15 Jan Advanced cultivation of Bottle gourd by scientific method
वैज्ञानिक विधि से लौकी की उन्नत खेती कद्दू वर्गीय सब्जियों में लौकी का प्रथम स्थान है इसके हरे फलों से सब्जी के अलावा मिठाई रायता , कोफ्ता , खीर आदि बनाए जाते हैं इसकी पत्तियां तने व गूदे से अनेक प्रकार की औषधियां बनाई जाती हैं यह कब्ज को कम करने पेट को साफ करने खांसी या बलगम दूर करने में अत्यंत लाभकारी होती है इसके मुलायम फलों में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, विटामिंसव खनिज लवण प्रचुर मात्रा में पाई जाती हैं लौकी की खेती के लिए जलवायु लौकी की खेती के लिए गर्म एवं आद्र जलवायु की आवश्यकता होती है इसकी बुवाई गर्मी एवं वर्षा की समय में की जाती है यह पाले को सहन करने में बिल्कुल असमर्थ है कम तापमान पर पौधे की बढ़वार रुक जाती हैं। भूमि इसकी खेती विभिन्न प्रकार की घूमने की जाती है किंतु उचित जल धारण क्षमता वाली जीवाश्म युक्त हल्की दोमत भूल इसकी फसल सफल खेती के लिए सर्वोत्तम मानी गई है कुछ अम्लीय भूमियों में इसकी खेती की जा सकती है 1 जुलाई मिट्टी पलटने वाली हल्से करके फिर दो-तीन बार हैरो या कल्टीवेटर से करनी चाहिए किस्में कोयम्बटूर‐1- यह जून व दिसम्बर में बोने के लिए उपयुक्त किस्म है, इसकी उपज 280 क्विंटल प्रति हेक्टेयर प्राप्त होती है जो लवणीय क्षारीय और सीमांत मृदाओं में उगाने के लिए उपयुक्त...