09 Oct हाई ब्लड प्रेशर कैसे कंट्रोल करें? कारण, लक्षण और 10 असरदार उपाय
हाई ब्लड प्रेशर कैसे कंट्रोल करें?
हाई ब्लड प्रेशर यानी हाई बीपी आजकल एक आम स्वास्थ्य समस्या बन गई है। कई लोगों को पता ही नहीं चलता कि उनका ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ है, क्योंकि शुरुआत में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। ऐसे में नियमित जाँच न होने पर यह समस्या लंबे समय तक अनदेखी रह सकती है।
अगर आपका बीपी बढ़ा हुआ रहता है, तो खान-पान में सुधार, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और डॉक्टर की सलाह से इसे नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है। कुछ लोगों को जीवनशैली में बदलाव के साथ दवाओं की भी जरूरत होती है।
इस लेख में जानिए हाई ब्लड प्रेशर क्या है, इसके कारण और लक्षण क्या हो सकते हैं, कौन-सी आदतें बीपी नियंत्रित रखने में मदद करती हैं और किन परिस्थितियों में तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
हाई ब्लड प्रेशर क्या होता है?
जब खून धमनियों की दीवारों पर लगातार अधिक दबाव डालता है, तो इस स्थिति को हाई ब्लड प्रेशर या हाइपरटेंशन कहा जाता है। ब्लड प्रेशर को दो संख्याओं में मापा जाता है। पहली संख्या सिस्टोलिक और दूसरी डायस्टोलिक प्रेशर बताती है। इसे mmHg में दर्ज किया जाता है।
उदाहरण के लिए, 120/80 mmHg का मतलब है कि सिस्टोलिक प्रेशर 120 और डायस्टोलिक प्रेशर 80 है। बीपी की सही श्रेणी अलग-अलग चिकित्सा दिशानिर्देशों के अनुसार कुछ भिन्न हो सकती है। इसलिए एक अकेली रीडिंग के आधार पर स्वयं को हाई बीपी का मरीज न मानें।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, अलग-अलग दिनों में जाँच के दौरान सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर 140 mmHg या अधिक और/या डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर 90 mmHg या अधिक मिलने पर हाइपरटेंशन की पुष्टि हो सकती है। व्यक्तिगत लक्ष्य आपकी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग हो सकता है।
लंबे समय तक अनियंत्रित बीपी रहने से हृदय रोग, स्ट्रोक और किडनी की बीमारी का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए नियमित जाँच और सही उपचार जरूरी हैं।
हाई बीपी होने के प्रमुख कारण
हाई ब्लड प्रेशर होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। कुछ का संबंध हमारी जीवनशैली से होता है, जबकि कुछ उम्र, पारिवारिक इतिहास और दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़े होते हैं।
- ज्यादा नमक खाना: भोजन में अधिक नमक और सोडियम लेने से बीपी बढ़ने का जोखिम हो सकता है।
- शारीरिक गतिविधि की कमी: लंबे समय तक बैठे रहना और नियमित व्यायाम न करना स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है।
- अधिक वजन: ज्यादा वजन होने से हाई बीपी का जोखिम बढ़ सकता है।
- धूम्रपान और तंबाकू: ये रक्त वाहिकाओं और हृदय को नुकसान पहुँचाते हैं।
- अधिक शराब: ज्यादा शराब पीने से रक्तचाप बढ़ सकता है।
- पारिवारिक इतिहास: परिवार में हाई बीपी की समस्या होने पर जोखिम बढ़ सकता है।
- कुछ स्वास्थ्य समस्याएँ: किडनी की बीमारी, डायबिटीज और कुछ हार्मोन संबंधी समस्याएँ भी बीपी को प्रभावित कर सकती हैं।
- उम्र बढ़ना: उम्र के साथ हाई बीपी होने का जोखिम बढ़ सकता है।
