27 Jan तुलसी एक बहुमूल्य औषधि में रोग एवं नियंत्रण
Disease control in valuable drug Basil (Tulsi) तुलसी (Basil) एक द्विबीजपत्री तथा शाकीय, औषधीय पौधा हैं। यह झाड़ी के रूप में उगताहैं और १ से ३ फुट ऊँचा होता हैं। इसकी पत्तियाँ बैंगनी आभा वाली हल्के रोएँ से ढकी होती हैं। पत्तियाँ १ से २ इंच लम्बी सुगंधित और अंडाकार या आयताकार होती हैं। पुष्प मंजरी अति कोमल एवं ८ इंच लम्बी और बहुरंगी छटाओं वाली होती हैं, जिस पर बैंगनी और गुलाबी आभा वाले बहुत छोटे हृदयाकार पुष्प चक्रों में लगते हैं। तुलसी के बीज चपटे पीतवर्ण के छोटे काले चिह्नों से युक्त अंडाकार होते हैं। नए पौधे मुख्य रूप से वर्षा ऋतु में उगते हैं और शीतकाल में फूलते हैं। पौधा सामान्य रूप से दो-तीन वर्षों तक हरा बना रहता हैं। इसके बाद इसकी वृद्धावस्था आ जाती हैं। पत्ते कम और छोटे हो जाते हैं और शाखाएँ सूखी दिखाई देती हैं। इस समय उसे हटाकर नया पौधा लगाने की आवश्यकता प्रतीत होती हैं। यह लमियेसी परिवार से सम्बन्ध रखता हैं। तुलसी के अनेक ग़ुनो के कारण इसकी खेती भारत में सदियों से चली आ रही हैं। तुलसी के पौधे के तेल में 72 % युगेनॉल की मात्रा होती हैं जो की लॉन्ग के तेल की मात्रा के बराबर होती हैं। युगेनॉल मुख्य रूप से सौंदर्य प्रसाधन, इत्र, दवाइयों में प्रयोग किया जाता...