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चने Tag

Agricultural work to be carried out in the month of November गेंहूॅ फसल:  कण्‍डूआ रोग की रोकथाम के लि‍ए कार्बेन्‍डाजि‍म अथवा थीरम 2.5 ग्रा./ कि‍ग्रा. बीज की दर से बीजोपचार करें।  गेंहूॅ की समय से बुआई के लि‍ए नवम्‍बर माह उपयूक्‍त समय है पूसा 3038 (पूसा गौतमी) एचडी 3059 (पूसा पछेती), एचडी 3042 (पूसा चैतन्‍य) एचडी 2967 ( पूसा सि‍ंधू गंगाा), एचडी 2851 (पूसा वि‍शेष) गेहूॅ की समय पर बुआई के लि‍ए उपयुक्‍त कि‍स्‍में है। गेहूॅ बुआई के 21 दि‍न बाद पहली सि‍ंचाई करें।  गेंहूॅ में  120:50:40 NPK की दर से उर्वरक डालें। बुवाई के समय नाईट्रोजन की आधी तथा फास्‍फोरस व पोटाश की पूरी मात्रा आधार खुराक के रूप में उालें। सब्‍जि‍यॉं : टमाटर तथा फूलगोभी की पछेेेेती कि‍स्‍‍‍‍‍‍मों की रोपाई करें। रोपाई से पहले खेत में 20-25 टन प्रति‍ हैक्‍टेअर की दर से गोबर की खाद व 120:100:60 कि‍ग्रा नाईट्रोजन फास्‍फोरस पोटाश प्रति‍ हैक्‍टेयर भूमि‍ में डालें। गाजर, शलजम व मूली की बुवाई करें। प्‍याज की नर्सरी तैयार करेें। प्‍याज की उन्‍नत कि‍स्‍में पूसा रेड, पूसा माधवी, पूसा रि‍द्धी कि‍स्‍मों की नर्सरी में बुआई करे। पालक में यदि‍ सफेद रतुआ के लक्षण दि‍खाई दें तों मै्रकोजेब या रि‍डोमि‍ल एमजैड 72 दव का 2.5 ग्रा./लि‍टर पानी में घोल बनाकर छि‍डाव करें। फल फसलें:   आम के पौधों मे जहां गो्ंद नि‍कलने के लक्षण दि‍खें उन्‍हे खूरच कर साफ करे तथा घाव पर वबोरडेक्‍स दवा...

 Scientific method of growing Chickpeas or Gram चना भारतीय उपमहाद्वीप की प्रमुख दलहनी फसल है जो अर्ध्द शुष्ख उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में उगाई जाती है। चने की फसल शाकाहारी लोगो के लि‍ए प्रोटीन का उत्‍तम श्रोत है भारत में चने की खेती 7.54 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में की जाती है, जिससे 7.62 कु./हे. के औसत मान से 5.75 मिलियन टन उपज प्राप्त होती है। भारत में चने की खेती मुख्य रूप से बिहार, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र तथा राजस्थान में की जाती है। भारत में सबसे अधिक चने का क्षेत्रफल एवं उत्पादन वाला राज्य मध्यप्रदेश है। छत्तीसगढ़ राज्य के मैदानी जिलो में चने की खेती असिंचित अवस्था में की जाती है। चने की खेती के लिए जलवायु चने की खेती के लिए मध्यम वर्षा और सर्दी वाले क्षेत्र सर्वाधिक उपयुक्त होते है। यह शुष्क एवं ठण्डे जलवायु की फसल है, जिसे रबी मौसम में उगाया जाता हे। फसल में फूल आने के बाद वर्षा होना हानिकारक होता है, क्योंकि वर्षा के कारण फूल के परागकण एक दूसरे से चिपक जाते, परिणामस्वरूप बीज बनाने में समस्या उत्पन्न हो जाती है। इसकी खेती के लिए 24-300 सेल्सियस तापमान उपयुक्त माना जाता है। दाना बनते समय लगभग 300 सेल्सियस का तापक्रम अच्छा रहता है। तापक्रम के उतार चढ़ाव का सीधा प्रभाव उत्पादन पर दिखाई देता है। खेत का चुनाव एवं...