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Cost effective agricultural practices  कम खर्च में- अधिक लाभ कैसे कमा यें? आज भारत ने अनाज उत्पादन के क्षेत्र में अधिक उपज देने वाली किस्मों की मदद से, आत्म निर्भरता हासिल कर ली है। लेकिन कुछ प्रमुख समस्याएं भी पैदा हुई हैं। उदाहरण के लिये धान और गेहूं की फसलों की निरंतर बुवाई करने से कई खरपतवार पनपने का अवसर मिलता है। जल्दी-2 सिंचाई करने से मिट्टी में रोग और सूक्ष्म जीव बढ़ने का अवसर मिलता है। जिसके द्वारा मिट्टी की उर्वरता कम हो जाती है।  इन सब कारणों की वजह से किसान सामर्थ्यहीन होते हुए भी, खरपतवार नियंत्रण के लिए खरपतवार-नाशी, पानी के लिए-बिजली या डीजल, कीड़े, मकोड़े के लिए-कीटनाशक, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए-रासायनिक उर्वरक, पर अधिक खर्च करना पड़ता है। जो अधिक महंगा साबित होता है। यदि किसान बुद्धि का थोड़ा सा भी उपयोग करें तो “कम लागत में अधिक उत्पादन” मुहावरा सही साबित कर सकता है।  खरपतवार की समस्या - बिना खर्च छुटकारा कैसे पायें? निरंतर चावल और गेहूं की बुवाई करने से इन फसलों में खरपतवार के कारण पर्याप्त नुकसान वहन करना पड़ता है। या उन्हें नियंत्रित करने के लिए खरपतवार- नाशी का छिड़काव करना पड़ता है। जिससे उत्पादन लागत में वृद्धि के साथ-2 किसान स्वास्थ्य के खतरों का जोखिम भी उठाता है। अगर इन दोनों फसलों के बीच में...