27 Oct भारत की अर्थव्यवस्था पर अमेरिकी शुल्क का प्रभाव
Impact of US tariffs on India's economy अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक संबंध दशकों से मजबूती से चले आ रहे है। भारत, विश्व के उन देशों में है जिनके साथ अमेरिका का व्यापार‐परिवहन बहुत बड़ा है। अमेरिका में भारतीय वस्त्र गहने, समुद्री उत्पाद विशेषकर झींगा, आईटी सेवाएँ, रसायन, चमड़े एवं फर्नीचर. प्रमुख निर्यात कि श्रेणियों में हैं। ये उद्योग लाखों लोगों को रोजगार देते हैं जिसमे बहुत से छोटे किसान, श्रमिक, प्रसंस्करण इकाई इनसे जुड़े हुए हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का अमेरिका को निर्यात लगभग 86.5 अरब अमेरिकी डॉलर रहा है। कुल वस्तु विनिमय में इस व्यापार का बड़ा हिस्सा है। लेकिन वर्ष 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत से आयातित कई उत्पादों पर टैक्स (टैरिफ) दरें बढ़ा दीं। पहले करीब 25% "पारस्परिक शुल्क" लागू हुआ, फिर कुछ उत्पादों के लिए यह बढ़ाकर 50% कर दिया गया। ये कदम मुख्यतः उन बाधाओं के चलते उठाया गया कि भारत रूस से तेल की खरीद कर रहा है जिसे अमेरिका ने इसे एक समस्या माना। इन टैरिफ़ों का असर सिर्फ बढ़े हुए कर भरने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि: भारतीय निर्यातकों को अभी अमेरिका में अपने सामान के लिए मांग घटी हुई महसूस हो रही है क्योंकि कीमत अधिक हो गई है। कई निर्यात आदेश रद्द कर दिये गए या टाले गए हैं, ...