15 Oct Medicinal properties of Isabgol and its cultivation.
इशबगोल के औषधीय गुण तथा उसका उत्पादन इशबगोल एक प्रकार का औषधीय पौधा होता है,यह अधिकतर मरुस्थलीय क्षेत्रों में पाया जाता है| यह भारत में मालवा एवं सिंध, अरब की खाड़ी और पर्शिया में पाया जाता है| इशबगोल को आयुर्वेद में अश्व्गोल या अश्वकर्ण के रूप में जाना जता है, जिसका शाब्दिक अर्थ “घोड़े की तरह कान है| इशबगोल का वैज्ञानिक नाम प्लैन्तेगो ओवाटा (Plantago ovata) तथा कुल प्लैंतिजिनेसी है| इशबगोल एक प्रकार की झाड़ी होती है जिसके पत्तें धान के पत्तों जैसे और डालियाँ पतली होती है| इसबगोल के बीज छोटे-छोटे नुकीले और बादामी रंग के होते हैं| प्रतेक बीज के ऊपर एक पतला सफ़ेद रंग का आवरण होता है जिसे औषधीय प्रयोग के लिए अलग कर लिया जाता है| इसी को इशबगोल की भूसी कहा जाता है| इशबगोल कि खेती औषधि पौधों में से इशबगोल बहुत महताव्पूर्ण एवं लाभकारी पौधा है। इशबगोल के लगभग आधे बाज़ार पर भारत का ही कब्ज़ा है इसके बीज का कई तरह की आयुर्वेदिक और एल्लोपैथिक दवाओ में इस्तेमाल होता है। इशबगोल की फसल लगभग 100 दिनों में पक कर तैयार हो जाती है । भारत में लगभग 3 तरह की इशबगोल पैदा की जाती है जिसमे हरियाणा -2 किस्म की इशबगोल की फसल 90 से 100 दिनों में ही पक कर तैयार हो जाती है , इसके बाद इस...