हर व्यक्ति में हाई बीपी का कारण एक जैसा नहीं होता। कई बार एक से अधिक कारण मिलकर जोखिम बढ़ाते हैं।
हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण
हाई बीपी की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि ज्यादातर लोगों को इसके शुरुआती चरण में कोई खास लक्षण महसूस नहीं होते। कोई व्यक्ति सामान्य महसूस कर सकता है, फिर भी उसका ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ हो सकता है।
बहुत अधिक बीपी होने पर कुछ लोगों को सिरदर्द, धुंधला दिखाई देना, सीने में दर्द या साँस लेने में परेशानी जैसी शिकायतें हो सकती हैं। हालाँकि, इन लक्षणों के दूसरे कारण भी हो सकते हैं। केवल लक्षणों से हाई बीपी की पुष्टि नहीं की जा सकती।
इसलिए समय-समय पर ब्लड प्रेशर की जाँच करवाना जरूरी है। यदि आपको बार-बार अधिक रीडिंग मिलती है, तो डॉक्टर से सलाह लें।
हाई ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने के 10 तरीके
1. रोज के खाने में नमक कम करें
हमारे भोजन में कई बार जरूरत से ज्यादा नमक शामिल हो जाता है। अचार, पापड़, नमकीन, चिप्स और पैकेटबंद खाद्य पदार्थों से भी काफी नमक मिल सकता है। इसलिए केवल ऊपर से नमक डालने पर ही नहीं, बल्कि पूरे दिन के कुल सेवन पर ध्यान देना जरूरी है।
WHO वयस्कों को प्रतिदिन कुल 5 ग्राम से कम नमक लेने की सलाह देता है। इसमें खाना बनाते समय डाला गया नमक और खाद्य पदार्थों में मौजूद नमक दोनों शामिल हैं।
2. संतुलित और पौष्टिक भोजन खाएँ
रोज के भोजन में हरी सब्जियाँ, मौसमी फल, दालें, साबुत अनाज और बिना नमक वाले मेवे शामिल करें। तले हुए भोजन और ज्यादा नमक वाले प्रोसेस्ड फूड को सीमित रखें।
महँगा डाइट प्लान अपनाना जरूरी नहीं है। घर में बना संतुलित भोजन भी अच्छी शुरुआत हो सकता है। यदि आपको किडनी की बीमारी है या डॉक्टर ने किसी पोषक तत्व को सीमित करने की सलाह दी है, तो उसी के अनुसार भोजन चुनें।
3. नियमित पैदल चलें
अगर आपका ज्यादातर समय बैठकर गुजरता है, तो रोज कुछ समय पैदल चलने के लिए निकालें। शुरुआत अपनी क्षमता के अनुसार करें और धीरे-धीरे समय बढ़ाएँ। सामान्य वयस्कों के लिए सप्ताह में कम से कम 150 मिनट की मध्यम तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि एक अच्छा लक्ष्य है।
नियमित चलना वजन नियंत्रित रखने और हृदय को स्वस्थ बनाए रखने में मदद कर सकता है। यदि आपका बीपी बहुत अधिक है या व्यायाम के दौरान सीने में दर्द अथवा साँस लेने में परेशानी होती है, तो चिकित्सकीय सलाह लें।
4. वजन को नियंत्रित रखें
यदि आपका वजन अधिक है, तो धीरे-धीरे वजन कम करने से बीपी को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है। संतुलित भोजन, नियमित गतिविधि और अच्छी नींद पर ध्यान दें। तेजी से वजन घटाने वाले तरीकों या अत्यधिक प्रतिबंधित डाइट से बचें।
5. तनाव को संभालने की कोशिश करें
काम और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच तनाव होना सामान्य है। लेकिन लगातार तनाव आपकी नींद, खान-पान और रोजमर्रा की आदतों को प्रभावित कर सकता है।
दिन में कुछ समय आराम करने, गहरी साँस लेने, ध्यान करने या अपनी पसंद की शांत गतिविधि के लिए निकालें। योग भी कुछ लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है। ये तरीके तनाव संभालने में मदद कर सकते हैं, लेकिन बीपी की दवा का विकल्प नहीं हैं।
