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फिश एक्वेरियम निर्माण की प्रक्रिया एवं उपयोग  मछली एक्वेरियम एक जलीय प्राकृतिक सौन्दर्य का रूप है। जिसमे हम एक छोटे से आयत, वर्ग या किसी अन्य आकृति में नदी, झील, समुन्द्र या किसी जलाशय का सौन्दर्य जीवित रूप में देख सकते है एवं इस एक्वेरियम को प्रशिक्षण देने के लिए, मछली की दुर्लभ प्रजातियों को संरक्षण देने के लिए एवं एक व्यवसाय के लिये भी स्तेमाल किया जा सकता है। चुँकि जल में मछली के अतिरिक्त अन्य जीव जन्तु भी रहते है अतः उन्हे भी एक्वेरियम में संजोया जा सकता है। जैसे जलीय पादप आदि। यह एक्वेरियम एक पारदर्शी जल से भरा हुआ डिब्बा है जिसे अलग-अलग आकार एवं आकृति का बनाया जा सकता है। जैसे आयताकार, वर्गाकार, त्रिकोण, पंचकोणीय आदि। यह एक्वेरियम विभिन्न आकृति के साँचों में पिघले हुए काँच को ढालकर विषेश प्रकार के बनाया जा सकते है। जैसे पक्षी के आकर के, जानवर के आकार के, वाद्य यंत्र के आकार के आदि। आज कल ग्लोब या गोल बाउल आकार का एक्वेरियम का काफी प्रचलित है। लेकिन प्रशिक्षण के लिए आयताकार एक्वेरियम बनाना बेहतर है। क्योंकि इसे जोड़ना तो आसान होता ही है साथ ही वैज्ञानिक तौर पर आयताकार एक्वेरियम में आक्सिजन अधिक मिलती है एवं मछलीयों को धरातल के सामान्तर चलने फिरने में आसानी होती है। एक्वेरियम निर्माण के लिए आवश्यक सामग्री:- एक्वेरियम...