09 Apr Embryo rescue techniques for exploiting genetic diversity in vegetable crops
सब्जी फसलों में आनुवांशिक विविधता का दोहन हेतु भ्रूण बचाव तकनीक आधुनिक युग में बढ़ते यातायात के साधन एवं औद्योगिकरण के फलस्वरुप वातावरण प्रदूषण काफी बढ़ा है। कृषि मे विशेषकर सब्जी फसलों में रासायनिक कीटनाशकों, उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से मृदा व मानव स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ा है। इस स्थिति में आवश्यक है कि ऐसी तकनीकी व किस्मों को विकसित किया जाये जिसे किसान अपनाकर कम लागत में स्वस्थ्य उत्पादन के साथ-साथ मृदा स्वास्थ्य में भी वृद्धि कर सकें। सब्जी फसलें आनुवंशिक विविधता की दृष्टि से काफी सम्पन्न है। जाति उद्भव के दौरान एक सब्जी फसल उसी परिवार या वंश की सब्जी फसल से भिन्नता के साथ-साथ कुछ समानता भी दर्शाती है। प्रायः जंगली संबंधित जातियों में जैविक (रोग प्रतिरोधकता, कीट प्रतिरोधकता, सूत्रकृमि प्रतिरोधकता इत्यादि) व अजैविक (उच्च व निम्न ताप, सूखा, प्रतिकूल परिस्थितियाॅं) प्रतिबलों को सहन करने की अद्भुत क्षमता होती है। जलवायु परिवर्तन के इस दौर में सब्जी उत्पादन को बढ़ाने व कीट व्याधियों व रोगों से नुकसान कम करने हेतु आनुवंशिक विविधता का दोहन अत्यधिक आवश्यक है। इन जंगली/ संम्बधित प्रतिरोधी जीनों को नवीनतम ग्राही प्रजातियों में समावेशीकरण के दौरान लैंगिक विसंगता या भ्रूण अधः पतन के कारण असफलता का सामना करना पड़ता है। अतः सब्जी फसलों में जंगली आनुवंशिक विविधता का दोहन हेतु भ्रूण बचाव तकनीक पिछले दशको...