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Crop Cultivation
अनुज कुमार चौधरी, मणि भूषण एवं रवि केसरी
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सुथनी की खेती के लिए उन्नत तकनीक
सुथनी एक कन्दीय फसल है जिसे याम समूह में रखा गया है और यह डायसकोरेसी कुल के अंंर्तगत आती है। इसके पौधों पर छोटे छोटे काँटे पाये जाते हैं। इसे बहुत सारे नामों से जाना जाता है जैसे: - सुथनी, लेसर याम, पिंडालु या छोटा रतालु।
इसमे स्र्टाच के साथ साथ बहुत सारे सूक्ष्म तत्व भी पाये जाते है जो मनुष्य के शरीर के लिए बहुत ही उपयोगी होते है। बिहार प्रदेश में इस फसल की मांग छठ पर्व के अवसर पर बढ़ जाती है जिसे लोग प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।
इस फसल की खेती गर्म एवं आर्द्र जलवायु में की जाती है, जिसके लिए 26 - 31 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान तथा 1200 - 1500 मि॰ली॰ औसत वार्षिक वर्षा उपयुक्त होती है।
भूमि का चयन एवं खेतों की तैयारी
इस फसल की खेती के लिए उपजाऊ, दोमट या बलुई दोमट मिट्टी के साथ साथ अच्छी जल निकास वाली भूमि उपयुक्त होती है, जिसका पी॰एच॰ मान 5.5 - 6.5 हो।
खेत की तैयारी के लिए 1-2 जुताई मिट्टी पलटने वाली हल से करने के बाद 10-15 टन सड़ी हुई गोबर की खाद या कम्पोस्ट प्रति हेक्टयर की दर से खेतों पर फैला दे, उसके बाद 2-3 जुताई देशी हल से करें तथा प्रत्येक जुताई के बाद पाटा...