19 Oct लोबिया की वैज्ञानिक खेती एवं समेकित रोग एवं कीट प्रबंधन
Scientific cultivation of Cowpea and its integrated disease and pest management. लोबिया एक महत्वपूर्ण सब्जी की फसल है लोबिया की खेती मैदानी क्षेत्रों में फरवरी से अक्टूबर तक सफलतापूर्वक की जाती है। दलहनी फसल होने के कारण यह वायुमण्डलीय नत्रजन को भुमि में संचित करती है जिससे जमीन की उर्वरता बढ़ती है एवं आगामी फसल को इस नत्रजन का लाभ मिलता है। लोबिया प्रोटीन के लिहाज से एक उत्तम फसल है तथा इसकी खेती दानें, सब्जी (हरी फली), चारे एवं हरी खाद के लिये की जाती है। कुपोषण दूर करने के लिए शाकाहारी भोजन में लोबिया का उपयोग बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें अन्य हरी सब्जियों की तुलना में प्रोटीन, फास्फोरस एवं कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है। इसमें पाये जाने वाले विभिन्न तत्वों प्रति 100 ग्राम हरी फली में नमी 84.6 ग्रा., प्रोटीन 4.3 ग्रा., कार्बोहाइड्रेट 8.0 ग्रा., कैल्शियम 80.0 ग्रा. एवं मैगनेशियम 54.0 ग्राम इत्यादी । लोबिया की खेती मक्का, बाजरा, ज्वार या दलहनी फसलों के साथ सह-फसली खेती के रूप में की जा सकती है। भूमि एवं जलवायुः लोबिया की खेती सभी प्रकार की भूमि में जहाँ पानी नहीं रूकता है, की जा सकती है। परन्तु अच्छी उपज के लिए उचित जल निकास युक्त बलुई दोमट मिट्टी अच्छी रहती है। अधिक ठंड़ की अवधि नबम्बर, दिसम्बर एवं जनवरी महीने छोड़कर साल में बाकी...