Agriculture Knowledge for Everyone

storage Tag

Scientific methods of harvesting, threshing , drying and storage of paddy  विश्व में भारत धान उत्पादन मे चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। देश मे लगभग 50 प्रतिशत से अधिक लोग चावल का उपयोग करते हैं। धान की फसल मे कटाई से लेकर भंडारण तक लगभग 10 प्रतिशत धान की क्षति हो जाती है। कटाई एवं इसके उपरांत धान में होने वाली क्षति को कम करने की सबसे अधि‍क आवश्यकता है। यह पाया गया है कि कटाई, मड़ाई, सुखाना एवं भण्डारण के दौरान क्षति अधिक होती है। इस क्षति से बचने के लिए वैज्ञानिक विधियों का प्रयोग करना जरूरी है। इन्हीं कुछ विधियों का विवरण यहां प्रस्तुत किया गया है। धान की कटाई:- धान की कटाई श्रमिको या शक्ति चालित यंत्रो जैसे रीपर/ कंबाइन हारवेस्टर आदि द्वारा की जाती है। श्रमिको द्वारा कटाई करने में हस्तचालित उपकरणों जैसे कि हंसिया का उपयोग किया जाता है। हंसिया द्वारा कटाई में फसल की क्षति काफी कम होती है एवं धान का पुआल भी अधिक मात्रा में मिलता है। पुआल का उपयोग पशु आहार, ईंधन एवं रसायन निर्माण में किया जाता है। अतः पुआल संरक्षण से किसानों की आय बढ़ जाती है। परन्तु हंसिया से कटाई काफी मंद गति से होती है जिससे कटाई का खर्च अधिक आता है। शक्ति चालित मशीनों में रीपर एवं ट्रैक्टर चालित कम्बाइनर...

The use of crop products available at the domestic level in food grain storage by traditional practices भारत में अनाज और तिलहन की फसलों में 10 से 20 प्रतिशत तक का नुकसान अनुमानित है (चहल, 2011)। सरकारी रिकार्ड के अनुसार, अकेले साल 2010 में सरकारी गोदामों में 11,700 टन भण्डारित खाद्यान्न सड़ जाने से भारत को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचा है (चहल, 2011)। अनाज की खपत की भारी मांग और उसके महत्व को ध्यान में रखते हुए अनाज के उचित भंडारण को नकारा नहीं जा सकता। सुरक्षित भण्डारण के लिये कई पारम्परिक प्रथाएँ आसानी से प्रयोग में लाई जाती है व काफी किफायती और वातावरण के अनुकूल है। ये प्रक्रियाएं आमतौर पर स्थानीय रुप से उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित होती है। घरेलू स्तर उपर सुरक्षित भण्डारण एक जरूरी प्रक्रिया है क्योंकि कीटों एवं सूक्ष्म जैविक कारक खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता एवं पौश्टिकता में भारी कमी का मुख्य कारण है इसके साथ-साथ ये कारक अनाजों की मात्रा में भी भारी कमी लाते है। कीटों और जैविक कारक अपने विशाक्त पदार्थों को उत्पादित कर और अपने मलमूत्र से लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव डालते है। अनाज भंडारण कीटों के प्रकार कवक : कवक एक कोषिकीय बीजाणु है जिनमें जनन स्वत: ही होता है इसलिए इनके बीजाणुओं को पर्यावरण की पहुंच से दूर रखा जाना चाहिए ताकि ये भंडारित...