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पर्वतीय कृषि Tag

Development of Hilly Agriculture With Protected Agriculture Technology पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि के तौर तरीके मेैदानी भागों से थोड़ा अलग है। जिसका मुख्य कारण वातावरण के साथ-साथ अन्य कारकों का अलग होना है जैसे की समतल भूमि का आभाव, खड़ी चढ़ाईया, सिचाई के पानी की कमी इत्यादि जो काश्तकारी को और विषम बना देती हैं। ऐसे हालातों में अनाजों या अन्य फसलो की अपेक्षा सब्जियों का उत्पादन अधिक लाभप्रद है क्योकि इनसे हमें कम भूमि से अधिक शुध्द लाभ मिलता है। इसी को ध्यान में रखतें हुए संरक्षित खेती का विकास किया गया हैं जिससे तापमान, आद्रता, सूर्य का प्रकाश एवं हवा के आगमन में फसलों की आवश्यकता के अनुसार परिवर्तन करके फसलो की उत्पादकता के साथ-साथ गुणवत्ता भी बढ़ाई जा सकती है। इस तकनीक के उपयोग से साल भर बेमौसमी सब्जियों का उत्पादन आसान हो जाता हैं पर्वतीय क्षेत्रों में जाड़ों के मौसम में तापमान इतना कम हो जाता है कि पौधो की बढ़वार लगभग रूक सी जाती है। लेकिन इन्ही पौधो को अगर पालीहाउस के अन्दर लगाते है तो इससे पौधो की बढ़वार संतोषजनक रहती है।  यह तकनीक छोटे, सीमांत एवं बड़े किसानो सभी के लिये फायदेमंद है और संरक्षित खेती पर्वतीय कृषि विकास को अधिक मजबूत बनाने में कारगर सिध्द हो सकती हैं। संरक्षित वातावरण की उपयोगिताएं एंव विशेषताऐं :- बेमौसमी सब्जियों की नर्सरी तैयार...