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सुगंधि‍त पौधें Tag

सुगंधित एवं औषधीय पौधों की खेती और किसानों को इसके लाभ Growing medicinal and aromatic plants is a good diversification option for the farmers. These plants and their products not only serve as a valuable source of income for the farmers and entrepreneurs but also earn valuable foreign exchange through exports. Therefore, it is necessary to collect, conserve and evaluate aromatic plants to develop potential agricultural technologies for medicinal plants cultivation. सुगंधित एवं औषधीय पौधों की खेती और किसानों को इसके लाभ सुगंधित एवं औषधीय पौधे, पौधों का एक समूह है जो सुगंधित पदार्थों का उत्पादन और उत्सर्जन करता है तथा इसका उपयोग औषधीय रूप में किया जाता है ।  पौधों में सुगंध विभिन्न प्रकार के जटिल रासायनिक यौगिकों के कारण होता है अर्थात जिन पौधो का उपयोग फार्मेसी और परफ्यूमरी में किया जाता है, उन्हें आमतौर पर सुगंधित पौधों के रूप में परिभाषित किया जाता है। सुगंधित पोधै आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण होते है जो दवाओं, इत्र, स्वाद और सौंदर्य प्रसाधनों के लिए बुनियादी कच्चा माल प्रदान करते हैं। सुगंधित पौधों में सुगंधित यौगिक,  मूल रूप से ऐसे आवश्यक तेल जो कमरे के तापमान पर अस्थिर हो,  होते हैं। ये आवश्यक तेल गंधयुक्त, वाष्पशील, हाइड्रोफोबिक और अत्यधिक केंद्रित यौगिक हैं। उन्हें फूल, कलियों, बीजों, पत्तियों, टहनियों, छाल, लकड़ी, फलों और जड़ों से प्राप्त किया जा सकता...

Improved cultivation of Fennel through transplanting. सौंफ की खेती मुख्य रूप से मसाले के रूप में की जाती हैI सौंफ के बीजो से ओलेटाइल तेल  (0.7-1.2 %) भी निकाला जाता है, सौंफ एक खुशबु धार बीज वाला मसाला होता है | सौंफ के दाने आकार में छोटे और हरे रंग के होते है | आमतौर पर इसके छोटे और बड़े दाने भी होते है | दोनों में खुशबु होती है | सौंफ का उपयोग आचार बनाने में और सब्जियों में खशबू और स्वाद बढाने में किया जाता है  | इसके आलावा इसका उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है | सौंफ एक त्रिदोष नाशक औषधि होती है | भारत में सोंफ को राजस्थान ( सिरोही, टोंक ) , आंध्रप्रदेश , पंजाब , उत्तरप्रदेश , गुजरात , कर्नाटक और हरियाणा के भागों में उगाया जाता है | इन क्षेत्रों में सौंफ का अधिक मात्रा में उत्पादन होता है |   सौंफ के लाभ सौंफ मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए उपयोगी होती है | इससे एनीमिया जैसी बीमारी का उपचार किया जाता है | इसके आलावा पेट फूलना, दस्त, कब्ज, गुर्दे पेट का दर्द और साँस की बिमारियों को ठीक करने के लिए सौंफ का उपयोग किया जाता है | यदि किसी व्यक्ति का भोजन उचित प्रकार से नही पच रहा है तो उसे खाना खाने के...

