Crop disease

रेशमकीट के 5 प्रमुख रोग व परभक्षी तथा उनका नि‍यंंत्रण। Silkworm is reared for the production of cocoons, which is the raw material for silk production. It provides gainful employment and helps in the improvement of the socio-economics life of the peoples in the rural areas. During rearing, the silkworm are affected by various types of pathogenic agents viz. protozoa, virus, fungi and bacteria. It has been reported that about 30-400 % of total crop loss is due to the occurrence of four major diseases namely Pebrine (protozoan disease), Flecherie (bacterial disease), Grasserie (viral disease) and Muscardine (fungal disease). Other than diseases Uzi fly is considered as serious endo-larval parasitoid of the silkworm and yield...

Weed management in pulse crops दलहनी फसलों की पैदावार में कमी होने के प्रमुख कारकों में खरपतवारों की समस्या बहुत जटिल है। दलहनी फसलों की शुरूआती धीमी बढ़वार एवं कम ऊँचाई के कारण खरपतवार फसलों के ऊपर हावी हो जाते हैं तथा उपज को प्रभावित करते हैं। दलहनी फसलों में खरपतवारों की समय पर रोकथाम से न केवल पैदावार बढ़ाई जा सकती है अपितु उसमें गुणवत्ता को भी बढ़ाया जा सकता है। दलहनी फसलों के प्रमुख खरपतवार निम्नलिखित है तालिका-1 दलहनी फसलों के प्रमुख खरपतवार खरपतवारों की श्रेणी खरपतवार रबी खरीफ सकरी पत्ती वाले      गेंहूँ का मामा, (फेलोरिस्प माइनर), जंगली जई (ऐवेना फेच्वा), दूब घास (साइनोडोंन डेक्टीलोन)    संवा (इकानोक्लोआ कालोना)  दूब घास (साइनोडान डेक्टीलान)कोदों (इल्यूसिन इण्डिका)बनरा (सिटैरिया ग्लाऊका) चैड़ी पत्ती वाले कृष्णनील (एनागोलिस आरवेनसिस), बथुआ (चिनोपोडियम एल्बम),...

सोलनैसि‍यस (टमाटर और बैंगन) सब्जियों में एकीकृत कीट प्रबंधन Integrated Pest Management (IPM) is a component of the agro ecosystem management technology for sustainable crop production. It is knowledge intensive system and background information regarding the pest, abiotic and biotic factors agro ecosystem and management tactics required for execution of IPM programmes. A. TOMATO IPM 1. Fruit Borer (Helicoverpaarmigera) Identication:- The adult is stout and medium-sized moth and has a dark circular spot in the centre on the forewing. They lay small, single, and whitish round eggs on the trifoliate leaves beneath the topmost flower cluster. Eggs hatch in about 3-4 days and the first instars larvae initially feed on the leaves and migrate...

Weed management for bursim and Lucerne बरसीम एवं लूसर्न हरे, रसदार एवं स्वादिष्ट चारे के लिए रबी (शीत ऋृतु) में सिंचित क्षेत्रों की महत्वपूर्ण फसलें हैं। ये फसलें वायुमण्डलीय नाइट्रोजन का भूमि में स्थिरीकरण करके भूमि की उर्वरता बढ़ाती है। ये पोषण की दृष्टि से उच्च गुणवत्ता वाली चारे की फसलें हैं। ये दुधारू पशुओं के लिए अत्यन्त उपयोगी होती है। बरसीम एवं लूसर्न में प्रोटीन, खनिज पदार्थ मुख्यतः कैल्सियम तथा फास्फोरस, विटामिन आदि के महत्वपूर्ण स्त्रोत हैं। दोनों फसलों की औसत पाचनशीलता 60-70 प्रतिशत तक पायी जाती है। बरसीम फसल की उच्च गुणवत्ता के कारण इसे ‘चारे की फसलों का राजा’ कहा जाता है। लूसर्न (रिजका) एवं बरसीम की फसलों में...

Plant Protection Methods in Pea Crop मटर एक फूल धारण करने वाला द्विबीजपत्री पौधा है। इसकी जड़ में गांठे मिलती हैं। मटर के एक बीज का वजन ०.१ से ०.३६ ग्राम होता है। सब्जियो मे मटर का स्थान प्रमुख रहा है। इसकी खेती हरी फल्ली (सब्जी), साबुत मटर, एवं दाल के लिये की जाती है। आजकल मटर की डिब्बा बंदी काफी लोकप्रिय हो रही है। इसमे प्रचुर मात्रा मे प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फास्फोरस, रेशा, पोटेशियम एवं विटामिन्स पाया जाता है। स्वाद एवं पौष्टिकता की दृष्टि से दलहनी फसलो मे से मुख्य फसल है। इस लेख के माध्यम से मटर में पौध संरंक्षण करके अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा  सकता है मटर की फसल के रोग मटर की फसल मे रोगो...

7 Major diseases of Seasonal Flowers and their control measures फूलो की व्यवसायिक खेती किसान बंधुओ के लिये आर्थिक दृष्टि से लाभदायक होती है। यह किसानो के लिये कृषि के साथ-साथ अतिरिक्त आमदनी का एक महत्वपूर्ण जरिया भी बन सकता है। वर्तमान मे शहरीकरण विकास के साथ फूलो का व्यवसाय भी तेजी पकड़ रहा है तथा आने वाले समय मे इनकी और अधिक मांग होने की संभावना प्रबल है। मौसमी फूलो मे लगने वाले रोगो से इनका उत्पादन, गुणवत्ता एवं बाजार भाव व मांग पर विपरीत असर पड़ सकता है। अतः फूलो मे लगने वाले विभिन्न रोगो का सही समय पर एवं उचित पौध संरंक्षण उपायो द्वारा रोकथाम करके होने वाले...

नीम के बायोपेस्टीसाइड: एकीकृत कीट प्रबंधन के लिए उपयुक्त जैव कीटनाशक Continuous and excessive use of chemical pesticides over a period of time has resulted in serious problems such as development of insect resistance, insecticide-induced resurgence of insect-pests, toxicity to non-target organisms and also to human beings. Now there is an urgent need to evolve an alternate coherent pest management programme, which is effective and environment friendly. It would be appropriate to identify chemicals, which render crop plants unattractive or unpalatable for feeding by insect-pests, and at the same time are fully biodegradable. Several plant products possess the property of making crop foliage unattractive for feeding, and hence, form an important component of...

Grow pest attracting plants and protect your crops from harmful pests  फसल उत्पादन को प्रभावित करने वाले कारकों में कीटों की भूमिका अहम रहती है। विभिन्न प्रकार के कीट जैसे-माहो, थ्रिप्स, लीफ हापर आदि अपने मुख के विभिन्न भागों से फसलों , फलों, सब्जियों एवं खाघानों को चूसकर, कुतर कर, खाकर एवं उसमें घुसकर हानिकारक पदार्थ छोडतें है, जिससे फसल तो खराब होती ही है साथ ही उसकी गुणवत्ता व बाजार मूल्य कम हो जाती है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पडता है। कीट आकर्षित करने वाली फसलें, कीटों के आक्रमण को कीटनाशी केे प्रयोग के बि‍ना रोककर, किसानों की आय को लगभग 10-30 प्रतिशत तक बढा सकती है। कीट आकर्षित फसलें विभिन्न प्रकार...