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लाख उत्पादन Tag

Lac production in India - brief introduction भारत में फसलों की खेती के साथ-साथ कीटों का पालन भी बडे पैमाने पर कि‍या जाता है। कीटों की खेती में मुख्यतः मधुमक्खी पालन, रेशम कीट पालन और लाख कीटों की खेती प्रमुख  है। लाख कीट का पालन थोड़ा तकनीकी ज्ञान के साथ सीमित समय में आसानी से कि‍या जा सकता है। लाख शब्द संस्कृत के शब्द ‘‘ लाक्षा ’से व्युतपन हुआ  है जिसका अर्थ है  सौ हज़ार और इसके उत्पादन में बड़ी संख्या में कीड़े शामिल होते हैं। वैदिक कल से लाख कीट और उसके मेजबान पौधे का वर्णन- बटिया मोनोस्पर्म (लाक्षारु) अथर्ववेद में दर्ज है। महाभारत में यह भी उल्लेख किया गया है कि कौरवों ने लाक्षागृह को आग लगाकर  पांडवों को शारीरिक रूप से खत्म करने के मकसद से अत्यधिक ज्वलनशील लाखगृह  (लाख  घर) का निर्माण किया था। कच्चे लाख उत्पादन की स्थिति : भारत 20,000 लाख टन  के वार्षिक उत्पादन के साथ, कच्चे लाख के उत्पादन के मामले में दुनिया भर में अग्रणी लाख उत्पादक है। दुनिया के कुल उत्पादन का लगभग 80 प्रतिशत भारत में है और इसका 75 प्रतिशत मुख्य रूप से संसाधित और अर्ध-संसाधित रूपों में सौ से अधिक देशों को निर्यात किया जाता है। भारत के बाद, थाईलैंड में लाख का उत्पादन अधिक होता है। इनके साथ-साथ इंडोनेशिया, चीन, म्यांमार, फिलीपींस, वियतनाम और कंबोडिया...

Scientific Lac Cultivation and Lac Processing लाख एक प्राकृतिक राल है, जो नन्हे-नन्हे लाख कीटों द्वारा सुरक्षा हेतु अपने शरीर में उपस्थित सूक्ष्म ग्रंथियों द्वारा रेजिन्स स्त्राव के फलस्वरूप प्राप्त होता है । लाख से प्राप्त राल के हानी रहित गुणों के कारण इसका महत्व रासायनिक यौगिको के रालों से अधिक है, राल के अतिरिक्त मोम और सुन्दर लाल रंग सह उत्पाद के रूप में प्राप्त होतें है, जिनका भी व्यवसायिक महत्व है । आज न केवल लाख सज्जा के लिये उपयोगी है, अपितु औषधि खाद्य प्रसंस्करण, विधुत, सौन्दर्य प्रसाधन ,सूक्ष्म रसायन एवं सुगंध उद्योग में भी इसका इस्तेमाल होता है । कुसुमी लाख उत्पादन तकनीक ऋतुओं के आधार पर फसल चक्र - शीतकालीन (अगहनी) जुन - जुलाई में कीट संचारण एवं जनवरी - फरवरी फसल कटाई । ग्रीष्मकालीन (जेठवी) जनवरी - फरवरी में कीट संचारण एवं जून जुलाई में फसल कटाई । उपयुक्त पोषक वृक्ष  कुसुमी लाख हेतु मुख्य पोषक वृक्ष कुसुम, बेर, खैर एवं सेमियालता  है। कुसुम वृक्ष में पतझड़ कम समय का होता है, तथा यह दोनो फसल शीतकालीन एवं ग्रीष्मकालीम के लिये उपयुक्त है, इसकी निम्न किसमें पायी जाती है- करिया :- इस वृक्षों की पत्तियां गहरें रंग की तथा तना एवं टहनिया गहरें भुरे रंग की होती है । चरका :- इस किस्म के वृक्ष की पत्तियां पीली, हरी एवं तना तथा टहनियां प्रायः...