Crop disease

पॉलीहाउस में पादप परजीवी निमेटोड का प्रबंधन Protected cultivation is an emerging technology for raising high value vegetable and ornamental crops under controlled environmental conditions which gives manifold increase in yield per unit area and is being done with green house, shade net, plastic tunnel and mulch. The application of polyhouse technology is feasible in the tropical and subtropical climatic conditions of India. Under polyhouse condition, high temperature and relative humidity with general poor plant hygienic conditions provide ideal conditions for the introduction and rapid multiplication of various insect-pests including plant parasitic nematodes (PPNs). Among PPNs, Meloidogyne spp. are the most destructive and difficult to control in protected cultivation system. Further, it is...

बायोएजेंट ट्राइकोडर्मा: वैश्विक बदलते परिवेश में एक उम्मीद  Over the decades, rampant use of fungicides in plant disease management has led to irreparable damage to environment and also a health hazard. Therefore, the need of the hour is to accelerate adoption of sustainable agricultural practices that have minimal adversarial effect on environment, humans and other living beings. In this context, adoption of organic agricultural practices that excludes application of the chemicals in agriculture is suggested to reduce the cost of cultivation thereby enhancing profitability of the agricultural produce and could play a great role in doubling of farmers income in India by 2022. Among the available disease management strategies, microbial fungicides are considered...

Management of Whitegrub in Kharif Crops सफ़ेद लट (whitegrub) खरीफ की फसलों जैसे मूंगफली, मूंग, मोठ, बाजरा, सब्जियों इत्यादि पौधों की जड़ो को काटकर हानि पहुँचती है। ये मूंगफली जैसी मुसला जड़ो वाली फसलों में,  बाजरा जैसे झकड़ा जड़ वाली फसलों की अपेक्षा अधिक नुकसान करती है । राजस्थान के हल्के बालू मिटटी वाले क्षेत्रो में होलोट्राइकिया नामक भृंगो की सफ़ेद लटें अत्यधिक हानि करती है । सफ़ेद लट का जीवन चक्र :  राजस्थान के हल्के बालू मिटटी वाले क्षेत्रो में होलोट्राइकिया नामक भृंगो की सफ़ेद लटें एक वर्ष में केवल एक ही पीढ़ी पूरी करती है । मानसून अथवा मानसून पूर्व की पहली अच्छी वर्षा के पश्चात इस किट के भृंग सांयकाल गोधूलि वेला के...

7 major diseases of Paddy and their management हमारे देश की सबसे प्रमुख धान्य फसल धान है। धान की फसल पर अनेक तरह की समस्याएँ आ सकती हैं, रोग आक्रमण कर सकते हैं तथा इन रोगों के रोगकारक जीव की प्रकृति में विभिन्नता होने के कारण इनकी रोकथाम के उपाय भी भिन्न-भिन्न होते हैं। अतएवः रोगों का निदान एवं उसके प्रबन्धन के विषय में जानकारी अत्यावश्यक है। सबसे पहले हमें स्वस्थ बीज की बात करनी चाहिए क्योंकि अगर किसान भाइयों के पास स्वस्थ बीज उपलब्ध हो तो आधी समस्याएँ स्वतः समाप्त हो जाती हैं। अगर आपके पास स्वस्थ बीज की उपलब्धता नहीं है तो आप बीजोपचार करके आधी से अधिक समस्याओं से...

Seed treatment: the basis of prosper farmers हमारेे देश में ऐसे किसानों की संख्या ज्यादा है जिनके पास छोटे-छोटे खेत है और प्रायः खेती ही उनके जीवन-यापन का प्रमुख साधन है। आधुनिक समय मे खाधान्न की मांग बढ़ती जा रही है तथा आपूर्ति के संसाधन घटते जा रहे है।  विज्ञान के नवीन उपकरणों, तकनीकों तथा प्रयोगों से किसानों की स्थिति मे सुधार हुआ है। नवीन तकनीकों के प्रयोग करने से उनकी जीवन शैली में तीव्र बदलाव आये है। इन्ही में से एक तकनीक बीचोपचार है। जिसको सुनियोजित तरीके से अपनाने से खेती की उत्पादकता बढ़ सकती है। बीजोपचार एक सस्ती तथा सरल तकनीक है, जिसे करने से किसान भाई बीज जनित एवं...

Bakanae disease of rice in basmati rice: Symptoms and control measures बकाने रोग, धान (ओरायजा सटाइवा एल.) की फसल के उभरते हुए रोगों में से एक है। भारत में यह रोग रोग पहली बार थॉमस (1931) द्वारा सूचित किया गया था। यह रोग देश के विभिन्न भागों जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, आंध्र प्रदेश, असम, महाराष्ट्र, पंजाब, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और ओडिशा आदि से रिपोर्ट किया गया है। भारत में बकाने रोग पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंण्ड में अधिक गंभीर सूचित किया गया है जहाँ बासमती की किस्में उगाई जाती हैं। जापानी भाषा में ‘बकाने’ का शाब्दिक अर्थ बुरी या बेवकूफीपूर्ण पौध होता है जो इस रोग के विशिष्ट लक्षण, सामान्य से...

ईसबगोल के प्रमुख कीट एवं रोग प्रबन्धन ईसबगोल एक महत्वपूर्ण नगदी औषधीय फसल है। इस फसल में कीट एवं रोगों का प्रकोप यदि कम होता है, परन्तु इसमें मुख्य रूप से कीटों में माहू (मोयला) एवं दीमक नुकसान पहुचाते हैं और रोगों में मृदु रोमिल फफूंद प्रमुख है। इन नाशीजीवों के जीवन चक्र के बारे में सही पता कर इसे समय पर रोकथाम कर अधिक उच्च गुणवता वाला उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। भारत का स्थान ईसबगोल उत्पादन एवं क्षेत्रफल में प्रथम है। भारत में इसका उत्पादन प्रमुख रूप से गुजरात, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तारप्रदेश एवं मध्यप्रदेश में करीब 50 हजार हेक्टयर में हो रहा हैं। म.प्र. में नीमच, रतलाम, मंदसौर,...

6 Major diseases and management of cole crop गोभी वर्गीय फसलें यानि की बंदगोभी, फूलगोभी, ब्रोकली, गाँठगोभी तथा ब्रुसेल्स स्प्राउट भारत में सर्दियों की सबसे प्रमुख सब्जियां हैं। गोभी वर्गीय सब्जियों के प्रमुख रोग जैसे मृदुरोमिल आसिता, आर्द्र पतन, काले सड़न या ब्लैक रूट, विगलन, स्क्लेरोटिनिया तना सड़न रोग एवं अल्टरनेरिया काला धब्बा रोग जैसी कई बीमारियों का प्रकोप होता है, जिससे कुल उपज में 30 से 40 प्रतिशत से अधिक की हानि होती है। 1. मृदुरोमिल आसिता (डाउनी मिल्डयू): यह एक प्रमुख कवक रोग है, जो पैरोनोस्पोरा पैरासिटिका की वजह से उत्पन्न होता है। इस रोग के लक्षण पत्तिायों की निचली सतह पर बैंगनी, भूरे धब्बों का पड़ना है। इन धब्बों पर ऊपरी सतह में...