21 Nov मसूर की वैज्ञानिक खेती
Scientific cultivation of Lentil pule मध्यप्रदेश के असिंचित क्षेत्रों में चने की फसल के बाद रबी में उगाई जाने वाली दलहनी फसलों में, मसूर मुख्य फसल है। मसूर (lentil) की संरचना ही कुछ ऐसी है कि ये पानी का उपयोग इसके जीवनकाल में कम से कम करती है। इसकी पूरी ब्राहयाकृति छोटी सी झाड़ी जैसी है, तने पर सूक्ष्म रोयें पाये जाते है एवं पत्तियां भी बारीक व लंबी होती है, यही कारण है कि अन्य दलहनी फसलों की अपेक्षा मसूर की खेती को प्रति इकाई उत्पादन में पानी की कम मात्रा की आवश्यकता होती है। मसूर की फसल पाले तथा ठंड के लिये अति संवेदनशील है, फिर भी अन्य रबी दलहन फसल मटर, चना की अपेक्षा अधिक ठण्ड को सहन कर सकती है। कम सर्दी वाले इलाको में इसकी उपज कम मिलती है। इस फसल को प्रारंभिक अवस्था में ठंड तथा पकते समय कम तापक्रम की आवश्यकता होती है। इसके दानों में 2421 प्रतिशत प्रोटीन, 260 ग़्रा प्रति 100 ग्राम कैल्शियम, लोहा 754 ग़्रा प्रति 100 ग्राम में होता है, राइबोफ्लेबिन, नियासिन आदि प्रचुर मात्रा में पाया जाता है देश में मसूर की खेती अधिकांश्त: उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश एवं बिहार में होती है, मध्यप्रदेश में बड़े दाने की बहुत अच्छी मसूर पैदा होती है यहां इसकी औसत उपज 4-5 क्विं प्रति हेक्टेयर है जो कि...