Seed production

उष्णकटिबंधीय गाजर की गुणवत्ता बीज उत्पादन तकनीक Carrot has high yield per given area with less input and labour requirement. It has different colours such as red, orange and yellow colour for food plate and rich in antioxidants (carotene, lycopene, anthocyanin). Carrot seeds demand Globally, it is the 10th top vegetable crops in the world with annual world production. In India, carrot is cultivated in almost 22 states in India in 62,412 ha area with production of 10,73,711 MT and average productivity of 17.2 MT/ha. The increasing trend in carrot production in country requires support to strengthen indigenous seed production of carrot which will generate employment in rural areas as well as save a...

प्याज बीज फसल में परागणकों का टिकाऊ प्रबंधन Onion is highly cross-pollinated crop and flowers are protandrous and therefore self- pollination is largely absent. The event of cross-pollination in onion is mostly rely upon insects foragers particularly honey bees. They are considered as major pollinating agents in onion seed production system. However, use of synthetic pesticides for managing onion thrips, Thrips tabaci could have an impact on insect pollinating service ultimately reduction in seed yield. Hence, the sustainable way of approach is essentially required for effective management of native pollinators and their eco-system service for quality seed production in onion. In these article, the basic information about important pollinator species, their role and...

चने का फाउंडेशन और प्रमाणित बीज उत्पादन करने की तकनीक  Gram or chickpea is leguminous crop and there are two distinct types of chickpea Desi chick pea  Coloured and thick seed coat.  Brown, yellow, green and black.  Small, angular and rough surface.  Flower pink with anthocyanin pigment  Some Desi variety have white flower with no anthocyanin pigment. Kabuli chick pea White or Beige – coloured seed Thin seed coat, smooth seed coat surface. White flower, lack of anthocyanin pigmentation on the Stem. High level of sucrose and lower level of fibre       General plant characteristics of Gram: Plant height generally varies from 30-70 cm. Lateral roots developed nodules with the symbiotic Rhizobium bacteria, capable of fixing atmospheric nitrogen in plant-usable form. Nodules appear/visible after one month /30days...

Hybrid seed production technique of Tomato बीज में शुद्धता का होना, बीजोत्पादन की प्रथम सीढी है। जो कि पर परागण तथा अन्य बाह्रय पदार्थों के मिलने से प्रभावित होती है। शुद्ध बीज की गुणवता भी अच्छी होती है। अत: बीजोत्पादन के लिए आनुवांशिक एवं बा्रहय पदार्थो के मिश्रण संबंधी शुद्वता हेतु निम्न बिन्दुओं को अपनाना परम आवश्‍यक है। पृथक्करण दूरी एक ही फसल की दो किस्मों में पर परागण द्वारा होने वाली अशुद्वता तथा स्व परागित फसलों मे कटाई के दौरान बाह्रय पदार्थों के अपमिश्रण से होने वाली अशुद्वता को रोकने के लिए एक ही कुल की दो फसलो या एक ही फसल की दो किस्मों के मध्य रखी जाने वाली आपसी दूरी को...

Quality Seed Production Methods in Pulses Crop भारतीय उपमहाद्वीप में दलहन फसलें प्रोटीन का प्रमुख स्त्रोत  है।  संतुलित भोजन का आधार होते हुए, वातावरणीय जैविक नाइट्रोजन को फिक्स करके मिट्टि की ऊर्वरता को बढ़ाने  की इसकी विशेषता  इसे बाकी  फसलों से अलग करती है। इसके अलावा इनकी गहरी जड़ व्यवस्था मिट्टी  के भौतिक गुणों  को बनाएं  रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। ज्यादातर दलहन फसलें झाड़ी नुमा होने की विशेषता के कारण मिट्टी की उरर्वरता बढ़ाने में मदद करती है।  खाद्य एवं कृषि संस्था (2016) के अनुसार भारत में प्रति व्यक्ति प्रोटीन की आवश्यकता  80 ग्राम प्रति दिन है परन्तु दुर्भाग्यपूर्ण केवल 40 ग्राम प्रति व्यक्ति ही उपलभ्ध है।  भारत दलहन फसलों का सबसे...

Production of  hybrid seed in tomato बीज में शुद्धता होना, बीजोत्पादन की प्रथम सीढी है। जो कि पर परागण तथा अन्य बाह्रय पदार्थों के मिलने से प्रभावित होती है। शुद्ध बीज की गुणवता भी अच्छी होती है। अत: बीजोत्पादन के लिए आनुवांश्‍कि‍‍ एवं बाहय पदार्थो के मिश्रण संबंधी शुद्ता हेतु निम्न बिन्दुओं को अपनाना परम आवश्क है। पृथक्करण दूरी एक ही फसल की दो किस्मों में पर परागण द्वारा होने वाली अशुद्वता तथा स्व परागित फसलों मे कटाई के दौरान बाह्रय पदार्थों के अपमिश्रण से होने वाली अशुदता को रोकने के लिए एक ही कुल की दो फसलो या एक ही फसल की दो किस्मों के मध्य रखी जाने वाली आपसी दूरी को...

Potential for potato seed production in Gwalior-Chambal area of Madhya Pradesh सफलतापूर्ण आलू उत्पादन हेतु गुणवत्ता युक्त बीज एक अत्यन्त महत्वपूर्ण अवयव है। गुणवत्तायुक्त बीज के अभाव की पहचान सम्पूर्ण विश्व में आलू उत्पादन में बाधक एक अत्यन्त महत्वपूर्ण कारक के रूप में हुई है। विशेषकर विकासशील देशों में गर्म जलवायु के कारण, आलू बीज एक अत्यन्त खर्चीली उत्पादक सामग्री है जो कि कुल उत्पादन लागत का 40 से 50 प्रतिशत तक होता है। भारत में लघु एवं सीमान्त कृषकों को गुणवत्तायुक्त बीज की अनुउपलब्धता के कारण विकसित देशों की तुलना में उत्पादकता निम्न है। कि‍सानों से प्राप्त बीज की तुलना में उत्तम गुणवत्तायुक्त बीज उपयोग करने से औसत उपज में 30 से...

Discussion on Conventional and Improved Techniques of Potato Seed Production आलू बीज उत्पादन हेतु वर्तमान में विश्व भर में  अनेक प्रवर्धन तकनीक उपयोग में लायी जा रही हैं। जिनमें मुख्यत: परम्परागत आलू बीज उत्पादन, ऊतक प्रर्वधन द्वारा आलू बीज उत्पादन (सूक्ष्म प्रवर्धन), हाइड्ररोफोनि‍क, ऐरोपोनिक ,  बायोरिएक्टर एवम्  एन.एफ.टी. आलू बीज उत्पादन तकनीक हैं। बीज उत्पादन की परम्परागत तकनीक (सूक्ष्म प्रवर्धन) , ऊतक प्रर्वधन तकनीक एवम् ऐरोपोनिक तकनीक केन्द्रीय आलू अनुसन्धान संस्थान, शिमला द्वारा विकसित की गयी हैं ।  विकासशील दशों के अधिकाशत: कृषक जो कि आलू बीज उत्पादन से जुडे हैं वे बीज उत्पादन की परम्परागत प्रणाली से प्राप्त आधार बीज को गुणन हेतु उपयोग में लाते हैं। उन्‍नत तकनीक विधि से आलू बीज बनाने में...