6. धूम्रपान और तंबाकू से दूर रहें
धूम्रपान और तंबाकू का सेवन हृदय तथा रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुँचाता है। इन्हें छोड़ने से हृदय रोग और स्ट्रोक के जोखिम को कम करने में मदद मिलती है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से तंबाकू छोड़ने के लिए सहायता लें।
7. शराब का सेवन न करें या कम करें
अधिक शराब पीने से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। शराब न पीना बेहतर विकल्प है। यदि आप शराब लेते हैं, तो इसे कम करने या छोड़ने के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह ले सकते हैं।
8. पर्याप्त नींद लें
अच्छी नींद शरीर के सामान्य स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। ज्यादातर वयस्कों को हर रात लगभग 7 से 9 घंटे की नींद की जरूरत होती है। सोने और जागने का समय नियमित रखने की कोशिश करें।
यदि रात में तेज खर्राटे आते हैं, नींद में साँस रुकती है या दिनभर बहुत नींद आती है, तो डॉक्टर से जाँच करवाएँ। स्लीप एपनिया जैसी समस्या भी हाई बीपी से जुड़ी हो सकती है।
9. घर पर ब्लड प्रेशर की जाँच करें
घर पर बीपी मापने से अपनी रीडिंग पर नजर रखने और डॉक्टर को सही जानकारी देने में मदद मिलती है। इसके लिए सही आकार के कफ वाला प्रमाणित ऊपरी बाँह का डिजिटल बीपी मॉनिटर इस्तेमाल करना बेहतर है।
बीपी मापने से पहले लगभग पाँच मिनट आराम से बैठें। जाँच से 30 मिनट पहले धूम्रपान, कैफीन और व्यायाम से बचें तथा संभव हो तो मूत्राशय खाली कर लें। पीठ को सहारा दें, पैर जमीन पर रखें और हाथ को हृदय के स्तर पर रखें। मापते समय बात न करें।
रीडिंग और समय को लिखकर रखें। यदि रीडिंग लगातार अधिक आती है, तो रिकॉर्ड डॉक्टर को दिखाएँ। घर की रीडिंग से स्वयं दवा की खुराक न बदलें।
10. डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवा लें
कुछ लोगों का बीपी जीवनशैली में बदलाव से बेहतर नियंत्रित हो जाता है, जबकि कुछ लोगों को दवाओं की जरूरत होती है। यह उनकी रीडिंग, उम्र और दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं पर निर्भर करता है।
यदि डॉक्टर ने बीपी की दवा दी है, तो उसे निर्धारित तरीके से लें। बीपी सामान्य आने पर अपनी मर्जी से दवा बंद न करें और न ही खुराक बदलें। दवा से परेशानी हो रही हो, तो डॉक्टर से बात करें।
हाई बीपी में क्या खाना चाहिए?
हाई ब्लड प्रेशर में ऐसा भोजन चुनना उपयोगी है जिसमें नमक कम हो और पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में मिलें। अपनी पसंद और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार इन विकल्पों को रोज के भोजन में शामिल कर सकते हैं।
- फल: सेब, अमरूद, संतरा और अन्य मौसमी फल।
- सब्जियाँ: लौकी, तोरई, गाजर, पालक और दूसरी हरी सब्जियाँ।
- दालें: मूंग दाल, मसूर दाल, चना और राजमा।
- साबुत अनाज: दलिया, ओट्स और साबुत गेहूँ।
- दूध और दही: कम वसा वाले विकल्प, यदि आपके लिए उपयुक्त हों।
- मेवे: बिना नमक वाले बादाम और अन्य मेवे सीमित मात्रा में।
फल और सब्जियाँ पोटेशियम सहित कई जरूरी पोषक तत्व प्रदान करती हैं। हालांकि, किडनी की बीमारी होने पर या पोटेशियम बढ़ाने वाली दवाएँ लेने पर आहार में पोटेशियम बढ़ाने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
हाई बीपी में किन चीजों से बचना चाहिए?
