09 Mar जैविक नियंत्रक- विभिन्न पादप रोगों के प्रबंधन का एक पर्यावरण हितेषी उपाय
Biological Controller - An environmentally friendly way of managing various plant diseases वर्तमान समय मे पादप रोग के प्रबंधन मे विभिन प्रकार के जैव नियंत्रक उपयोग किए जा रहे है और इनकी भूमिका रोगो के उपचार मे बढ़ती जा रही है। इसका एक महत्व पूर्ण करना यह है कि ये जैव नियंत्रक पर्यावरण को नुकसान नही पाहुचते है और मिट्टी कि उर्वरक क्षमता बनाए रखते है। पौधों की बीमारी वह अवस्था होती है जिसमे पौधे अपनी वास्तविक स्थिति को खो देते है परिणाम स्वरूप पौधों की आकृति बिगाड़ जाती है और उपज में कमी आ जाती है। पादप-रोग, विभिन्न प्रकार के रोगजनको (पथोजेंस) के द्वारा उत्पन्न होते है। ये रोग जनक विषाणु, जीवाणु, कवक विभिन्न प्रकार के कीट इत्यादि हो सकते है। रोग जनक के आधार पर पादप रोगों को दो प्रकार से विभाजित किया गया है पहला गैर-संक्रामक रोग एवं दूसरा संक्रामक रोग पादप रोगों का जैविक नियंत्रण: एक सर्वे के अनुसार सम्पूर्ण भारत में प्रतिवर्ष 29 हजार करोड़ रुपए तक का नुकसान फसलों पर लगने वाली विभिन्न प्रकार की बीमारियों से होता है, एवं इसके नियंत्रण हेतु साधारणतया जहरीले रसायनों का प्रयोग किया जाता है। इन रसायनो की खपत लगभग 17.4 करोड़ रूपये प्रतिवर्ष है, जिसका 90 प्रतिशत भाग कीट, खरपतवार एवं विभिन्न रोगों के रासायनिक नियंत्रण में इस्तेमाल होता है। एक अनुमान के...