06 Nov प्रोबायोटिक्स – प्रकृति की आंतरिक रोगहर
Probiotics - internal curator of diseases from nature सरल भाषा में प्रोबायोटिक का मतलब ‘जीवन से सम्बन्धित है’ यह शब्द ग्रीक भाषा से उत्त्पन्न हुआ है. प्रोबायोटिक सबसे पहले वर्नर कोल्थ ने १९५३ में दिया था. वास्तविक परिभाषा में प्रोबायोटिक एक ऐसा तत्व है जो एक जीव से पैदा होता है तथा दूसरे की वृद्धि में सहायक होता है. इसको हम दूसरे रूप में कह सकते है, एक जीवित सूक्ष्मजीव जो मेजबान के शरीर में आंत में रह रहे सूक्ष्मजीवों के बीच में संतुलन बनाए रखता है. लेक्टोबेसिल्स और बयोफिडम सबसे ज्यादा उपयोगी व लाभकारी प्रोबायोटिक जीवाणु है. शरीर के अन्दर एक तन्त्र होता है जो लाभदायक और हानिकारक जीवाणुओं में अंतर बता सकता है. शरीर में आंत के अन्दर हानिकारक और जहरीले जीवाणु बीमारी उत्त्पन्न करते हैं जैसे-दस्त लगना, पेट में दर्द होना, उल्टी आना इत्यादि. कोलास्ट्रडियम डिफिसल एक ऐसा हानिकारक जीवाणु है जिससे उत्त्पन्न जटिलताएँ बार-बार व लम्बे समय तक एंटीबायोटिक लेने पर भी रह जाते हैं. प्रोबायोटिक अपनी प्राकृतिक अवस्था में या उनके बीजाणु रूप में हो सकता है. बीजाणु रूप में प्रोबायोटिक एक लम्बे समय तक जीवित रहता है और यह पेट के माध्यम से बह्दान्त्र (गैसट्रओ इंटेसटिनल ट्रैक्ट) तक पहुंचता है व आगे बढना शुरू करता है. यहां पहुंचकर बैक्टीरिया की शक्ति स्वस्थ कालोनियों को विकसित करता है...