- जरूरत से ज्यादा नमक और ज्यादा नमक वाले खाद्य पदार्थ।
- बार-बार फास्ट फूड, चिप्स और नमकीन खाना।
- धूम्रपान और तंबाकू का सेवन।
- अधिक शराब पीना।
- लंबे समय तक बिना शारीरिक गतिविधि के बैठे रहना।
- बिना डॉक्टर की सलाह के दवा बंद करना या खुराक बदलना।
- घरेलू नुस्खों के भरोसे जरूरी इलाज टालना।
यदि आप सर्दी-जुकाम की दवाएँ, दर्द निवारक दवाएँ या कोई सप्लीमेंट लेते हैं, तो डॉक्टर या फार्मासिस्ट से पूछें कि क्या वे आपके ब्लड प्रेशर को प्रभावित कर सकते हैं। कुछ दवाएँ बीपी बढ़ा सकती हैं।
ब्लड प्रेशर बहुत ज्यादा हो तो क्या करें?
यदि बीपी की रीडिंग 180/120 mmHg या इससे अधिक आती है, तो कम से कम एक मिनट शांत बैठकर दोबारा मापें। यदि रीडिंग इतनी ही बनी रहती है, तो तुरंत स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें।
यदि इसके साथ सीने में दर्द, साँस लेने में परेशानी, अचानक कमजोरी या सुन्नपन, देखने में बदलाव अथवा बोलने में कठिनाई हो, तो दोबारा मापने के लिए इंतजार न करें। तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।
बहुत अधिक बीपी को जल्दी कम करने के लिए अपनी तरफ से अतिरिक्त दवा न लें। सही कदम आपकी स्वास्थ्य स्थिति और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करता है।
हाई ब्लड प्रेशर से जुड़े आम सवाल
1. क्या हाई बीपी बिना किसी लक्षण के हो सकता है?
हाँ। बहुत से लोगों को हाई बीपी होने पर कोई स्पष्ट लक्षण महसूस नहीं होता। नियमित जाँच ही इसका पता लगाने का भरोसेमंद तरीका है।
2. क्या रोज पैदल चलने से बीपी नियंत्रित हो सकता है?
नियमित पैदल चलना और दूसरी शारीरिक गतिविधियाँ बीपी नियंत्रित रखने में मदद कर सकती हैं। हालांकि, कुछ लोगों को इसके साथ दवाओं की भी जरूरत होती है।
3. हाई बीपी में कितना नमक खाना चाहिए?
WHO वयस्कों के लिए प्रतिदिन कुल 5 ग्राम से कम नमक लेने की सलाह देता है। इसमें भोजन में मिलाया गया नमक और खाद्य पदार्थों में पहले से मौजूद नमक भी शामिल है।
4. क्या बीपी सामान्य होने पर दवा बंद कर सकते हैं?
नहीं। बीपी सामान्य रहने का कारण दवा का असर भी हो सकता है। दवा बंद करने या उसकी खुराक बदलने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
5. हाई बीपी की जाँच कितनी बार करनी चाहिए?
जाँच की आवृत्ति आपकी उम्र, पिछली रीडिंग और स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करती है। यदि पहले से हाई बीपी है, तो डॉक्टर के बताए समय पर रीडिंग लें और उनका रिकॉर्ड रखें।
6. हाई बीपी के लिए किस डॉक्टर को दिखाना चाहिए?
आप जनरल फिजिशियन या इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ से शुरुआत कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर वे आपको हृदय रोग विशेषज्ञ के पास भेज सकते हैं।
निष्कर्ष
हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने के लिए रोजमर्रा की आदतों में सुधार करना जरूरी है। कम नमक वाला संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और समय-समय पर बीपी की जाँच इसमें मदद कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से दवाएँ लेना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
बीपी बढ़ा हुआ आने पर इसे नजरअंदाज न करें। अपनी रीडिंग का रिकॉर्ड रखें, नियमित जाँच करवाएँ और योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार उपचार लें।
संदर्भ और अधिक जानकारी
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO): हाई ब्लड प्रेशर की जानकारी
- WHO: नमक और सोडियम का सेवन कम करने की सलाह
- American Heart Association: हाई ब्लड प्रेशर संबंधी जानकारी
चिकित्सकीय अस्वीकरण: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य शिक्षा के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श करें।
