26 Apr गेहूँ में कटाई उपरांत प्रबंधन एवं भंडारण
Post harvest management and storage of wheat विश्व में उगाई जाने वाले अनाजों में गेहूँ का स्थान धान एवं मक्का के पश्चात तीसरा है और यह सभी प्रमुख सभ्यताओं में स्थायी खाद्य है। 1960 के दौरान हरित क्रांति द्वारा प्रोत्साहित होने के कारण विश्व का लगभग 36 प्रतिषत गेहूँ का उत्पादन एशिया में होता है। लगभग एक दशक से भारत का गेहूँ उत्पादन में चीन के बाद दूसरा स्थान है जिसके कारण भारत एक खाद्यान्न आत्म निर्भर देश्ा हो गया है। वर्श 2011-12 के दौरान भारत में गेहूँ का उत्पादन 93.96 मिलियन टन था जो कि पूरे विष्व में गेहूँ उत्पादन का लगभग 15 प्रतिशत है। 1950-51 के दौरान 6.45 मिलियन टन की तुलना में वर्श 2012-12 के दौरान लगभग 15 गुणा उत्पादन बढ़ा है। यद्यपि इस गुणात्मक उत्पादन ने राश्टीय खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ता प्रदान की है। किन्तु उचित कटाई, तदुपरांत प्रबंधन एवं भण्डारण को लेकर चिंताएं भी पैदा की हैं। फसल पकने के साथ ही कृशको की चिंताए समाप्त नहीं होती क्योंकि कटाई के दौरान दानों के झड़नें तथा चिड़ियों, कीटों द्वारा खेत एवं भण्डार में नुकसान की आशंका रहती है। दूसरी तरफ जल्दी कटाई से दानों में नमी अधिक होती है जिसमें कवकों की उत्पत्ति एवं खाद्य गुणवत्ता कम होने की संभावना रहती है। कटाई उपरांत नुकसान को उपलब्ध तकनीकों...