक तत्व की कमी या अधिकता दूसरे तत्व के अवशोषण पर भी प्रभाव डालता है। इसी तरह मिट्टी की...

फसल उत्पादन में अवशेषों का पुनःचक्रण Residues are the by-products of crops plants and other vegetative products of plants are which are organic in nature and has vital importance for agricultural production. The monotonous use of inorganic fertilizers devoid of balanced NPK and micronutrients has resulted in decreasing soil organic carbon (SOC) and fatigued crop production. Soil organic matter (SOM) mostly obtained from organic residues facilitates the aggregation and structural stability of soils and responsible for air-water relationship for root growth and protection of soil from wind and water erosion. The composting, in-situ incorporation or retention as stubble mulch are the common methods of residue management. Residues in general are C-rich materials but...

Nutrient supply and element management in plants पौधों के पोषक तत्व वह रसायनि‍क पदार्थ होतेे है, जिसकी आवश्यकता पौधेे को उसके जीवन, वृद्धि और उसके शरीर की उपापचय क्रियाओं को चलाने के लिए होती है। पोषक तत्‍व शरीर को समृद्ध करते हैं। यह ऊतकों का निर्माण और उनकी मरम्मत करते हैं, यह शरीर को उष्मा और ऊर्जा प्रदान करते हैं। पौधे इनको अपनी जड़ों के माध्यम से सीधे मिट्टी से या अपने वातावरण से प्राप्त करते हैं। जैविक पोषक तत्वों में कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन (अमिनो अम्ल) और विटामिन शामिल हैं। अकार्बनिक रासायनिक यौगिकों, जैसे खनिज लवण, पानी और ऑक्सीजनको भी पोषक तत्व माना जा सकता हैं। जीव को पोषक तत्व किसी बाहरी स्रोत से लेने की आवश्यकता तब पड़ती है जब उसका शरीर इनकी पर्याप्त मात्रा का संश्लेषण स्वयं उसके शरीर में...

Classification of Indian Soils. भारतवर्ष जैसे विशाल देश में विभिन्न प्रकार की मिट्टियाँ पाई जाती हैं.  भारतीय मिट्टी का सर्वेक्षण वि‍ष्‍लेश्‍ण कई सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों ने किया है। यहां पार्इ जाने वाली मि‍ट्टी के मुुुुख्‍यत 5  प्रकार हैैै। जलोढ़ मिट्टी , काली मिट्टी , लाल मिट्टी , लैटेराइट मिट्टी (बलुई), तथा रेतीली (रेगिस्तानी मिट्टी)। 1. जलोढ़ मिट्टी जलोढ़ मिट्टी को दोमट और कछार मिट्टी के नाम से भी जाना जाता है. नदियों द्वारा लाई गई मिट्टी को जलोढ़ मिट्टी कहते हैं. यह मिट्टी हमारे देश के समस्त उत्तरी मैदान में पाई जाती है. प्रकृति से यह एक उपजाऊ मिट्टी होती है. उत्तरी भारत में जो जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है। वह तीन मुख्य नदियों द्वारा लाई जाती...

Panchagavya - an important medicine for plants  पिछले दो-तीन दशकों से निरंतर रासायनिक खादों के प्रयोग से जमीन की उर्वरक शक्ति में कमी आई है। इसी तरह आने वाले समय में जमीन रसायनों का ढे़र बन जायेगी और हम सिर्फ पुरानी बातों को दोहरा के चीजों को बढ़ावा देते रहेंगे। आज जरुरत है तो हमारी कृषि कार्य प्रणाली में बदलाव लाने की फिर से हमे हमारे पुरखों के बताए पथ पर अग्रसित होना होगा। उनकी कृषि कार्य प्रणाली को अपनाना होगा और कम लागत में अधिक मुनाफे का मूल मंत्र अपनाना होगा। जैसा कि हमारे माननीय प्रधान मंत्री जी भी बोलते हैं कि 2022 तक किसानों की आमदनी दौगुनी हो जाएगी लेकिन...