Agriculture Knowledge for Everyone

तिलहन फसल Tag

गुणकारी फसल, राम तिल की खेती रामतिल इथोयोपिया, भारत और नेपाल में व्यापक रूप से उगाईं जाती है और मोंटाने, पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीका, बांग्लादेश, भूटान, पाकिस्तान और वेस्ट इंडीज के कुछ हिस्सों में छोटे पैमाने पर लगाईं जाती है। रामतिल मुख्य रूप से आदिवासी किसानों द्वारा अपनी पारंपरिक फसल के रूप में उगाईं जाती है इसलिए अब तक यह उपेक्षित है। यद्यपि एक गौण तिलहन फसल मानी जाती है लेकिन यह इसकी तेल सामग्री, गुणवत्ता और क्षमता के संदर्भ में बहुत महत्वपूर्ण है। रामतिल बीज प्रोटीन और फैटी एसिड में अत्यधिक समृद्ध है। यह लिनोलिक अम्ल का एक अच्छा स्रोत है और इसमें नियासिन, ओलिक एसिड, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फाइबर, स्टीयरिक एसिड, राइबोफ्लेविन और एस्कॉर्बिक एसिड जैसे आवश्यक पोषक तत्व होते हैं।  रामतिल बीज: रामतिल के बीज में 483 कैलोरी, 2.8-7.8% नमी, 17-30% प्रोटीन, 34-39% कुल कार्बोहाइड्रेट, 9–13% फाइबर, 1.8–9.9 ग्राम राख, 50-587 मिलीग्राम/100 ग्राम कैल्शियम, 180-800 मिलीग्राम/100 ग्राम फास्फोरस, 0.43 मिलीग्राम/100 ग्राम थियामिन, 0.22–0.55 मिलीग्राम/100 ग्राम राइबोफ्लेविन, और 3.66 मिलीग्राम/100 ग्राम नियासिन दर्ज किए गए हैं।   1 ग्राम रामतिल के बीज के आटे का सेवन करने पर ट्रिप्टोफैन 0.054 ग्राम, थ्रोनिन 0.237 ग्राम, आईंसोल्यूसीन 0.307 ग्राम, ल्यूसीन 0.388 ग्राम, लाइसिन 0.294 ग्राम, मेथियोनीन 0.109 ग्राम और सिस्टीन 0.177 ग्राम मिलता है। रामतिल बीज के नमूनों में निम्नलिखित धातु सांद्रता रेंज (माईक्रो ग्राम/ग्राम) क्रमश; सोडियम (159-736), पोटाश...

सरसों की उन्‍नत किस्में और उसकी वैज्ञानिक खेती  सरसों रबी में उगाई जाने वाली प्रमुख तिलहन फसल है। इसकी खेती सिचिंत एवं संरक्षित नमी द्वारा बारानी क्षेत्रों में की जाती हैl राजस्थान का देश के सरसों के उत्पादन में प्रमुख स्थान है। सरसों की खेती मुख्‍यत: तेल के लि‍ए की जाती हैै जि‍से लहटा सरसों कहते है । सरसों का उत्‍पादन साग सब्‍जी व सलाद के लि‍ए भी कि‍या जाता है पत्‍ति‍यों के लि‍ए उगाई जाने वाली सरसों को गोभी सरसों या मीठी सरसों या जापानीज सरसों भी कहते है।  इसकी पत्तियां बड़ी-बड़ी मुलायम तथा स्वदिष्ट होती हैं जो कि बोने के 20 दिन के बाद मिलने लगती हैं । सरसों की उन्‍नत किस्मेें किस्म पकने की अवधि (दि‍न) औसत उपज  (कुुं/है) विशेषतायें पूसा जय किसान 125-130 18-20 सफेद रोली उखटा व तुलासिता  रोग रोधी सिचिंत व असिंचिंत  बरनी क्षेत्रों के लिए उपयुक्तl आशीर्वाद 125-130 16-18 देरी में बुवाई की जा सकती हैl सिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्तl आर एच - 30 130-135 18-20 दाने मोटे होते हैंl मोयला का प्रकोप कमl सिंचित व असिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त l पूसा बोल्ड 125-130 18-20 मोटे रोग कम लगते हैंl लक्ष्मी (आरएच 8812 ) 135-140 20-22 फलियां पकने पर चटकती नहीं दाना मोटा और कालाl क्रांति (पी आर 15) 125-130 16-18 तुलसिता व सफेद रोलीरोधक,दाना मोटा व कत्थई रंग का असिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त l आर एच 725  136-143  25-26 इस किस्म की फलियां लम्बी और इसमें दानों की संख्या अधिक होती है जिसके कारण अन्य उन्नत किस्मों की अपेक्षा...

Seed production technology of Mustard crop भारत में सरसों का क्षेत्रफल 7.2 मि. हेक्टेयर है जॊ दुनिया में प्रथम स्थान  पर है यह कुल तिलहनी फसलों का 19.2% है। उत्पादकता में भारत, कनाडा और चीन के बाद तीसरॆ स्थान पर है जॊ दुनिया की औसत उपज से 1/2 टन प्रति हेक्टेयर कम है।  भारत में राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, गुजरात और पश्चिम बंगाल प्रमुख सरसों उत्पादक राज्य हैं। तिलहन  फसलों का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 1.4% तथा कृषि जिंसों में 7% हिस्सा है।  प्रजनक बीज उत्पादन स्थिति (2011-12) मांग ( क्विंटल )          : 48.88 उत्पादन ( क्विंटल )     :  132.83 किस्मों की संख्या           : 53 उपरोक्त स्थिति को ध्यान में रखते हुए सरसों का उत्पादन और उत्पादकता आत्म निर्भरता के लिए बढ़ाया जाना आवश्यक  है। बीज उत्पादन तकनीकि, गुणवत्ता युक्त बीज उत्पादन के लिए अपनाई जानी चाहिए।       भारत मॆं सरसों उत्पादक क्षेत्र   सरसों की बीज उत्पादन तकनीकि:  भूमि का चयन:  पिछले वर्षों मॆ दूसरी किस्मॆं  इस खॆत में न लगाई हॊ यह सुनिश्चित कर लॆं । स्वैच्छिक पौधों से बचने का कॆवल यह ही एक उपाय है। यदि एक ही किस्म उस खॆत में पिछले 3-4 वर्षों से लगा रहे हैं तो स्वस्थ फसल लेने के लिए खॆत कॊ बदलना आवश्यक  है। सरसों बीज फसल मेंं अलगाव दूरी:  विभिन्न किस्मों के परागण से बचने के लिए ब्रीडर बीज...