Author: Krishisewa

उच्च-इनपुट खेती के आकर्षण से कुछ समय तक लाभ हो सकता है, पर स्थायी आजीविका वहीं है जो मिट्टी को बचाकर रखे। आज समझदारी इसी में है की हम मिट्टी को फिर से संपन्न बनाएं, इनपुट बाजार पर किसान की निर्भरता कम करके उसे सशक्त बनाएं, और स्थानीय बाजार की सीमाओं से आगे निकलकर समूह के साथ नए रास्ते बनाएं।...

सूक्ष्मजीव ऊंट के भोजन को पचाने में मददगार होते हैं। ऊंट कठिन, रेशेदार वनस्पतियां जैसे कंटीली झाड़ियाँ, सूखी घास, नमकयुक्त पौधे, वृक्ष की छाल, और सूखा चारा खाते हैं। इन पौधों में उपस्थित जटिल कार्बोहाइड्रेट मुख्यतः सैलूलोज, हेमीसेल्युलोज, लिग्निन को ऊंट स्वयं नहीं पचा सकते हैं। उनके पेट के पहले भाग (जिसे की रूमेन कहते हैं) में लाखों प्रकार के सूक्ष्मजीव रहते हैं, जो इन जटिल कार्बोहाइड्रेट और अन्य जटिल रेशों को तोड़कर...

Impact of US tariffs on India's economy अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक संबंध दशकों से मजबूती से चले आ रहे है। भारत, विश्व के उन देशों में है जिनके साथ अमेरिका का व्यापार‐परिवहन बहुत बड़ा है। अमेरिका में भारतीय वस्त्र गहने, समुद्री उत्पाद विशेषकर झींगा, आईटी सेवाएँ, रसायन, चमड़े एवं फर्नीचर. प्रमुख निर्यात कि श्रेणियों में हैं। ये उद्योग लाखों लोगों को रोजगार देते हैं जिसमे बहुत से छोटे किसान, श्रमिक, प्रसंस्करण इकाई इनसे जुड़े हुए हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का अमेरिका को निर्यात लगभग 86.5 अरब अमेरिकी डॉलर रहा है। कुल वस्तु विनिमय में इस व्यापार का बड़ा हिस्सा है।  लेकिन वर्ष 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत से...

Holistic approach of integrated nutrient management for agricultural development in Bihar बिहार, भारत का एक प्रमुख कृषि प्रधान राज्य है, जिसकी अर्थव्यवस्था और आजीविका का बड़ा हिस्सा कृषि पर निर्भर है। जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों के लगातार क्षय के बीच, कृषि उत्पादन को बढ़ाने और टिकाऊ बनाने के लिए समेकित पोषक तत्व प्रबंधन (आईएनएम) की आवश्यकता बढ़ गई है। यह दृष्टिकोण मृदा स्वास्थ्य को बनाए रखते हुए उत्पादन बढ़ाने के लिए विभिन्न पोषक स्रोतों के संतुलित और कुशल उपयोग पर आधारित है। समेकित पोषक तत्व प्रबंधन का महत्व मृदा की उर्वरता बनाए रखना: मृदा की उत्पादकता लंबे समय तक बनाए रखना। पोषक तत्वों की आपूर्ति में संतुलन: जैविक, अजैविक और प्राकृतिक स्रोतों...

Empowering Rural Women through Value Addition: The Success Story of Kumkum SHG, Kera Kheda (KVK Fazilka) ग्रामीण भारत में महिलाओं का सशक्तिकरण केवल परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने तक सीमित नहीं है,  बल्कि यह पूरे समुदाय के सामाजिक और आर्थिक विकास का आधार है। कौशल विकास और आयवर्धन गतिविधियाँ इस दिशा में प्रभावी साधन हैं। जिला फाजिल्का के ग्राम केरा खेड़ा की कुमकुम स्वयं सहायता समूह (SHG) इस बात का प्रेरणादायक उदाहरण है कि लक्षित प्रशिक्षण,  सामूहिक प्रयास और सही मार्गदर्शन से ग्रामीण महिलाएँ आत्मनिर्भरता की राह पर कैसे आगे बढ़ सकती हैं। केवीके फाजिल्का की भूमिका कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), फाजिल्का द्वारा महिलाओं की क्षमता और उद्यमिता को बढ़ावा देने के...

Dragon Fruit: An Modern, Nutritious and Medicinal Fruit  ड्रैगन फ्रूट, हिलोकेरस अनडाटस (Hylocereus undatus) जो केक्टेसि ¼Cactaceae½ परिवार से संबंधित है। ड्रैगन फ्रूट को दुनिया भर में पहले एक सजावटी पौधे के रूप में और फिर एक फल फसल के रूप में मान्यता मिली। यह फल अपने मीठे, हल्के स्वाद, आकर्षक रंग और अद्भुत बनावट के लिए प्रसिद्ध है । इसका फूल इतना सुंदर है कि इसे ‘‘नोबल वुमन‘‘ या ‘‘क्वीन ऑफ द नाइट‘‘ का उपनाम दिया गया है। इसे होनोलुलु रानी, स्ट्रॉबेरी नाशपाती व पिताया फल (मतलब ‘‘पपड़ीदार फल’) के नाम से भी जाना जाता है। यह एक विदेशी फल है जिसकी उत्पत्ति मध्य अमेरिका, मैक्सिको और दक्षिण अमेरिका से हुई...

Artificial intelligence in minimizing pesticide and water use in agriculture ऐसे बुद्धिमान कंप्यूटरों का निर्माण जो ऐसे कार्यों को कर सकते हैं जिनमें आमतौर पर मानव बुद्धि की आवश्यकता होती है, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई)) के रूप में जाना जाता है, जो कंप्यूटर विज्ञान की एक शाखा है। उद्योग के सभी पहलुओं में, कृत्रिम बुद्धिमत्ता का महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ रहा है। दुनिया के सबसे पुराने और सबसे महत्वपूर्ण व्यवसायों में से एक कृषि और खेती है। इसका अर्थव्यवस्था पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। विश्व की बढ़ती जनसंख्या के कारण भूमि, जल और अन्य संसाधन समाप्त होते जा रहे हैं, मांग-आपूर्ति चक्र को बनाए रखना असंभव बना रहा है। इस प्रकार, हमें...

Agronomy Management in Sugarcane Crop डॉ. ललिता राणा गन्ना भारत में महŸवपूर्ण औद्योगिक फसलों में से एक है। गन्ना भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था में महŸवपूर्ण योगदान देती है। गन्ना उत्पादित करने वाले क्षेत्रों में गामीण अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से गन्ने की फसल एवं चीनी या संबद्ध उद्योग से जुड़ी हुई है। देश की बढ़ती जनसंख्या के फलस्वरूप सन् 2030 तक शर्करा पदार्थों की प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष आवश्यकता 35 किग्रा0 तक पहंुॅंच जाने का अनुमान है जिसमें 20 किग्रा0 चीनी व 15 किग्रा0 गुड़ एवं खण्डसारी सम्मिलित है। अतः इनकी पूर्ति के लिए अधिकतम गन्ना उत्पादन तथा चीनी परता प्राप्त करने की महती आवश्यकता है।   गन्ना के लिए उपयुक्त मौसम गन्ना एक उष्णकटिबन्धीय पौधा है।...