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सूरन Tag

उच्चहन (डॉड़) भूमि में सूरन की खेती  जिमी कंद को सूरन या ओल के नाम से जाना जाता है। इसकी खेती सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ में आसानी से हो सकती है। असिंचित भूूूूमि‍ में भी इसकी खेती की जा सकती है और सिंचाई सुविधा होने पर अन्य फसलों की तुलना में अत्यधिक लाभदायक है। इसकी खेती करने के लाभ निम्न हैं। यह 9-12 महीनों की फसल है। इसे सब्जी वाली फसल, कंदीय फसल या औषधीय फसल तीनों रूप में उपयोग कि‍या जा सकता है। इसकी मांग हमेशा बनी रहती है अतः दाम अच्छा मिलता है। यह एक ऐसी फसल है जिसे किसान अपनी आवश्यकतानुसार कभी भी विक्रय कर सकता है। मेड़ो में लगाने के लिये यह अत्यंत उत्तम फसल है। इसके पत्तों को जानवर नहीं खाते है। इसमें कीट एवं बीमारी अत्यंत कम लगते हैं। तूफान, बारिश, पाला, लू से इसका मुख्य उत्पाद (कंद) सीधे प्रभावित नहीं होते हैं। जिमीकंद के घनकंदों को लम्बी अवधि तक संग्रह करके रखा जा सकता है। सूरन की खेती के लि‍ए जलवायु:- यह मूलतः उष्ण कटीबंधीय तथा उपोष्ण कटीबंधीय फसल है। इसकी खेती बस्तर के पठार से लेकर सरगुजा के पहाड़ी क्षेत्रों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के मैदानी भागों में तीनों कृषि जलवायु क्षेत्रों में आसानी से की जा सकती है। भूमि की तैयारी के लिये एक बार गहरी जुताई करके तीन चार बार हैरो चला दें। इसके बाद पाटा चलाकर खेत...