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मक्‍का मे बीजोपचार Tag

Importance of Seed Treatment in Kharif crops बीजोपचार से फसलों की उपज बढ़ाई जा सकती है एवं फसलों में कीट रोग प्रकोप से होने वाली हानि को 10 से 15 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। सभी दलहनी फसलों के बीजों को राईजोबियम कल्चर से तथा अनाज वाली फसलों, सब्जियों व औषधीय फसलों में बीजों को एजेटोबैक्टर व पीएसबी संवर्ध (कल्चर) से उपचारित करने से पैदावार अधिक होती है। ध्यान रखेेंं बीजोपचार करते समय सर्वप्रथम फफूंदनाशक, फिर कीटनाशक रसायन औैर अंतं में संवर्ध (कल्चर) से उपचारित करें।  खरीफ ऋतु में भारत में उगाई जाने वाली प्रमुख फसलें है मुंगफली, मक्‍का , ज्‍वार , बाजरा, सोयाबीन, ग्‍वार, तथा दलहनी फसलें है। इनमे बीजोपचार करते समय बीजोपचार के उपरोक्‍त क्रम का काफी महत्‍व है। मूंगफली मे बीजोपचार कालर रॉट, जड़ गलन रोग से बचाव के लिए टेबुकोनाजोल (2 डीएम) 1.5 ग़्राम या 3 ग्राम थाइरम या 2 ग्राम मैन्कोजेब या 2 ग्राम कार्बेन्डाजिम प्रति किलो बीज की दर से उपचारित करें अथवा 4-8 ग्राम ट्राईकोडर्मा प्रति किलो बीज की दर से उपचारित कर बोए। दीमक, सफेद लट से बचाव के लिए 45 मिलीलीटर क्लोरोपायरीफॉस से प्रति किलो बीज की दर से उपचारित करें। दीमक से बचाव हेतु एसीफेट 75 एसपी 6 ग़्राम दवा का प्रति किलो बीज की दर से भी  पचार कर सकते हैं। राइजोबियम कल्चर 600...