16 Sep फसल रोगों का सूक्ष्म जैविक (माइक्रोबियल) कीट प्रबंधन
Microbial Pest management of crop diseases अत्यधिक रासायनिक कीटनाशकों के प्रयोग के दुष्परिणाम अब सामने आने लगे है । किसानों को यह अनुभव होने लगा है कि रासायनिक कीटनाशक अब उन्हीं शत्रु कीटों पर बेअसर हो रहे है, जिनपर वो रसायन प्रयोग कर पहले छुटकारा पा जाते थे। इसीलिए अब किसान फसल सुरक्षा के अन्य विकल्प तलाशने लगे है | अतः यह बात अब समझ में आने लगी है कि प्रकृति के जितने समीप रहकर खेती की जाय उतनी ही समस्या कम आएगी । सूक्ष्म जैविक कीट प्रबंधन (Microbial Pest Management) एक प्राकृतिक पारिस्थितिक घटना चक्र है , जिसमे नाशीजीवों के प्रबंधन में सफलतापूर्वक प्रयोग में लाया जा सकता है और यह एक संतुलित, स्थाई और किफायती कीट प्रबंधन का साधन हो सकता है| सुक्ष्जीवियों का नाशीजीवों के लिए उपयोग सूक्ष्म-जैविक प्रबंधन कहलाता है | यह जैविक प्रबंधन का नया पहलु है, जिसमे नाशीजीवों के रोगाणुओं का उपयोग उनके नियंत्रण के लिए किया जाता है| इसके लिए उपयोग में लाये जाने वाले सूक्ष्मजीवों को जैविक कीटनाशक कहते है,जो वस्तुतः कम संख्या में प्रकृति में उपलब्ध रहते है| व्यवहारिक रूप से सूक्ष्म-जैविक प्रबंधन के लिए कीटों के प्राकृतिक शत्रुओं को ढूढ़कर ,पाल पोसकर (by rearing) और उनकी संख्या में वृद्धि करके उन्हें नाशीजीवों के प्रबंधन हेतु उपयोग में लाया जाता है| प्रकृति में बहुत से ऐसे सूक्ष्मजीव...