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थनैला रोग Tag

दुधारू पशुओं में थनैला (Mastitis) रोग Mastitis or Thanela disease is mainly of two types - Clinical Thanela is easily identified by looking at the symptoms of the disease. Such as swelling in the udders, watery milk coming, salty or tasteless milk or splashing in the milk. But the external symptoms of the disease are not visible in sub-clinical Thanela. दुधारू पशुओं में थनैला (Mastitis) रोग थनैला मुख्य रूप से दुधारू पशुओं के थन की बीमारी है। इस बीमारी से ग्रसित पशु का जो दूध होता है उसका रंग और प्रकृति बदल जाती है। थन में सूजन, दूध में छिछड़े, दूध फट के आना, मवाद आना या पस आना जैसे लक्षण दिखाई देते है।थनैला रोग एक जीवाणु जनित रोग है। यह रोग ज्यादातर दुधारू पशु गाय, भैंस, बकरी को होता है। जब मौसम में नमी अधिक होती है तब इस बीमारी का प्रकोप और भी बढ़ जाता है। देसी गायों की अपेक्षा ज़्यादा दूध देने वाली संकर नस्ल की विदेशी गायों पर इस बीमारी का हमला ज़्यादा होता है। थनैला एक ऐसी बीमारी है, जिसे पूरी तरह से मिटाया नहीं जा सकता, लेकिन सावधानियों से इसे घटा ज़रूर सकते हैं। थनैला से संक्रमित गाय का दूध इस्तेमाल के लायक नहीं रहता। वो दूध फटा हुआ सा या थक्के जैसा या दही की तरह जमा हुआ...

बकरियों में होने वाले 9 प्रमुख रोग और उनके नियंत्रण के उपाय पालतुु पशुओं के रोगग्रस्त होने की पहचान के लिए उनका बारीकी से निरिक्षण करना चाहिए। बकरियों के हाव-भाव, चाल ढाल तथा व्यवहार मेे बदलाव जैसे लक्षण से रोगग्रस्त बकरी को पहचाना जा सकता है। बीीमार बकरी अकसर दूसरों से अलग हटकर खड़ी, बैठी या सोती पाई जाती है। इसके अलावा  खाना कम कर देना या छोड़ देना, जुगाली न करना। थूथन पर पसीना नही रहना और सूख जाना। शरीर के तापमान सामान्य (102.5 डिग्री फारेनहाइट या1 डिग्री सेन्टीग्रेट) से ज्यादा या कम होना। नाड़ी तथा सास के गति में बदलाव आना। पैखाना और पेशाब के रूप रंग में बदलाव आना। इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई देने पर उसे अलग रखे तथा उसका इलाज कराये। सर्वप्रथम इसके बुखार की जाच करें और अन्य लक्षणों को नोट करें। अलग-अलग बीमारियों में अलग-अलग लक्षण होते है। जीवाणु जनित रोग 1. आंत्रा विषाक्तता (इन्टेरोटोक्सीमिया) बकरियों में यह रोग क्लास्ट्रीडियम परप्रिफजेन्स जीवाणु टाईप डी द्वारा आंतों में उत्पन्न किये गये जहर (टाक्सिन) के आंतों द्वारा अवशोषण से होता है। यह जीवाणु सामान्यतः आंत में रहता है।  पशु द्वारा आवश्यकता से अधिक दाना या चारा खा लेने या खान-पान में अचानक से परिवर्तन होने से इस जीवाणु की वृद्वि दर अचानक बढ़ जाती है जिसके फलस्वरूप टाक्सिन का अत्याध्कि उत्पादन होता है। इस...

Garget (Thanala) Disease: The Biggest Problems of dairy cattle थनैला रोग (Garget), दुधारू पशुओं में होने वाली एक बीमारी है। यह बीमारी मुख्यतः गाय, भैंस,भेड़ ,बकरी सुअर आदि में होती है। जिसमे प्रभावित पशुओं के थन गर्म हो जाते है एवं सूजन बढ़ जाती है । शारीरिक तापमान बढ़ जाता है । दूध देने की क्षमता कम हो जाती है । जानवर खाना पीना बंद कर देता है । यह बीमारी प्रत्यक्ष रूप में जितना नुकसान करती है उससे कही ज्यादा अप्रत्यक्ष रूप से पशुपालको को आर्थिक नुकसान पहुंचती है! रोग कारक – यह बीमारी अनेक कारको के वजह से होती है । जैसे की जीवाणु , विषाणु , मोल्ड , फफूंद , यीस्ट, आदि इसके अलावा वातावरण प्रतिकूलता के कारण यह रोग होता है! थनैला रोग संक्रमण - रोग का प्रमुख कारण साफ सफाई अच्छी तरह से नहीं होना होता है । रोग का संचरण दूषित त्वचा पर जीवाणु का थन की नलिका में प्रवेश करने से होता है । पशु का दूध निकालने वाले ग्वालो द्वारा संक्रमित पशु से स्वस्थ पशु में होता है । थन पर गोबर व कीचड़ संक्रमण का कारण होते है । फर्श की अच्छी तरह से सफाई न होना आदि ! थनैला रोग लक्षण - अदृश्य लक्षण - प्रारम्भ में इस रोग में थन व दूध सामान्य प्रतीत होते...