Agriculture Knowledge for Everyone

अरबी Tag

कंद सब्जी फसल अरबी उगाने की वैज्ञानिक विधि Colocasia esculenta comes in the Araceae family. Colocasia in hindi is called Arabi or Arabee. Colocasia esculenta is commonly called Taro, elephant ear, Kachchu, Jhuiya etc. This crop is mainly cultivated as a vegetable. The root tuber, the tuber, stem and leaves coming out from the side of the root tuber of Arabic are used to make different types of vegetables. कंद सब्जी फसल अरबी उगाने की वैज्ञानिक विधि अरबी की वैज्ञानिक नाम कोलोकेसिया इसकुलेनटा तथा यह एरेसी कुल में आता है। इसे विभिन्न नामों से जाना जाता है जैसेः-कच्चु, तारो, झूइयाँ आदि। इस फसल की खेती मुख्यतः सब्जी के रूप में किया जाता है। अरबी के मूल कन्द, मूल कन्द के बगल से निकले कन्दों, तना और पत्तियों का उपयोग विभिन प्रकार के सब्जियाँ बनाने में किया जाता है। अरबी के कन्द में स्टार्च, कार्बोहाइट्रेट, कैल्सियम, फॉस्फोरस, पोटासियम तथा सोडियम की मात्रा बहुतायत में पाया जाता है इसके साथ ही इसमें बहुत से सूक्ष्म तत्व भी पाये जाते हैं जो मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक होते हैं। बरसात के महिने में अरबी की माँग बढ़ जाती है क्योंकि उस समय बहुत सारी सब्जी फसल या तो नष्ट हो जाती है या उपज के लायक नहीं होती। पतों के लिए खेती करने वाली प्रभेद सालोभर हरा...

अरबी की उन्नत खेती  अरबी को विभिन्न नामों से जाना जाता है जैसेः - कच्चु, तारो, झूइयाँ आदि। अरबी के सम्पूर्ण भाग जैसे कन्द, तना और पत्तियों को सब्जी के रूप में उपयोग किया जाता है। इसमें स्टार्च, कार्बोहाइट्रेट, कैल्सियम, फास्फोरस, पोटैशियम तथा सोडियम बहुतायत मात्रा में पाया जाता है इसके साथ ही बहुत से सूक्ष्म तत्व भी पाये जाते हैं जो मनुष्य  के शरीर के लिए आवश्यक होते हैं। जुलाई - सितम्बर माह में अरबी को एक पूरक सब्जी के रूप में इस्तेमाल किया जाता है जब बाजार में बहुत सारी सब्जियों की उपलब्धता कम होती है। इस प्रकार किसान अरबी की खेती कर अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं। अरबी के लि‍ए जलवायु एवं भूमि‍ : बिहार के विभिन्न जिलों में इसकी खेती के लिए अत्यन्त उपर्युक्त जलवायु पाई गई है जिससे इसकी बढ़वार तथा पैदावार अच्छी होती है अरबी की खेती के लिए हमेशा ऊँची, उपजाऊँ तथा अच्छी जल निकास वाली भूमि उपर्युक्त होता है। चिकनी मिट्टी को छोड़ इसकी खेती सभी प्रकार के खेतों में की जाती है जिसका पी॰एच॰ मान 5.5 से 7.0 हो। रोपाई से पूर्व:- कम्पोस्ट या गोबर की सड़ी खाद 15 टन प्रति  हेक्टर फलाने के बाद मिट्ट्ी पलटने वाली हल से तथा दो जुताई देशी हल से करें तथा प्रत्येक जुताई के बाद पाटा अवश्य चला दे इससे कम्पोस्ट पूरी...

अरबी (Taro) की करे वैज्ञानिक पद्धति से खेती Taro or Colocasia is also known by the names Ghuiya, Kochai, Colocasia esculenta, etc. It is cultivated in Kharif and Zaid seasons. Its vegetable is made like potato and bhaji and pakoras are made from its leaves. Itching ends when boiled. Tuber mainly consists of starch. Vitamin 'A' and calcium, phosphorus and iron are also found in Arabic leaves. अरबी को घुईया, कोचई, Colocasia esculenta,  आदि नामों से भी जाना जाता है। इसकी खेती  खरीफ और जायद मौसम में की जाती है। इसकी सब्जी आलू की तरह बनाई जाती है तथा पत्तियों की भाजी और पकौड़े बनाए जाते हैं उबालने पर इसकी खुजलाहट समाप्त हो जाती है। कंद में प्रमुख रूप से स्टार्च होता है। अरबी की पत्तियों में विटामिन ‘ए‘ तथा कैल्शियम, फॉस्फोरस और आयरन भी पाया जाता है। (अरबी का खाद्य मूल्य- प्रति 100 ग्राम) पोषक तत्व  मात्रा नमी 37.10 ग्राम वसा 0.10 ग्राम रेशा 1.00 ग्राम खनिज पदार्थ 1.70 ग्राम प्रोटीन 3.00 ग्राम लोहा 1.70 मि.ग्रा. पोटेशियम 555.0 मि.ग्रा. थियामिन 0.9 मि.ग्रा. कार्बोहाइड्रेट 21.10 ग्राम विटामिन ‘ए’ 400.0 आई.यू. केल्शियम 40.00 मि.ग्रा. सोडियम 9.00 मि.ग्रा. अरबी की फसल केे लि‍ए जलवायु अरबी की फसल को गर्म तथा आर्द्र जलवायु की आवश्यकता होती है। इसलिए इसे ग्रीष्म एवं वर्षा दोनों ही मोसमो में सफलता पुर्वक उगाया जा सकता है। अरबी की बुवाई के लिए पर्याप्त जीवांश वाली रेतीली दोमट मिट्टी अच्छी रहती है। जिसमे कड़ी परत न हो साथ ही जल निकास की अच्छी पर्याप्त...