Agriculture Knowledge for Everyone

सब्‍जी मटर Tag

स्नो मटर या स्नैप मटर का पोषण और स्वास्थ्य महत्व Pea also known as the “queen” of pulses has been grown and consumed since more than 8000 years. The garden or field pea is cultivated worldwide since millennium because of the lower levels of toxins found in the seed (Liener, 1982) and apart from toxins the pea is also known as a protein rich crop having relative protein content estimated to be 25% (Monti 1983). Garden peas (P. sativum var. sativum) are generally utilized for human consumption, field peas (P. sativum var. arvense (L.) Poiret) are widely utilized in livestock and traditionally as green manure. The immature pods are also consumed as vegetable in another types of peas known as sugar snap peas or snow peas. Peas are generally categorized into two types the grain legume types and the vegetable types. The grain legumes category consists of field or dry peas whereas the vegetable types of which the pods as well as seeds both are consumed consists of garden pea, snow pea or Chinese pea and the snap pea. The peas with edible pods are classified into two classes viz. the Snow or Chinese pea and the Snap pea. The snap peas differ from snow peas in aspects like thick pod walls that are tightly...

Plant Protection Methods in Pea Crop मटर एक फूल धारण करने वाला द्विबीजपत्री पौधा है। इसकी जड़ में गांठे मिलती हैं। मटर के एक बीज का वजन ०.१ से ०.३६ ग्राम होता है। सब्जियो मे मटर का स्थान प्रमुख रहा है। इसकी खेती हरी फल्ली (सब्जी), साबुत मटर, एवं दाल के लिये की जाती है। आजकल मटर की डिब्बा बंदी काफी लोकप्रिय हो रही है। इसमे प्रचुर मात्रा मे प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फास्फोरस, रेशा, पोटेशियम एवं विटामिन्स पाया जाता है। स्वाद एवं पौष्टिकता की दृष्टि से दलहनी फसलो मे से मुख्य फसल है। इस लेख के माध्यम से मटर में पौध संरंक्षण करके अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा  सकता है मटर की फसल के रोग मटर की फसल मे रोगो मे मुख्य रूप से चूर्णिल आसिता, गेरूआ एवं उकटा लगता है वही कीटो मे मुख्य दरूप से फली भेदक, माहो एवं पर्ण सुरंगक नुकसान पहुंचाते है। 1. मटर में चूर्णिल आसिता (पाउडरी मिल्ड्यू):- इस रोग का प्रकोप शुष्क मोसम मे फलियां बनते समय होता है। सामान्यतः जल्दी तैयार होने वाली किस्मो मे यह रोग कम लगता है। इस रोग मे पत्तियों पर सफेद चूर्ण युक्त धब्बे बनने लगते हैै। रोगग्रस्त पौधा सफेद चूर्ण से ढंका दिखाई देता है जिसके कारण पौधो मे प्रकाश संश्लेषण की क्रिया मंद पड़ जाती है एवं पौधे छोटे रह जाते है। रोग की तीव्रता होने पर नये फूल नही...

Improved Cultivation Technique of Garden Pea शीतकालीन सब्जियो मे मटर का स्थान प्रमुख है। इसकी खेती हरी फल्ली (सब्जी), साबुत मटर, एवं दाल के लिये किया जाता है। आजकल मटर की डिब्बा बंदी भी काफी लोकप्रिय है। इसमे प्रचुर मात्रा मे प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फास्फोरस, रेशा, पोटेशियम एवं विटामिन्स पाया जाता है। स्वाद एवं पौष्टिकता की दृष्टि से दलहनी फसलो मे से मुख्य फसल है। देश भर मे इसकी खेती व्यावसायिक रूप से की जाती है। इस लेख के माध्यम से इसका अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिये उन्नत तकनीकी के महत्वपूर्ण पहलुओ पर प्रकाश डाला गया है- मटर की उन्नत शील किस्मेः- मटर के किस्मो को दो वर्गो मे विभाजित किया गया है जिसमे से एक फील्ड मटर व दूसरा गार्डन मटर या सब्जी मटर है- फील्ड मटरः- इस वर्ग के किस्मो का उपयोग साबुत मटर, दाल के लिये, दाने एवं चारे के लिये किया जाता है। इन किस्मो मे प्रमुख रूप से रचना, स्वर्णरेखा, अपर्णा, हंस, जे.पी.-885, विकास, शुभा्र, पारस, अंबिका आदि है। गार्डन मटरः- इस वर्ग के किस्मो का उपयोग सब्जियो के लिये किया जाता है। इसकी प्रमुख उन्नत किस्मे निम्न है- गार्डन मटर की अगेती किस्मे (जल्दी तैयार होने वाली):- ये किस्मे बोने के लगभग 60-65 दिनो बाद पहली तुड़ाई करने योग्य हो जाती है जैसे- आर्केल, असोजी, अलास्का, लिंकोलन, काशी नंदनी, पंजाब-88, मटर अगेती-6, आजाद मटर-3,...