23 Feb Improved cultivation of Bakla (Broad bean)
बाकला की उन्नत खेती बाकला (विसिया फाबा, एल) एक अल्प उपयोगी रबी मौसम की दलहनी फसल है जो फेवेसी कुल के अन्तर्गत आती है। बाकला की खेती मुख्यतः मिश्र, सीरिया, चीन और अमेरिका की जाती है। भारत में इसकी खेती हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखण्ड और छत्तीसगढ़ जाती है। भारतवर्ष में प्रतिदिन दाल की आवश्यकता प्रति आदमी 200 ग्राम है जबकि दालों की उपलब्धता 42.9 ग्राम प्रति व्यक्ति है। इस प्रकार बहुत सारे भारतीय लोग संतुलित आहार से वंचित रह जाते हैं और प्रोटीन की कुपोषणता का शिकार हो जाते हैं। बाकला के बीजों को दाल के रूप में प्रयोग किया जाता है इसमें प्रचुर मान्ना में कार्बोहाडड्रेट एवं प्रोटीन पाया जाता है तथा इसके हरे फलियों को सब्जियों के रूप में व्यहार में लाया जाता है जो पौष्टिक होने के साथ रेशा का अच्छा श्रोत्र् है। सुखे हुए बीजों को बेसन बनाकर विभिन्न प्रकार के सब्जी भी बनाया जाता है। बाकला के पौधें को हरे चारे की तरह प्रयोग में लाया जाता है। दाल की बढ़ती माँग को देखते हुए किसान बाकला की खेती कर दाल की आर्पूिर्त कर सकते हैं इसमें 26 प्रतिशत प्रोटीन पाया जाता है तथा इसकी खेती कम सिंचित वाले क्षेन्नों में भी सफलतापूर्वक की जा सकती है। इस फसल की खेती ठंढे जलवायु में की जाती है...