11 May चारा उत्पादन में जल कृषि यानि हाइड्रोपोनिक की उपयोगिता
Use of Hydroponic in Fodder Production हाइड्रोपोनिक्स या जल कृषि शब्द ग्रीक शब्द से लिया गया है जिसका अर्थ है पानी में कार्य करना अत: इस तकनीक में पौधों को बिना मिट्टी के सिर्फ खनिज घोल वाले जल में उगाया जाता है। इसमें की जाने वाली कृषि नियंत्रित वातावरण में की जाती है, जिन्हें ग्रीन हाउस कहते हैं। भारत में पशुधन की संख्या विश्व में सबसे ज्यादा है। यहां 299.9 मिलियन बोवाइन, 65.06 मिलियन भेड़ें, 135.17 मिलियन बकरियां, 0.62, मिलियन घोड़े, 0.40 मिलियन ऊंट एवं 729.2 मिलियन पोल्ट्री पाई जाती है, जो कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था एवं लोगों के जीवन यापन का एक मुख्य भाग बनाते हैं। आज के समय में हमारा देश 61.1 प्रतिशत हरा चारा, 21.9 प्रतिशत सूखी फसल के अवशेष एवं 64 प्रतिशत फीड की कमी से जूझ रहा है। कृषि से मिलने वाले फसल अवशेष जैसे की भूसा, कड़बी आदि कम घनत्व वाले रेशे होते हैं, इनमें प्रोटीन, घुलनशील कार्बोहाइड्रेट, खनिज एवं विटामिन कम मात्रा में पाए जाते हैं गुणवत्ता एवं मात्रा दोनों मापदंडों के हिसाब से देश में फीड की कमी है जो कि पशुधन विकास में एक मुख्य बाधा है हाइड्रोपोनिक (जल कृषि) के फायदे इसे ऐसे क्षेत्रों में किया जा सकता है जहां जल की कमी होती है क्योंकि इसमें सामान्य कृषि से कम जल व्यय होता है एवं...