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टपक सि‍ंचाई Tag

Applications of Unmanned Aerial Vehicles Drones in Agriculture मानव रहित हवाई वाहन (UAV) को आमतौर पर ड्रोन के रूप में भी जाना जाता है׀ एक मानवरहित हवाई वाहन (यूएवी) एक प्रकार का विमान है जो मानव पायलट के बिना काम करता है׀ पिछले 10-15 वर्षों में, रेडियो नियंत्रित मॉडल से उच्च अंत प्रौद्योगिकी परिवर्तनों के साथ, ड्रोन विभिन्न प्रकार के कार्यों से एकीकृत हैं׀ मूल रूप से, ड्रोन प्रौद्योगिकी विमान-रोधी लक्ष्यों का संचालन करने, खुफिया जानकारी जुटाने और दुश्मन के कुछ क्षेत्रों पर नजर रखने के लिए सेना द्वारा नियोजित की जाती थी परन्‍‍‍‍तू आजकल ड्रोन तकनीक का उपयोग आम नागरि‍‍‍‍‍‍कों द्वारा भी विभिन्न प्रकार के लिए कार्यों मे किया जाता है।  कृषि में अभी तक ड्रोन का उपयोग कुछ ही जगह पर किया जा रहा है। इसलिए, कृषि में यूएवी यानि‍ मानव रहित हवाई वाहन के उपयोग की काफी संभावनाए हैं। यूएवी एसोसिएशन, इंटरनेशनल ने हर साल 85-92% की वार्षिक वृद्धि , विशेष रूप से कृषि के बाजार में, दर्ज की है। वास्तव में, कृषि ड्रोन बाजार आने वाले वर्षों में 38% से अधिक बढ़ने की उम्मीद है। बढ़ती जनसंख्या स्तर और बदलते जलवायु पैटर्न के कारण, कुशल कृषि की आवश्यकता अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है। यूएवी के प्रकार  यूएवी के चार प्रमुख प्रकारों की पहचान की जाती है, जो हैं: मल्टी रोटर यूएवी फिक्स्ड -...

Modern irrigation management in the garden सिचाई की विभिन्न विधियों में टपक या बूंद-बूंद सिंचाई, माइक्रोस्प्रिंकलर, माइक्रोजैट आदि कुछ आधुनिक सिंचाई विधियाँ हैं, परन्तु फलदार बगीचों में टपक सिंचाई अंत्यत लाभकारी सिद्ध हुई है | टपक या बूंद-बूंद सिंचाई एक ऐसी सिंचाई विधि है जिसमें पानी थोड़ी-थोड़ी मात्रा में, कम अंतराल पर, प्लास्टिक की नालियों द्वारा सीधा पौधों की जड़ों तक पहुँचाया जाता है | परम्परागत सतही सिंचाई द्वारा जल का उचित उपयोग नहीं हो पाता, क्योंकि अधिकतर पानी, जोकि पौधों को मिलना चाहिए, जमीन में रिस कर या वाष्पीकरण द्वारा व्यर्थ चला जाता है | अतः उपलब्ध जल का सही रिसाव कम हो कम हो और अधिक से अधिक पानी पौधे को उपलब्ध हो पाए | सिंचाई विधियों के अंतर्गत जल उपयोग क्षमता के आंकड़े सारणी में दर्शाये गए हैं | विभिन्न सिंचाई विधियों में अतर्गत जल उपयोग क्षमता (%) सिंचाई क्षमता विधियाँ   परम्परागत सतही सिंचाई स्प्रिंकलर टपक सिंचाई, स्रोत से पौधे तक जल पहुँच क्षमता 40-50 (नहर सिंचाई द्वारा) 100 100 पौधे में जल देने की क्षमता 60-70 70-80 90 औसतन क्षमता 30-35 50-60 80-90 कम दवाब और नियंत्रण के साथ सीधे फसलों की जड़ में उनकी आवश्यतानुसार पानी देना ही टपक सिंचाई है| टपक सिंचाई के माध्यम से पौधों को उर्वरक आपूर्ति करने की प्रक्रिया फर्टिगेशन कहलाती है, जो कि पोषक तत्वों की लिचिग व वाष्पीकरण नुकसान पर अंकुश लगाकर सही समय पर उपयुक्त फसल पोषण प्रदान करती...

Optimal planting geometry and fertilizer application method for drip irrigated vegetable crops फसलों की सिंचाई की विधियों में टपक सिंचाई पध्दति सर्वाधिक कुशल विधि है जिसमें जल का 80-90 प्रतिशत कुशल उपयोग होता है। इस पध्दति से सभी प्रकार की भूमि में कम समय एवं कम जल में सिंचाई की जा सकती  है। टपक सिंचाई पध्दति द्वारा सिंचाई में पौधों के सीमित नम क्षेत्र के कारण रोग की सम्भावना कम होती है तथा फसलों की पंक्तियों में खर-पतवार नहीं उग पाते हैं। सिंचाई की इस विधि का उपयोग पूरे विश्व में तेजी से बढ़ रहा है। सीमित जल संसाधनों और दिनों-दिन बढ़ती हुई जलावश्यकता के कारण टपक सिंचाई तकनीक सर्वाधिक उपयुक्तहै। टपक तंत्र एक अधिक आवृति वाला ऐसा सिंचाई तंत्र है जिससे जल को पौधों के मूल क्षेत्रजड़ाें के आसपास दिया जाता है। टपक सिंचाई पध्दति द्वारा सिंचाई में पौधों को आवश्यकतानुसर जल दिया जा सकता हैं। टपक सिंचाई पध्दति वाली फसलों के उत्पादन में पर्याप्त वृध्दि (20-80%) एवं गुणवत्ताा में सुधार देखा गया है। टपक सिंचाई वाली फसलों में 30-40 प्रतिशत तक उर्वरक की बचत, 80-90 प्रतिशत तक जल की बचत के साथ उत्पादन में 20-80 प्रतिशत तक की वृध्दि हो सकती है। इसके अतिरिक्त खरपतवारों में कमी, उर्जा की खपत में बचत और उत्पाद की गुणवता में बढ़ोत्तारी भी होती है। टपक सिंचाई पध्दति टपक सिंचाई...