07 Apr Role of Biofertilizers in organic farming
जैविक खेती में जैव उर्वरकों की भूमिका जैविक कृषि एक उत्पादन प्रणाली है जो मिट्टी, पारिस्थितिक तंत्र और लोगों के स्वास्थ्य को बनाए रखती है। यह पारिस्थितिक प्रक्रियाओं, जैव विविधता और स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल चक्रों पर निर्भर करता है। जैव उर्वरक प्राकृतिक खाद हैं जिसमें जीवाणुओं, शैवाल के सूक्ष्म जीवाणु , बीजाणु के रूप में रहते हैं। अकेले कवक या उनका संयोजन पौधों को पोषक तत्वों की उपलब्धता में वृद्धि करते हैं। कृषि में जैव उर्वरक की भूमिका विशेष महत्व रखती है, विशेष रूप से वर्तमान में रासायनिक उर्वरक की बढ़ती लागत और मिट्टी के स्वास्थ्य पर उनके खतरनाक प्रभावों के संदर्भ में। आधुनिक कृषि, संकर बीज और उच्च उपज देने वाली किस्मों का उपयोग करने पर जोर देती है जो की रासायनिक उर्वरकों और सिंचाई की बड़ी खुराक के लिए उत्तरदायी है। कृत्रिम उर्वरकों का अंधाधुंध उपयोग मृदा और जल नालियों के प्रदूषण का कुछ हद तक कारण बना है। इससे मिट्टी क़े आवश्यक पोषक तत्व और कार्बनिक पदार्थ का भी छरण हो रहा है। इससे लाभकारी सूक्ष्म जीवों का कमी हो रहा है और जिसके कारण नुकसान पहुचने वाले कीट की अप्रत्यक्ष रूप से जनसंख्या मिट्टी में बढ़ रही है और फसलों में बीमारियों की समस्याएं दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है I हरित क्रांति के बाद से रासायनिक उर्वरकों का बड़े...