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कृषि‍ आय Tag

A goat produces approximately 1-1.5 kilograms of manure per day. A small farm of 50 goats can produce 1500-2250 kilograms of manure per month. Small farmers can prepare it themselves, further reducing costs. Given the growing demand for natural fertilizers in the current market, this is an attractive business option....

Moringa's Value Added Products to Increase Agricultural Income  वर्तमान फसल पद्धतियों एवं जलवायु की दशाओं को ध्यान में रखते हुए किसानों की आय मे वृद्धि कृषि वैज्ञानिकों के लिए एक बड़ी समस्या है। इसके लिए परंपरागत फसलों एवं बहुमूल्य औषधीय पौधों की खेती की ओर काफी ध्यान दिया जा रहा है। इस प्रकार की फसलें अल्प लागत में अधिक लाभ देकर स्थायी विकास को प्रोत्साहित करती हैं तथा अन्य सह फसलों के उत्पादन में होने वाले जोखिम को भी कम करती हैं। मोरिंगा यानि सहजन (मोरिंगा ओलीफेरा) एकवंशीय, मोरिंगेसी कुल का पौधा है जिसके सभी भागों को पोषण सम्पन्न माना जाता है। इसकी पत्तियों एवं फलियों में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन, विटामिन, खनिज व अनेक पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाये जाते हैं। हमारे देश में सहजन की एक बड़े भाग पर व्यावसायिक खेती होती है। पोषक गुणो से भरपूर सहजन के व्यावसायिक उत्पादों को विश्व भर में स्वास्थ्य वर्धक पोषक तत्वों की प्रतिपूर्ति हेतु सेवन किया जा रहा है। मोरिंगा लगभग 300 रोगों के लिए संजीवनी का कार्य करता है। अतः इसके विभिन्न भागों का प्रयोग करके व्यावसायिक रूप से निर्मित उत्पादों से न केवल पोषण प्रतिपूर्ति संभव हो सकती है बल्कि इसके मूल्य संवर्धित उत्पादों के विपणन से किसानों को अच्छी आय भी मिलती है। इसलिए इसके उत्पादों की बाजार में अच्छी ख़ासी...

Crop diversification: a new dimension to increase farmers' income पिछले पांच दशकों में कृषि उत्पादन में वृद्धि और खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करना कृषि विकास के लिए मुख्य विषय था। भारत की अधिकतर आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है जहाँ कृषि मुख्य व्यवसाय है। भारत में लगभग 93 प्रतिशत किसानों की जोत का आकर 4 हेक्टर से भी कम है एवं इसकी 55  प्रतिशत भूमि ही कृषि योग्य है। भारत सरकार द्वारा 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने का निर्धारित लक्ष्य किसान कल्याण को बढ़ावा देने, कृषि संकट को कम करने और किसानों की आय और गैर-कृषि व्यवसाय के श्रमिको के बीच समानता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। कृषि विकास के लिए कृषि उत्पादकता, उत्पादन लागत, फसल विविधीकरण, उत्पाद मूल्य आदि में सुधार आवश्यक है। इसके लिए नियत समय पर कई उपयोगी योजनाए प्रस्तावित की गईं है जैसे प्रति बूंद अधिक फसल, गुणवत्ता वाले बीज, मृदा-स्वास्थ्य कार्ड, भण्डारण और कोल्ड चेन, मूल्य संवर्धन, ई-प्लेटफार्म, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, सहायक गतिविधिया (पोल्ट्री, सेरीकल्चर, मधुमक्खी पालन और मत्स्य पालन) आदि। गैर-कृषि क्षेत्रों के लिए भूमि की उच्च मांग के कारण खेती करने के लिए भूमि की उपलब्धता कम हो रही है। विकसित प्रौद्योगिकियों को नहीं अपनाने एवं  खेतों के आधुनिकीकरण के अभाव के कारण देश में खाद्यान उत्पादकता और किसानों की आय स्तर...

Contribution of information technology in increasing agricultural income हमारे देश में कृषि का अर्थव्यवस्था में बहुत महत्वपूर्ण योगदान है। आज भी गाँवों की खुशहाली कृषि पर निर्भर करती है। इसी वजह से सरकार भी कृषि में सुधार के लिए नई-नई तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा दे रही है जिससे कृषि उत्पादन बढ़ाकर किसानों को और अधि‍क खुशहाल बनाया जा सके। इस दिशा में सरकार किसानों को उन्नत खेती की जानकारी देने , उपकरण व सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। टेलीफोन, कम्प्यूटर रेडियो, दूरदर्शन तथा इंटर्नेट आदि की मदद से किसानों तक आवश्यक जानकारी जल्दी पहुँचाने का प्रयत्न कर रही है। गाँवों को विकसित करने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग में दिन-प्रतिदिन सुधार हो रहा है। मौजुदा हालात इस प्रगति में धीमा बदलाव दिखाते हैं। फिर भी कुछ क्षेत्रों में अच्छे परिणाम दिख रहे हैं। मोबाईल का बढ़ता उपयोग किसानों के लिए बहुत उपयोगी सिद्ध होता जा रहा है। आजकल सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के द्वारा ग्रामीण क्षेत्र में कृषि को बढ़ावा मिल रहा है एवम कृषि के विकास में स्मार्टफोन और इसके अनुप्रयोग प्रभावी रूप से काम कर रहे है। स्मार्टफ़ोन और इनकी एप्लिकेशन महान नवाचारों के साथ किसानों के तनाव को कम करने व अच्छी कृषि पद्धतियों मौसम,  गुणवत्ता,  इनपुट व बाजारों की प्रवृत्ति आदि पर प्रासंगिक जानकारी...

