07 May ओरोबेंकी, भारतीय सरसों की एक अनसुलझी समस्या एवं उसके समाधान के उपाय
Orobanche, an unsolved problem of Indian mustard and ways of its management भारत में खेती की जाने वाली सात खाद्य तिलहनी फसलों में, रेपसीड-सरसों का तेल उत्पादन में 2.9% का योगदान होता है जो कि मूंगफली के बाद दूसरे स्थान पर आता है और ये भारत के तिलहन अर्थव्यवस्था का कुल 28% साझा करता है। भारत में सरसों को उगाने वाले प्रमुख राज्यों के अधिकांशतः क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार के जैविक और अजैविक तनावों का असर पड्ता रहता है। इन तनावों में, ओरोबेंकी (Orobanche) प्रमुख चिंता का विषय बन गया है। ओरोबेंकी या ओरोबेंकी (फेलिपेन्च और ओरोबैन्के) ओरोबेंकिएसी परिवार के समूह से जुड़ीीी, एक बाध्यकारी जड़ निहित - परजीवी घास हैं और दुनिया भर में सरसों और अन्य फसलों में सबसे खतरनाक जैविक तनाव का एक मूल कारण है। भारत में, पी. रमोसा और पी. ईजीप्टियाका दो प्रमुख ओरोबेंकी की प्रजातियां हैं, जिससे भारतीय सरसों (ब्रैसिका जुंसिया) ग्रसित हैं। हालांकि, कई रासायनिक और सांस्कृतिक विधियों एवम् प्रथाओं को विकसित किया गया और उसे इस समस्या को नियंत्रित करने के लिए उपयोग किया जा रहा है। लेकिन, इनमें से कोई भी विधि किसान के खेतों में इस परजीवी घास के खतरे का सामना करने में प्रभावी नहीं है। इसलिए, ओरोबेंकी से निजात और सरसों में प्रतिरोधी क्षमता विकसित करने के लिए प्रजनन और जैव-प्रौद्योगिकी संबंधी दृष्टि कोणों...