Cultivation of Mint to earn more Profits वर्तमान वैश्वीकरण के दौर में जहां एक ओर वैश्विक कृषि व्यवसायीकरण की ओर गतिशील दिखाई देती है। वहीं दूसरी भारतीय कृषि आज भी परंपरागत खेती को अपने युवा कांधों व तकनीकी दिमाग पर बोझ बनाये बैठी है। वर्तमान समय परंपरागत खेती से हटकर बाजार मांग के अनुसार फसल उत्पादन का है जहां नये कृषि उत्पादों का उत्पादन कर किसान अपने आय को उच्चतम स्तर तक पहुंचा सके। पुदीना लेमिएसी कुल से संबंधित एक बारह मासी खुशबुदार अत: भुस्वारी प्रकार का पौधा है। पुदीने की खेती मुख्यत: उनकी हरी, ताजा खुशबूदार पत्तिायों के लिये की जाती है। गांव-घरों में पनियारी के पास जहां पानी नियमित रूप से लगता है पुदीना लगाया जा सकता है। शहरों मेें लोग अपनी छतों पर पुदीनें को गमलों में लगाकर रखते हैं तो कहीं महानगरों में कई लोग अपनी खिड़कियों तथा रोशनदानों में पुदीना लगे गमले रखते है जिससे उनकी पुदीनें की हरी ताजी पत्तिायां भी मिल जाती है। तथा घरों में हवा के साथ पुदीने की भिनी -भिनी खुशबू भी फैल जाती है। पुदीने की खेती को लेकर पिछले कई वर्षों से किसान उत्सुक दिखाई देते है, ओर हो वे भी क्यों नहीं, पुदीना है ही कुछ ऐसा कि इसका नाम सुनकर ही हम सबके मुंह में पानी भर आता है। पुदीने का आम तौर...

गुग्‍गल की खेती कैसे करें गुगल एक छोटा पेड है जिसके पत्‍ते छोटे और एकान्‍तर सरल होते हैं। यह सिर्फ वर्षा ऋतु में ही वृद्धि करता है तथा इसी समय इस पर पत्‍ते दिखाई देते हैं। शेष समय यानि सर्दी तथा गर्मी के मौसम में इसकी वृद्धि अवरूद्ध हो जाती है तथा पर्णहीन हो जाता है। सामान्‍यत: गुग्‍गल का पेड 3-4 मीटर ऊंचा होता है। इसके तने से सफेद रंग का दूध निकलता है जो इसका का उपयोगी भाग है। प्राकृतिक रूप से गुग्‍गल भारत के कर्नाटक,राजस्‍थान,गुजरात तथा मघ्‍यप्रदेश राज्‍यों में उगता है। भारत में गुग्‍गल विलुप्‍तावस्‍था के कगार पर आ गया है, अत: बडे क्षेत्रों मे इसकी खेती करने की जरूरत है। हमारे देश में गुग्‍गल की मांग अधिक तथा उत्‍पादन कम होने के कारण अफगानिस्‍तान व पाकिस्‍तान से इसका आयात किया जाता है।  गुग्‍गल उगाने के लिए जलवायु एवं भूमि: गुग्‍गल उगाने के लिए उष्‍णकटिबंधीय,कम वर्षा वाले तथा शुष्‍क जलवायु वाले क्षेत्र उपयुक्‍त होते हैं। यह अन्‍य छायादार वृक्षों के साथ अधिक वृद्धि करता है। अत: इसे वनो या बगीचों में, खेतो की मेढों पर, छायादार पेडों के नीचे, फैंसिगं के रूप में लगाया जा सकता है। रेतीली, पहाडी मृदा जिसमें जल निथार अच्‍छा हो,इसके लिए बहुत उपयुक्‍त है। यह शुष्‍क स्‍थानों में भी अच्‍छी वृद्धि करता है इसलिए असिंचित क्षेत्रों...

गुुगल उगानें की विस्‍तृत जानकारी  Guggal or Indian bdellium, is a large spinescent shrub to a small tree, inhabiting drier parts of western India. Guggal cultivation is done mainly in  Rajasthan and Gujarat. Its gum-resin is used in Ayurvedic medicines as a remedy to reduce cholesterol content in blood. It has also utility in treatment of arthritis and obesity.  A large plantation of guggal exist in Ajmer district of Rajasthan. Description of Guggal Plant The plant is a woody shrub with knotty, crooked, sping brown bracties, leaves 1-3 foliate leaf lets, sessile with serrated margin. Flowers are pinkish unisexual. Fruit is drops red, ovate with two celled stone. The ash coloured bark comes off in flakes exposing the under bark which also peels off in thin papery tolls. The shrub defoliates in winter and reserves for guggul gum extraction is high during April-May. Climate and Soil for guggal cultivation It usually occurs in hills and piedomonts, but it can be grown in warm and semi and regions on hill tops, preferring hard, rocky soils of North West India. It is also considered as a drought aria salinity resistant plant. It prefers loams to sandy loam soils with pH ranging between 7.5 to. 9.0. Soils are coarse textured, well drained and calcarious soils are generally poor...