17 Dec Improved cultivation for abundant lentils (Masoor) production
प्रचुर मात्रा में मसूर उत्पादन के लिए उन्नत खेती रबी मौसम में उगाई जाने वाली दलहनी फसलों में मसूर का महत्वपूर्ण स्थान है क्योंकि इसके दानों में 24-26% प्रतिशत प्रोटीन, 3% प्रतिशत वसा, 2% प्रतिशत रेशा, 57% प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट, कैल्सियम 68 मिली ग्राम/ 100 दाने, स्फुर 300 मिलीग्राम / 100 दाने, लौह तत्व 7 मिलीग्राम / 100 दाने, विटामिन C 450 IU पाई जाती है। इन विशेषताओ के कारण इसका उपयोग दाल के अलावा अन्य कई प्रकार के व्यंजनों में , पूर्ण दाने या आटे के रूप, में किया जाता हैं। मसूर की खेती के लिए भूमि एवं खेत की तैयारीः- मसूर की खेती प्रायः सभी प्रकार की भूमियों मे की जाती है। किन्तु दोमट एवं बलुअर दोमट भूमि सर्वोत्तम होती है। जल निकास की उचित व्यवस्था वाली काली मिट्टी मटियार मिट्टी एवं लैटराइट मिट्टी में इसकी अच्छी खेती की जा सकती है। खेत की तैयारी के लिये वर्षाकालीन फसल की कटाई के बाद भूमि में उपलब्ध नमी के अनुसार एक या दो बार देशी हल या बरवर से जुताई कर मिट्टी भुरभुरी बना ली जाती हैं। इसके तुरन्त बाद पाटा चला कर खेत समतल करने से नमी सुरक्षित रहती हैं एवं बुवाई के समय बीज एक समान गहराई पर बोया जाता हैं। जिससे बीज का अंकुरण भी अच्छा होता हैं। हल्की अम्लीय (4.5.- 8.2 पी.एच.) की भूमियों में मसूर की खेती की...