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परजीवी सुत्रकृमी Tag

Biological Control of Plant Parasitic nematode फ़ाइलम नेमाटोडा की अधिकांश प्रजातियां मुक्त जीने वाली (फ्री लिविंग) हैं। हालांकि, कुछ सुत्रकृमी महत्वपूर्ण फसलों को आर्थिक रूप से नुकसान कर कृषि मे एक बडी चुनौती बन चुके है। इन सबमें जड़ गाँठ सुत्रकृमी (मेलायडॊगायनीं स्पेसीज) और पुटी सुत्रकृमि (हेटेरोडेरा एवं ग्लोबोडेरा स्पेसीज) कई महत्वपूर्ण फसलों में आर्थिक नुकसान के कारण सबसे अच्छी तरह से अध्ययन किए गए सुत्रकृमि हैं। जड़ गाँठ और पुटी सुत्रकृमी अपना पुरा जीवन पौधे की जड़ क़े अंदर बिताते है। इनका जीवन चक्र दो से तीन सप्ताह से लेकर कई महीनों तक होता है, जो कि सुत्रकृमी की प्रजातियों, मेजबान की उपयुक्तता, मिट्टी और पर्यावरणीय कारकों पर निर्भर करता है। अंडों से बाहर आने के बाद, दूसरे चरण के किशोर (जे२) पौधे का पता लगा कर उसमे छेद करके प्रवेश करते है और एक परिष्कृत खाने की जगह बनाते हैं जिसे “सिंसीशीअम” या “जायंट सेल” कहा जाता है। यह जगह चयापचय रूप से सक्रिय होती है और बढते हुए सूत्रकृमी के विकास और प्रजनन को बढ़ाने के लिए पोषक तत्वों की एक निरंतर आपूर्ति प्रदान करती हैं। अलग अलग प्रजातियों के सुत्रक्रुमी अपने जीवन चक्र के अनुसार जड़ के अंदर किशोर अवस्था से कुछ समय बाद परिपक्व पुरुष और मादाओं मे परिवर्तित हो जाते है।  इनमें से पुरुष सुत्रकृमी जड़ से निकलकर...