Author: Krishisewa

NPK Calculator: फसल के लिए खाद की सही मात्रा निकालें फसल को Nitrogen (N), Phosphorus (P) और Potassium (K) की जरूरत अलग-अलग मात्रा में होती है। लेकिन खेत में कितने किलो Urea, DAP, MOP या NPK fertilizer डालना है, यह समझना कई बार मुश्किल हो जाता है। NPK Calculator इसी गणना को आसान बनाने के लिए है। इसमें आप अपनी फसल के लिए जरूरी N, P₂O₅ और K₂O की मात्रा दर्ज करके इस्तेमाल होने वाली खाद की अनुमानित मात्रा निकाल सकते हैं। जरूरी बात: NPK की आवश्यकता फसल, मिट्टी और क्षेत्र के अनुसार बदल सकती है। जहां संभव हो, Soil Test Report और स्थानीय कृषि सिफारिश को आधार बनाएं। 🌾 NPK Calculator फसल की NPK जरूरत के अनुसार खाद की मात्रा निकालें पहले...

खेती में खाद डालने का सही तरीका समझना बहुत जरूरी है। कई बार किसान यह तो जानते हैं कि फसल में Urea, DAP या Potash देना है, लेकिन यह तय करना मुश्किल होता है कि एक एकड़ या एक हेक्टेयर खेत में कितनी मात्रा डालनी चाहिए। खाद की जरूरत...

खेत में fertilizer का सही और संतुलित उपयोग crop growth के लिए महत्वपूर्ण है। खेती में अच्छी फसल के लिए केवल अच्छी quality का seed ही पर्याप्त नहीं होता। पौधों को सही मात्रा में nutrients मिलना भी उतना ही जरूरी है। इसी कारण किसानों के बीच Urea, DAP और NPK fertilizer का इस्तेमाल काफी common है। लेकिन अक्सर किसानों के मन में यह सवाल रहता है कि Urea, DAP और NPK में क्या अंतर है? कौन-सी खाद में कौन-सा nutrient होता है और किस परिस्थिति में कौन-सा fertilizer उपयोगी हो सकता है? इस article में हम आसान भाषा में समझेंगे कि Urea, DAP और NPK fertilizer क्या हैं, इनमें कौन-कौन से nutrients होते हैं, इनके बीच क्या difference...

धान के खेत में मछली पालन यानी Rice Fish Farming खेती का ऐसा तरीका है जिसमें किसान धान की फसल के साथ उसी खेत के पानी का इस्तेमाल मछली पालन के लिए भी करता है। सही खेत और सही प्रबंधन हो तो एक ही जमीन से धान के साथ मछली का अतिरिक्त उत्पादन लिया जा सकता है। इसी वजह से पिछले कुछ वर्षों में Rice Fish Farming, Paddy Fish Farming और Integrated Rice-Fish Farming जैसे तरीकों पर किसानों और कृषि संस्थानों का ध्यान बढ़ा है। यह कोई नया विचार भी नहीं है। भारत में paddy-cum-fish culture पर वैज्ञानिक स्तर पर कई दशकों से काम किया जा रहा है। ICAR के दस्तावेजों...

उच्च-इनपुट खेती के आकर्षण से कुछ समय तक लाभ हो सकता है, पर स्थायी आजीविका वहीं है जो मिट्टी को बचाकर रखे। आज समझदारी इसी में है की हम मिट्टी को फिर से संपन्न बनाएं, इनपुट बाजार पर किसान की निर्भरता कम करके उसे सशक्त बनाएं, और स्थानीय बाजार की सीमाओं से आगे निकलकर समूह के साथ नए रास्ते बनाएं।...

सूक्ष्मजीव ऊंट के भोजन को पचाने में मददगार होते हैं। ऊंट कठिन, रेशेदार वनस्पतियां जैसे कंटीली झाड़ियाँ, सूखी घास, नमकयुक्त पौधे, वृक्ष की छाल, और सूखा चारा खाते हैं। इन पौधों में उपस्थित जटिल कार्बोहाइड्रेट मुख्यतः सैलूलोज, हेमीसेल्युलोज, लिग्निन को ऊंट स्वयं नहीं पचा सकते हैं। उनके पेट के पहले भाग (जिसे की रूमेन कहते हैं) में लाखों प्रकार के सूक्ष्मजीव रहते हैं, जो इन जटिल कार्बोहाइड्रेट और अन्य जटिल रेशों को तोड़कर...

Impact of US tariffs on India's economy अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक संबंध दशकों से मजबूती से चले आ रहे है। भारत, विश्व के उन देशों में है जिनके साथ अमेरिका का व्यापार‐परिवहन बहुत बड़ा है। अमेरिका में भारतीय वस्त्र गहने, समुद्री उत्पाद विशेषकर झींगा, आईटी सेवाएँ, रसायन, चमड़े एवं फर्नीचर. प्रमुख निर्यात कि श्रेणियों में हैं। ये उद्योग लाखों लोगों को रोजगार देते हैं जिसमे बहुत से छोटे किसान, श्रमिक, प्रसंस्करण इकाई इनसे जुड़े हुए हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का अमेरिका को निर्यात लगभग 86.5 अरब अमेरिकी डॉलर रहा है। कुल वस्तु विनिमय में इस व्यापार का बड़ा हिस्सा है।  लेकिन वर्ष 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत से...

Holistic approach of integrated nutrient management for agricultural development in Bihar बिहार, भारत का एक प्रमुख कृषि प्रधान राज्य है, जिसकी अर्थव्यवस्था और आजीविका का बड़ा हिस्सा कृषि पर निर्भर है। जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों के लगातार क्षय के बीच, कृषि उत्पादन को बढ़ाने और टिकाऊ बनाने के लिए समेकित पोषक तत्व प्रबंधन (आईएनएम) की आवश्यकता बढ़ गई है। यह दृष्टिकोण मृदा स्वास्थ्य को बनाए रखते हुए उत्पादन बढ़ाने के लिए विभिन्न पोषक स्रोतों के संतुलित और कुशल उपयोग पर आधारित है। समेकित पोषक तत्व प्रबंधन का महत्व मृदा की उर्वरता बनाए रखना: मृदा की उत्पादकता लंबे समय तक बनाए रखना। पोषक तत्वों की आपूर्ति में संतुलन: जैविक, अजैविक और प्राकृतिक स्रोतों...