26 Feb आलू बीज का प्रमाणीकरण विधि
Potato seed certification method राष्ट्रीय बीज गुणन पोलिसी के अनुसार बीज गुणन प्रावस्थाओं को तीन वर्गों में वर्गीकृत किया गया है। i) प्रजनित या मूल बीज ii) आधार बीज-I व II iii) प्रमाणित बीज । प्रमाणित बीज के बारे में यह माना जाता है कि यह बीज मिलावट रहित शुद्ध एवं रोग मुक्त होता है जिनमें रोग और कीटों के प्रति सहनशीलता होती है। जबकि आधार बीज-1 और आधार बीज-2 तथा प्रमाणित बीज की विषाणु रोगों, विजातीय किस्मों, कन्द जनित रोगों और ग्रेड सम्बन्धित सीमाओं का निर्धारण भारत सरकार द्वारा तय होता है। प्रजनित बीज की माँनीटरिंग का कार्य तो प्रमाणीकरण एजेन्सियां करती हैं किन्तु यह एजेन्सियां बीज का प्रमाणीकरण नहीं करतीं। भारत वर्ष के 21 राज्यों में राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्थाएं हैं जो विभिन्न फसलों के बीजों का प्रमाणीकरण करती हैं। किन्तु आलू बीज प्रमाणीकरण की एजेन्सियां हिमाचल प्रदेश, जम्मू और काश्मीर, पंजाब, हरियाणा, उतर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, आसाम, मध्य प्रदेश, गंजरात, उड़ीसा, कर्नाटक और तमिलनाडू में ही स्थित हैं। सामान्य बीज प्रमाणीकरण मानक का उपयोग और विस्तारण: उत्पादन क्षेत्र के अनुसार बीज आलू का वर्गीकरण तथा बीज आलू का उत्पादन पहाड़ी एवं मैदानी क्षेत्रों के हिसाब से किया जाता है। पहाड़ी और मैदानी इलाकों में उगाया गया बीज क्रमशः पहाड़ी व मैदानी बीज कहलाता है। पहाड़ी क्षेत्रों में बीज आलू आमतौर पर समुद्र...