Apiculture : Better way for increasing income in rural areas शहद और इसके उत्पादों की बढती मांग के कारण मधुमक्खी पालन एक लाभदायक एवं आकर्षक व्यवसाय बनता जा रहा है। इसमे कम समय, कम लागत व कम पूंजी निवेश की जरूरत होती है। मधुमक्खी पालन फसलों के परागण में सहायक होकर फसलों की उत्पादकता में भी वृद्धि करता है। मधुमक्खी पालन व्यवसाय शुरू करने से पहले कम से कम एक वर्ष का योजना प्रारूप तैयार करना चाहिए।   मधुमक्खी पालन व्यवसाय में आवश्यक सामग्री : लकड़ी का बॉक्स, बॉक्स फ्रेम, जालीदार कवर, दस्तानें, चाकू, शहद रिमूविंग मशीन और ड्रम इत्यादि। मधुमक्खियों का आवास : मधुमक्खियों का घर यानि मधुमक्षिकागृह एक लकड़ी का बना बॉक्स/संदूक होता है, जिसमें दो खण्ड होते है। नीचे के तीन-चौथाई खण्ड को शिशु खण्ड कहते है क्योंकि इसमें रखे छते में अण्डे, शिशु  तथा स्वयं मक्खियों के लिए अशुद्ध शहद एवं पराग संचित रहता है। ऊपर के एक-चौथाई खण्ड में मधुमक्खिया शहद जमा करती है, इसे मधु कक्ष कहते है। दोनो खण्डो के बीच एक जालीदार अवरोध रहता है, जिसमें से श्रमिक मधुमक्खिया तो एक खण्ड से दूसरे खण्ड में आ और जा सकती है परन्तु रानी मधुमक्खी नहीं। लकड़ी का यह बॉक्स चारों तरफ से बंद रहता है केवल नीचे के तल में एक छिद्र होता है, जिसमें से एक बार...

Classification of Indian Soils. भारतवर्ष जैसे विशाल देश में विभिन्न प्रकार की मिट्टियाँ पाई जाती हैं.  भारतीय मिट्टी का सर्वेक्षण वि‍ष्‍लेश्‍ण कई सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों ने किया है। यहां पार्इ जाने वाली मि‍ट्टी के मुुुुख्‍यत 5  प्रकार हैैै। जलोढ़ मिट्टी , काली मिट्टी , लाल मिट्टी , लैटेराइट मिट्टी (बलुई), तथा रेतीली (रेगिस्तानी मिट्टी)। 1. जलोढ़ मिट्टी जलोढ़ मिट्टी को दोमट और कछार मिट्टी के नाम से भी जाना जाता है. नदियों द्वारा लाई गई मिट्टी को जलोढ़ मिट्टी कहते हैं. यह मिट्टी हमारे देश के समस्त उत्तरी मैदान में पाई जाती है. प्रकृति से यह एक उपजाऊ मिट्टी होती है. उत्तरी भारत में जो जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है। वह तीन मुख्य नदियों द्वारा लाई जाती है – सिन्धु, गंगा और ब्रह्मपुत्र. इसलिए हम समझ सकते हैं कि यह मिट्टी राजस्थान के उत्तरी भाग, पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिमी बंगाल तथा असम के आधे भाग में पाई जाती है. भारतीय प्रायद्वीप के दक्षिणी भाग में पूर्वी तट पर भी जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है. यह मिट्टी कृषि के लिए बहुत उपयोगी है. ये मिट्टी नदियों के द्वारा जमा किए गए तलछट से बनती है। ये खाद से भरपूर और बहुत उपजाऊ होती है। ये उत्तरी मैदानों, नर्मदा और तापी की निचली घाटियों और उत्तरी गुजरात में पायी जाती है। इसका हर साल नवीनीकरण होता है । चावल, गेहूं, गन्ना, जूट...

वृक्ष बीमा: भारत में एक नई पहल Agriculture production and farm incomes in India are frequently affected by natural disasters such as droughts, floods, cyclones, storms, landslides and earthquakes. Susceptibility of agriculture to these disasters is compounded by the outbreak of epidemics and man made disasters such as fire, sale of spurious seeds, fertilizers and pesticides, price crashes etc. To overcome these uncontrollable factors, agriculture insurance came to life. Agricultural Insurance is a means of protecting the  agriculturist against financial losses due to uncertainties that may arise agricultural losses  arising from named or all unforeseen risks beyond their control (AIC, 2008). In this ever changing era of climate change, everything has become uncertain. To fight/adapt to these climate related vagaries, scientists are advocating to adopt climate smart agricultural (CSA) practices. One of the best CSA practice considered is agroforestry, a sustainable land use system wherein farmers grow agricultural crops along with certain tree species either simultaneously or in some spatial pattern. Agroforestry plays a vital role in the Indian economy by way of tangible and intangible benefits.At present agroforestry meets almost half of the demand of fuel wood,two thirds of the small timber, 70–80%wood for plywood, 60% of raw material for paper pulp and 9–11% of the green fodder requirement of livestock, besides meeting the...