Crop disease

फल फसलों में एकांतर वहन प्रवृत्तियां और उसका प्रबंधन Alternate bearing means production of an excessive crop one year followed by little or no crop next year and Irregular bearing means production of a large crop one year followed by a lesser crop next year / or any irregular succession of crops differing  as to yields. This phenomenon in perennial fruit crops appeared to be governed by positive and negative regulatory factors and their interplay decided the fate of meristems under optimum environmental cues. Flower initiation is very important because it is the first step towards attaining fruit.  Floral induction is considered to be the result of elevated levels of up-regulated florigenic...

Major seedborn disease of wheat and their control पादप संरचना वकार्यिकी में किसी कारणवश आये परिवर्तन जो उनको नुकसान पहुंचाकर उनका आर्थिक महत्व एवं उपज घटा देते हैं उनको पादप रोग, बीमारी अथवा पादप व्याधि कहते हैं। अध्ययन की सुविधा के लिए, पौधों केरोगों अथवा बीमारियों को सामान्यत:तीन श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है: बीज जनित रोग, मृदा जनित रोग व वायु जनित रोग। इन तीनो श्रेणियों के बीच अन्तर करने वाली कोई स्पष्ट विभाजक रेखा नहीं है और एक रोगज़नक़ अपने अस्तित्व के लिए एक या एक से ज्यादा तरीकों को अपना सकता है। उदाहरण के लिए, गेहूँ के अनावृत कंड रोग का रोगजनक अस्टीलैगो सेगेटम प्रजाति ट्रिटीसी एक अंत: बीज - जनित...

तेल ताड़ के बगीचों में लीफ वेबवर्म, एक्रिया मायरिकी (लेपिडोप्टेरा: डिप्रेसारिडे) के लिए जैव नियंत्रण एजेंट Oil palm, Elaeis guineensis Jacq.(Family: Arecaceae) is the richest source of vegetable oil with high yield levels of more than 5 tonnes of oil per ha per annum compared to other oil seeds crops that give less than 1 ton.  The productivity of the crop is often challenged by water stress, drought, biotic stresses like pests and diseases and constraints related with nutrient management. Since irrigation is given at regular intervals, the micro climate with high humidity is created, which makes congenial conditions for pests and diseases development. It is reported that the oil palms in...

Identification and management of major pests of BT Cotton कपास भारतवर्ष की एक  प्रमुख फसल है। औद्योगिक एवं निर्यात की दृष्टि से कपास भारत की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भुमिका निभाता है। भारत में कपास का उत्पादन 36. 5 मिलियन गांठ एवं क्षैत्रफल 13.3 मिलियन हैक्टेयर से 2019-20 मे हुई है। बी. टी. कपास से भारत में उत्पादन लक्ष्य व  वास्तविक उत्पादन के अंतर को काफी हद तक कम किया है। कपास उत्पादन में  प्रमुख राज्य क्रमशः गुजरात, महाराष्ट्र ,तेलंगाना, आन्ध्र प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक, पंजाब , मध्य प्रदेश , और राजस्थान है। प्रदेश में कपास के रकबा में धीरे-धीरे बढोत्तरी हो रही है। लेकिन बी.टी. कपास के  बावजूद , आज  भी कपास के...

Top Rot Disease of Sugarcane and its control बिहार प्रदेश में चीनी उद्योग कृषि पर ही निर्भर है एवं गन्ना ही चीनी मिलों के लिए कच्चा माल है तथा प्रदेश के लिए प्रमुख नगदी फसल है। जैसा कि हम सब जानते है कि गन्ना एक दिर्घ अवधि वाला फसल है जो खेतों में खड़ी रह कर विभिन्न ऋतुओं से गुजरता है एवं अनेक प्रकार के किट व्याधियों के जीवन चक्र से ग्रसित हो कर गुजरता है, जिसके परिणाम स्वरूप गन्ने की फसल को काफी हद तक हानी पहुँचता है। गन्ना की खेती तना गेंड़ीयों से होती है और लगभग साल भर खेत में खडी रहती है। तना गेड़ियों से उपजाई जाने वाली...

Light Trap: An efficient IPM tool for farmers of Sipahijala, Tripura   समेकित नाशीजीव प्रबंधन (आईपीएम) किसानों के लिए एक प्रभावी नीति है | यह एक स्थायी संयंत्र संरक्षण रणनीति है जो पर्यावरण की दृष्टि से सुरक्षित, आर्थिक रूप से व्यवहार्य और किसान हितैषी है । उधाराण के तौर पर त्रिपुरा में सिपाहीजला में जहाँ किसान कई फसलों की खेती कर रहे हैं परन्तू इन फसलों पर कीटो के हमले के कारणवश किसानों को उपज में भारी नुकसान उठाना पड रहा है | इन प्रमुख कीटों की दीर्घकालिक रोकथाम या हानि को सांस्कृतिक, जैविक, भौतिक, यांत्रिक उपकरणों, रासायनिक कीटनाशकों के संयोजन के माध्यम से प्रबंधित किया जा सकता है| कीटों और कीटनाशकों के...

Integrated Pests management of kinnow नीबू वर्गीय फल वाली फसलें बहुवर्षीय एवं वृक्ष नुमा होती हैं। भारत में फल उत्पादन की दृष्टि से नीबू वर्गीय फल तीसरे स्थान पर है। इस वर्ग में लगभग 162 जातियाँ आती हैं। इस वर्ग में मेन्ड्रिन नारंगी (किन्‍नों, नागपुर, खासी दार्जिलिंग) को एक बड़े क्षेत्रफल में उगाया जाता है। किन्नू के लिए कम आर्द्रता, गर्मी और अपेक्षाकृत सुहानी सर्दी अनुकूल होती है। उत्तर-भारत में जहाँ पर तापमान गिर कर 1-66° से 4-40° सेल्सियस तक पहुँच जाता है वहाँ किन्नू के फल अच्छे रंग, स्वाद और अत्यधिक रसदार होते हैं। भारत में किन्‍नो का क्षेत्र लगभग 56910 हेक्टेयर है जिससे लगभग 1222-66 मेट्रिक टन वार्षिक उत्पादन होता है।...

Precautions in the use of pesticides, why and how फसलों की कीटों से सुरक्षा के लिए फसल रक्षा रसायनों अर्थात कीटानाश्कों का प्रयोग किया जाता है । ये कीटनाशक जहरीले तथा मूल्यवान होते हैं । जिनके प्रयोग की जानकारी न होने के कारण इनके नुकसान भी हो सकते हैं । इसलिए कुछ बातों का ध्यान रखने के साथ-साथ इनके प्रयोग के समय क्या-क्या सावधानियाँ रखनी चाहिए, इसकी जानकारी किसानों को होना अति आवश्यक है । कीटनाशकों के घातक प्रभाव से बचने के लिए आवश्यक होता है कि उन पर लिखे हुए निर्देशों का पालन सही ढंग से किया जाय । जिसमें किसी प्रकार की लापरवाही न वरती जाए क्योंकि थोड़ी सी असावधानी...